Tue. May 21st, 2024



ललित झा, राजनीतिक सम्पादक । भारत के निकट पड़ोसी तथा मित्र राष्ट्र नेपाल में चीन अपनी उपस्थिति और प्रभाव दोनों में तीब्र वृद्धि कर रहा है। पहले चीन की दिलचस्पी सिर्फ नेपाल के तिब्बत से लगती सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ साथ काठमांडू, पोखरा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों तक ही सीमित था लेकिन आज चीन
भारत के मजबूत प्रभाव वाले क्षेत्र मधेस एबम सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भारत नेपाल अंतराष्ट्रीय सीमा को अपने गतिविधियों का केंद्र बना रहा है। भारत से भौगोलिक निकटता, सामाजिक, सांस्कृतिक एबम धार्मिक समानता के कारण, मधेस, चीन की भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र बन रहा है, ताकि भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में बैठ कर अपने भारत विरोधी भूराजनीतिक गतिविधियों को अंजाम दे सके। नेपाल के सीमावर्ती जिले सप्तरी, सिरहा, महोत्तरी, सर्लाही और पर्सा जैसे जिलों में चीन की असामान्य क्रियाकलाप, कई आशंकाओं एबम सुरक्षा चिंताओं को जन्म दे रहा है। हाल ही मे, कई ऐसी घटनाएं हुई है जिससे यह स्पष्ट होता है कि अब चीन, नेपाल को अपने भूराजनितिक एबम सामरिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए प्रयोग कर रहा है। वह नेपाल की धरती का प्रयोग अपने भारत विरोधी रणनीतियों को अंजाम देने मे धड़ल्ले से कर रहा है।

(इसे भी अवश्य सुनें, क्लिक करें)

हाल ही मे नेपाल और भारत मे घटित कुछ घटनाएं , “चिनियाँ साजिश” की ओर स्पष्ट संकेत कर रही है।
30 मार्च 2024 को नेपाल की आर्थिक राजधानी बीरगंज से तीन चीनी नागरिकों को साइबर अपराध के आरोप में गिरफ्तारी तथा वहाँ से बरामद सामान जो नेपाल और भारत दोनों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाला है।
नेपाल पुलिस की विशेष टीम द्वारा वीरगंज महानगरपालिका वार्ड नं 15 मे की गयी छापेमारी में बरामद सामग्री का सीजर लिस्ट, चीन की काली करतूत की कहानी बयाँ कर रही है-
कंप्युटर– 120
मॉनिटर–188
भारतीय सिम कार्ड– 30
मोबाइल—35
लैपटॉप–4
की बोर्ड इंटरनेट स्विच–5
वाइ फाइ सेट– 2
इनवर्टर-2
इसके साथ ही दो गाड़ियां जिसमे से एक BR-01-CX-5782 नंबर की भारतीय गाड़ी भी शामिल है।इस घटना में नेपाल की पर्सा जिला पुलिस की टीम द्वारा तीन चीनी नागरिकों को गिरफ्तार भी किया गया है,
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार चीनी नागरिकों का नाम लिउ ग्यु साई (33) , वांग वोहान(26), तथा छिंग छावों (36) है, । कुछ चिनियाँ नागरिकों के फरार होने की सूचना भी है। छापामारे गये स्थल तथा वहाँ से बरामद सामग्री को देखने से यह स्पष्ट पता चलता है कि यहाँ से एक बहुत बड़े कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा था। इस मेड इन चाइना अबैध कॉल सेंटर में कुछ स्थानीय युवा भी कार्य कर रहे थे जो अब फरार बताये जा रहे हैं। पर्सा के एस. पी. कुमोद ढुंगेल का कहना है कि वीरगंज में एक बहुत बड़ा कॉल सेंटर चलाया जा रहा था, जो अबैध था और इसका संचालन भी अबैध रूप से किया जा रहा था। नेपाल पुलिस के अनुसार, इस “चाईनीज कॉल सेंटर” से नेपाल, भारत, पाकिस्तान, एबम वियतनाम जैसे देश के लोगों से सम्पर्क किया गया है। सोशल मीडिया तथा फोन के माध्यम से विभिन्न देश के लोगों से संपर्क किया गया है। नेपाल पुलिस द्वारा अबतक किये गये अनुसंधान मे कुछ स्पष्ट प्रमाण मिले हैं जिससे चीन के गलत मंसूबों का पता चलता है। कूल 120 कंप्यूटर के साथ 35 मोबाइल तथा 30 भारतीय सिम की बरामदगी से यह जाहिर होता है कि यहाँ से बहुत बड़ा मेड इन चाइना कॉल सेंटर का संचालन हो रहा था। इस संदर्भ में कुछ स्थानीय जानकारों के अनुसार, इस कॉल सेंटर से एक साथ दो महत्वपूर्ण भारत विरोधी कार्यों को अंजाम दिया जा रहा था । पहले साइबर फ्राड के जरिये भारतीय लोगों को लुटा, उसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय लोगों के राजनीतिक विचारों को प्रभावित करने का विशेष ऑपरेशन भी चलाया जा रहा था। विश्लेषकों के अनुसार भारत नेपाल अंतराष्ट्रीय सीमा पर अवस्थित वीरगंज से, चीन द्वारा संचालित “अबैध कॉल सेंटर” से, भारतीय चुनाव को, जो आगामी 19 अप्रैल 2024 से 4 जून 2024 तक आयोजित है, इसे प्रभावित करने का प्रयास हो रहा था। यहाँ से भारत विरोधी राजनीतिक अभियान का संचालन हो रहा था, और यह सब नेपाल स्थित चीनी एजेंसियों के इशारे पर किया जा रहा है। लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि नेपाल में इस तरह का यह पहला कॉल सेंटर नही है बल्कि ऐसे दो दर्जन से अधिक कॉल सेंटर का संचालन चोरी छिपे किया जा रहा है। हालाँकि नेपाल पुलिस यह तो मान रही है कि यहाँ से साइबर फ्राड के जरिये, भारतीय लोगों को निशाना बनाया जा रहा थाl लेकिन भारतीय चुनाव को प्रभावित करने की बात पर अभी वह अनुसंधान पूरा होने के बाद कुछ कहने की बात कहते है। नेपाल पुलिस से जुड़े सूत्रों के , अनुसार, नेपाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार तीन चीनी नागरिकों से पुलिस पूछताछ कर रही है लेकिन अनुसंधान में चीनी भाषा तथा चीनी नागरिकों का असहयोग, एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। वैसे भी मामला चीन से जुड़े होने के कारण, पुलिस कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रही है , मगर वहाँ से मिले सामानों एबम संकेतों से इतना स्पष्ट है कि वीरगंज स्थित इस अबैध चाइनीज कॉल सेंटर से, सोशल मीडिया के जरिये, भारतीय जनमत को प्रभावित करने का प्रयास हो रहा था।
** जनवरी 2024, इंदिरा गाँधी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट से, 90 भारतीय सिम कार्ड के साथ, दुबई जा रहे सुहेल अंसारी, अमन, तथा शोयब खान की गिरफ्तारी


*** मार्च 2024, इंदिरा गाँधी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट से कार्गो के जरिये 500 भारतीय सिम कार्ड, वियतनाम भेजते समय जब्त किया गया। इस मामले में दिल्ली पुलिस की टीम, चार लोगों को हिरासत में लेकर अनुसंधान कर रही है। अब तक जो तथ्य सामने आये है वह काफी चौकाने वाला है। फेडएक्स कुरियर कंपनी के द्वारा, सभी सिम कार्ड वियतनाम भेजा जा रहा था, जहाँ इस सिम कार्ड को, चीनी कंपनियों द्वारा खरीद लिया जाता।
*** 18 मार्च 2024, बिहार उत्तर प्रदेश की सीमा पर अवस्थित बलथरी चेक पोस्ट पर बिहार पुलिस द्वारा कुल 8874 भारतीय सिम कार्ड के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी मो. आसमाउल शेख, मो इकबाल हुसैन, एबम नूर आलम नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। पश्चिम बंगाल नंबर की कार से, विभिन्न भारतीय कंपनियों के 8874 सिम कार्ड, पांच मोबाइल तथा 18,500 नेपाली रुपया बरामद किया गया। पुलिस अनुसंधान में, इन सभी सिम कार्ड को दिल्ली से फ्लाइट के जरिये गोरखपुर एयरपोर्ट पर भेजे जाने की बात सामने आयी है, जहाँ से पुलिस गिरफ्त मे आये उक्त सभी व्यक्ति काठमांडू से गोरखपुर पहुँच सिम कार्ड, रिसीव किया था और सभी वापस बिहार के रास्ते नेपाल जा रहे थे, तभी पकड़े गये। यह सभी सिम कार्ड, काठमांडू स्थित एक अबैध चीनी कॉल सेंटर के लिए ले जाया जा रहा था।

अब सवाल उठता है कि आखिर 9000 भारतीय सिम किस मकसद से नेपाल ले जाया जा रहा था? आखिर नेपाल वियतनाम, दुबई, पाकिस्तान एबम बैंकॉक स्थित चीनी एजेंसीओ को इतना अधिक भारतीय सिम की क्यों जरूरत है?? अमूमन 60 रुपये में मिलने वाला सिम, 1300 रुपया देकर चीनी एजेंसी क्यों खरीद रही है?? उपरोक्त सभी प्रश्नों का जवाब नेपाल एबम भारतीय पुलिस द्वारा अब तक किये गये अलग अलग अनुसंधान की कड़ियों को जोड़ने से मिलता है। अब तक इतना तो स्पष्ट हो चुका है कि चीन भारी संख्या में भारतीय सिम खरीद रहा है। बात चाहे नेपाल की हो अथवा वियतनाम की या फिर दुबई या पाकिस्तान की, इन सभी देशों में चीनी एजेंसीयां, भारतीय सिम को काफी ऊँची कीमत देकर अबैध तरीके से खरीद रही है, ताकि इन्ही सिम की सहायता से सोशल मीडिया के जरिये, भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके। आजकल प्रचंड जी के नेतृत्व वाली बामपंथी गठबंधन सरकार के बनने से, नेपाल में चीन के हौसले बुलंद है। रणनीतिक् विश्लेषकों का मानना है कि ” दरअसल आजकल चीन भारत की बढ़ती अंतराष्ट्रीय भूराजनीतिक प्रभाव तथा 7.5 से 8 प्रतिशत की तीब्र गति से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर से घबराया हुआ है, इसलिए वह विश्व के विभिन्न देशों में बैठकर भारत विरोधी ग्लोबल डिजिटल अभियान का संचालन कर रहा है ताकि भारत के भूराजनीतिक, आर्थिक एबम राजनीतिक हितों को नुकसान पहुँचा सके।
हाल ही में दुनियाँ की दिग्गज आई टी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की थ्रेट इंटेलिजेंस टीम के द्वारा एक रिपोर्ट प्रकाशित किया गया है जिसमे स्पष्ट कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चीन अपने भूराजनीतिक हितों की रक्षा हेतु, जनता की राय को प्रभावित करने का हथकंडा अपना सकता है। फिलहाल उसके निशाने पर भारत, दक्षिण कोरिया तथा अमेरिका में होने वाला आम चुनाव है। माइक्रोसॉफ्ट के इस रिपोर्ट तथा नेपाल और भारतीय पुलिस के अब तक के अनुसंधान से यह स्पष्ट है कि चीनी एजेंसी के निशाने पर, भारतीय आम चुनाव है जिसे प्रभावित करने के लिए वह नेपाल समेत दुनियाँ के अन्य देशों में संचालित अपने अबैध कॉल सेंटरों के माध्यम से अंजाम देने का प्रयास कर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि चीन इन अबैध कॉल सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से, ऐसी सामग्री का निर्माण और प्रसार करेगा जो उसके हितों को लाभ पहुँचाय। इंटरनेट मीडिया पर वह ऐसा कंटेंट प्रसारित कर सकता है जिससे चुनाव के दौरान, जनता की राय को प्रभावित किया जा सके।

सिम बरामद

ऐसा नहीं है कि चीन यह सब पहली बार कर रहा है, पहले भी वह कनाडा, ताईवान जैसे देशों के चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है। दोनों देशों की पुलिस द्वारा भारी संख्या में बरामद भारतीय सिम, कंप्यूटर तथा नेपाल के विभिन्न स्थानों से संचालित मेड इन चाइना कॉल सेंटर के उद्भेदन से यह स्पष्ट है कि फिलहाल चीन के निशाने पर भारतीय आम चुनाव है।
एक खास रणनीति के तहत चीन, दक्षिण एशिया में, नेपाल को अपने भारत विरोधी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र बना रहा है, जहाँ से वह भारत विरोधी गतिविधियों को सुरक्षित रूप से अंजाम दे सके । नेपाल एबम भारत के सुरक्षा एजेंसीयों को, इसे गंभीरता से लेना चाहिए तथा नेपाल से संचालित इन अबैध चाइनीज कॉल सेंटरों को चिंहित कर बंद करने का प्रयास होना चाहिए अन्यथा चीन अपने भारत विरोधी हरकतों से भारत नेपाल प्रगाढ़ मैत्री संबंध को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। दोनों देश की सुरक्षा एजेंसी को मिलकर नेपाल से संचालित हो रहे भारत विरोधी चीनी गतिविधियों को बंद करवाने की ठोस पहल करनी चाहिए। हालांकि यह तो आनेवाला समय बतायेगा कि चीन की इन आपत्तिजनक एबम अबैध गतिविधियों से, भारत का चुनाव प्रभावित होता है या नही, लेकिन इससे डिजिटल दुनियाँ में चीन के विस्तारवादी मंसूबों का पता तो अवश्य चलता है। चुनाव प्रभावित हो या न हो, लेकिन चुनाव को प्रभावित करने की चीन की कोशिश काफी खतरनाक है। वह सिर्फ चुनाव को ही प्रभावित नही करना चाहता, बल्कि भारतीय नागरिकों को साइबर फ्राड के जरिये लूटना भी चाहता है। इसके साथ ही वह भारत नेपाल संबंध को भी नुकसान पहुँचाना चाहता है। यह एक गंभीर विषय है जिस पर नेपाल और भारत सरकार को मिलकर गंभीरता से विमर्श करना चाहिए। नेपाल सरकार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नेपाल की धरती का इस्तेमाल, भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न हो अन्यथा यह दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ मैत्री संबंधों में दरार डाल सकता है।

 

ललित झा
राजनीतिक संपादक, हिमालिनी



About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: