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अपराधी की मौत पर चर्चा संसद में हो सकती है किन्तु डा. राउत पर नहीं

 

ck raot श्वेता दीप्ति , ६ अाश्विन, काठमांडू। डा. राउत की रिहाई के सवाल पर निर्णय, या फिर उनके ऊपर आरोपों को तय करने में हो रही देरी आम जनता को समझ नहीं आ रही । आखिर देश का बीमार तंत्र क्या साबित करना चाहता है ? इतनी समझ तो आम इंसानों को भी होती है कि, जिस बात से स्थिति बिगड़े उसे जल्दी सुलझा लेना चाहिए । आज एक व्यक्ति, पूरा मधेश बन गया है और कहीं ना कहीं यह वातावरण तैयार करने में सत्ता का ही हाथ है । मधेश को उलझा कर आखिर सत्ता क्या साबित करना चाहती है ? मधेश भीतर ही भीतर सुलग रहा है और राज्य काठमान्डौ की ठण्डी हवा में सुकून की साँसें ले रहा है । डा. राउत के अपराधों की फेहरिस्त क्या इतनी लम्बी है कि प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा कि चार्जसीट में क्या क्या शामिल किया जाय, या फिर कोई संगीन मामला ही नहीं है, इसलिए उसे गढ़ने की तैयारी में देरी हो रही है ? या फिर विश्व परिदृश्य मे मधेश की छवि को दाँव पर लगाने की तैयारी हो रही है ? मधेश की जनता जो फिलहाल अपने सब्र का परिचय दे रही है, उसके सब्र को यह विलम्ब ज्यादा समय रोक नहीं पाएगी । मधेशी दलों का मधेश के पक्ष में खुलकर सामने ना आना, सत्ता पक्ष की तानाशाही नीति, यह सब काफी है इस मुद्दे को हवा देने के लिए । क्या नियति है हमारे देश की,  एक अपराधी की मौत पर चर्चा संसद में हो सकती है, किन्तु डा. राउत का नाम लेने की इजाजत नहीं है । क्या हमारे राजनेता इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि उन्हें देश की संवेदनशीलता का भान ही नहीं है ? या फिर सभी अपने अपने काले अतीत को सफेद करने की चिन्ता में फँसे हुए हैं । खैर, फिलहाल तुफान आने से पहले की खामोशी ही नजर आ रही है, देखें यह खामोशी सोनामी लाती है, या कैटरीना ।

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आज सभामुख सुवासचन्द्र नेम्वाङ ने सदन मे सी के राउत के बारे मे बोलने का  निर्देशन नही दिया ।प्रतीपक्ष की ओर से मधेशी जनअधिकार फोरम के सांसद लालबाबु राउत ने कांग्रेस-एमाले को ‘गैरजिम्मेवार’ कहा था जिसपर मुख्य सचेतक चीनकाजी श्रेष्ठ ने पहला नियमापत्ति किया था ।

नियमापत्ति करते हुये वक्तब्य को निरन्तरता देते हुये लालबाबु राउत ने राज्यद्रोह के आरोप मे गिरफ्तार कियेगये सीके राउत का प्रसंग उठाया था । जिसपर एमाले के प्रमुख सचेतक अग्नि खरेल ने दुसरा नियमापत्ति करते हुये कहा कि’सदन मे केवल विचाराधिन विषय पर ही वक्ता अपनी धारणा राख सकता है, अदालत मे विचाराधिन विषय पर प्रवेश की अनुमति नही मिलनी चहिये ।

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सभामुख नेम्वाङ्ग ने खरेल के नियमापत्ति को सदर करते हुय कहा कि ‘वक्ता माननीय -लालबाबु राउत सदन मे विचाराधिन विषय पर ही केन्द्रीत रहे ।  अदालत मे विचाराधिन विषय पर प्रवेश ना करें ।’ लेकिन फिरभी राउत घुमा फिरा कर उसी प्रसंग पर बोलने लगें तो खरेल ने दोबारा नियमापत्ति किया और उनकी धारणा रेकर्ड से हटाने की मागं किया जिसे फिर नेम्वाङ्ग सदर किया ।

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