Tue. Nov 19th, 2019

इन्सानी जिन्दगी का भला-सा मकसद होना चाहिए

बैंकर रविना देशराज श्रेष्ठ को इक्कीसवी सेञ्चुरी गोल्डेन फोनिक्स अवार्ड से नवाजा गया है । सेप्टेम्बर छ, तदनुसार भाद्र २१ के रोज

rabina deshraj shrestha
रविना देशराज श्रेष्ठ

मलेसिया के कुआलालम्पुर में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया । एसिया की एक उत्कृष्ट महिला को दिए जाने वाले इस अवार्ड के लिए ३२ मुल्कों की कामयाब और उद्योग-व्यवसाय में सक्रिय महिलाओं ने प्रतिस्पर्धा की थी । देश के आर्थिक विकास, मानवीयता और सामाजिक कामों में खास योगदान के लिए श्रेष्ठ को चुना गया है- ऐसा कहना है एसिया एक्सिलेन्सी इन्टरप्रनुअर फेडरेसन का । भारत, कोलकाता स्थित ‘मदर टेरेसाज होम फर द ओल्ड एण्ड चिल्डे्रेन’ से अपना कैरिअर शुरु करने वाली श्रेष्ठ ने स्टैर्ण्र्डड चार्र्टर्ड और नवील बैंक में अपनी सेवा प्रदान की थीं । फिलहाल मेगा बैंक में बतौर प्रमुख व्यापार अधिकृत रविना कार्यरत हैं । हिमालिनी के लिए मुकुन्द आचार्य द्वारा बैंकर रविना श्रेष्ठ से ली गई अन्तर्वार्ता के कुछ चुनिन्दा पहलू पेश हैं-
० एशिया स्तरीय अन्तरास्ट्रीय अवार्ड हासिल करने के लिए और नेपाल का नाम रोशन करने के लिए हिमालिनी की ओर से ढेर सारी बधाइयाँ । आप कैसे महसूस करती हैं
-हिमालिनी को धन्यवाद ! और अन्तरास्ट्रीय ‘सेञ्चुरी गोल्डेन फोनिक्स अवार्ड’ मिलने पर मुझे लगा सच्ची लगन हो तो नेपाल की महिलाएं भी बहुत कुछ कर सकती हैं ओर दुनिया में अपने मुल्क का नाम कामयावी की बुलन्दी पर पहुंचा सकती हैं । मैं बहुत खुश हूँ और इससे महिलाओं को और अधिक उत्साह से काम करने की प्रेरणा मिलेगी, मैं ऐसा महसूस करती हूँ । उद्योग-वाणिज्य क्षेत्र में क्रियाशील महिलाओं को यह अवार्ड और ऊर्जा-प्रेरणा प्रदान करेगा ।
० आप घर, बैंक और समाजसेवा सभी को एक साथ कैसे सम्भाल पाती हैं –
-यही तो हम लोग मैनेजमेन्ट में पढÞते है और सीखते हैं । घर, उद्योग व्यावसाय और समाजसेवा को कुशलतापर्ूवक मैनेज नहीं कर सके तो हम सफल कैसे होंगें । यह टाइम मेनेजमेन्ट के अर्न्तर्गत आता है । हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच अपनाने से हम ढेर सारी मुसीबतों से खुद को बचा सकते हैं ।
० आपकी कामयावी के पीछे कोई प्रेरणास्रोत व्यक्ति –
-मेरे पिता और माता दोनों मेरे प्रेरणा स्रोत रहे हैं । मेरे व्यक्तित्व निर्माण में उनका भरपूर योगदान रहा । पिताजी भारत में बहुत बडे कन्टैक्टर थे । इसी सिलसिले में मेरी स्कुलिङ कालिम्पोङ और कोलकाता में हर्ुइ । सेवा भावना के चलते मदर टेरेसा से भी मैं जुडÞी ।
इसके अलावा मैं स्वाध्याय -सेल्फ स्टडी) खूब करती हूँ । बहुत कुछ जानने की ललक मुझे बहुत कुछ सिखाती है । आप को यह जानकर अचरज होगा कि मैं मेस्मरिज्म भी जानती हूँ । खैर … सीखने योग्य बातें ढेÞर सारी हैं और सच कहें तो यह एक जिन्दगी बहुत कम पडÞ सकती है । इस कायनात को देखने-सुनने और समझने के लिए ।
० इस अवार्ड के बारे में कुछ और रोशनी डालेंगी –
-‘द पैलेस अफ गोल्डेन हर्सर्ेे कुआलालम्पुर, मलेसिया में पुरस्कार वितरण समारोह भव्य रूप से सम्पन्न हुआ था । एसिया एक्सेेलेन्सी इन्टरप्रेनर फेडरेसन -एइइएफ) की स्थापना सन् २०११ में हर्ुइ थी । डाटो शेरी पादुका  और डा. रबिन टान एइइएफ के संस्थापक हैं । इसका प्रधान कार्यालय मलेसिया में है । इसके अलावा चाइना, हङकङ, और ताइवान के प्रतिनिधि भी इस संस्था से जुडेÞ हंै । नेपाल कर्ेर् इ-प्लानेट प्रा.लि. के सन्तोष सापकोटा ने इस प्रतिस्पर्धा के लिए मेरा नाम सिफारिस किया था । यह पुरस्कार पाने वाली मैं नेपाल की पहली महिला हूँ । विकास, मानवहित के कार्य, देश की आर्थिक प्रगति, समाजिक सेवा ये ऐसे खास मुद्दे हैं, जिन पर जूरी विचार करते हैं इस पुरस्कार को प्रदान करते  समय । सात देशों के जूरी इस में सम्मिलित रहते हैं । इस तरह पुरस्कारयोग्य व्यक्ति का चयन होता है ।
० आप अभी जिस मेगा बैंक में सेवारत हैं, उसकी खासियत कौन-कौन सी है –
-मेगा बैंक नेपाल लिमिटेड ने ७ सावन, २०६७ से अपना कारोबार शुरु किया था । बैंक अपने शानदार तीन साल पूरा कर चुका हैं । इसके प्रोमोर्टस में १,२१९ मध्यम वर्ग के लोग ६३ जिलों से आगे आए हैं । ‘हलोदेखि हाइड्रोसम्म’ -हल से हाइड्रो तक) हमारा नारा है । यह ए क्लास का कमर्सियल बैंक है । थोडी पूँजी वाले भी हमारे साथ मिल कर बडि-बडी आर्थिक छलांग मार रहे है । इस बैंक के २८ ब्रान्च हैं और ३१ एटिएम देशभर में कार्यरत हैं । इसके अलावा ४७ ब्रांचलेस बैंकिङ केन्द्र और १०७५ मेगा रेमिट एजेन्ट हैं ।
० आप महिला आफिस होल्डरों को कोई संदेश देना चाहेंगी –
-मैं सिर्फमहिलाओं को नहीं, पुरुषों को भी कहना चाहती हूँ कि हम जीवन को देखने का नजरिया बदलें । अपनी सोच को सकारात्मक बनावें और जिन्दगी में आगे बढÞते जाएं र्।र् इमानदारी के साथ काम करें, समाज और देश के लिए कुछ अच्छा करें । यह जीवन ऐसे ही न गुजर जाए । इन्सानी जिन्दगी का कोई न कोई एक भला-सा मकसद होना ही चाहिए । हमें हरपल कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहना होगा । खूब स्वाध्याय करें । कडि परिश्रम करें, जरूर सफल हांगे । नेपाल की महिला किसी से कम नहीं है, हम यह साबित कर सकते हैं । देखिए, हम सारी दुनियाँ को तो बदल नहीं सकते मगर इसे बेहतर बनाने के लिए एक कदम तो आगे बढÞ सकते हैं ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *