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जो देश प्रकृति के अनुसार चलता है, प्रकृति उसकी रक्षा करती है : अशोक कुमार बैद (लंदन में बैद)



नेपाल के जाने-माने उद्योगपति एवं समाजसेवी अशोक कुमार बैद अपने लंदन प्रवास के क्रम में कई नामचीन लोगों से मुलाकात एवं कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है।
मधेश प्रदेश के एक मात्र महानगरपालिका वीरगंज के सद्भावना दुत श्री बैद ने नेपाल और बेलायत के रिश्ते पर चर्चा किया।

नेपाल और बेलायत के बीच तत्कालीन इस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ औपचारिक कुटनीतिक सम्बन्ध स्थापना हुए सय बर्ष पूरा हो गया है । दक्षिण एशिया में जब ब्रिटिश उपनिवेश था तो उस समय स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में नेपाल से संबंध बनाना एक गौरवशाली इतिहास है।
नेपाल और बेलायत के बीच सन् १९२३ में औपचारिक कुटनीतिक सम्बन्ध स्थापित हुआ है।सन् १९२३ मे औपचारिक सम्बन्ध कायम हुआ फिर भी दोनों मुलुक के बीच सन् १८१६ से कुटनीतिक सम्बन्ध था ही । नेपाल ने सन् १९२३ डिसेम्बर २१ के रोज बेलायत से सार्वभौमसत्ता सम्पन्न मुलुक का औपचारिक मान्यता प्राप्त करने का इतिहास बताया जाता है।
जिन कार्यक्रमों मे श्री बैद सहभागी हुए उसमें बिट्रिश पार्लियामेंट में आयोजित महावीर जयंती, नव वर्ष पर आयोजित विशेष अनुष्ठान एवं लंदन चेम्बर अफ कमर्स के अध्यक्ष से मुलाकात प्रमुख हैं।
जैन आचार्य लोकेश मुनि को प्रेमोपहार भी अर्पित करने का सुयोग धर्मनिष्ठ श्री अशोक कुमार बैद को प्राप्त हुआ।

उन्होंने नव वर्ष पर आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि
जैन समुदाय आज अपनी व्यवहारिक कुशलता और व्यावसायिक नैतिकता के लिए जाना जाता है और आज वो विश्व के सबसे धनी अल्पसंख्यक समुदाय में से एक हैं. भगवान महावीर का मूल सिद्धान्त है, अहिंसा परमोधर्म एवं जिओ और जीने दो।भगवान महावीर का अहिंसा का संदेश आज सम्पूर्ण विश्व की आवश्यकता है।आज जहां विश्व में अशांति है वहीं भगवान महावीर का जियो और जीने दो का संदेश हमे शांति और अहिंसा के मार्ग की ओर जाने के लिए प्रेरित करेगा।

श्री बैद ने अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर कहा हम दुनिया के गरिबों के लिए, प्रकृति का दोहन से मिलजुलकर काम करे ।

संस्कृति के महत्व पर आलोकित करते हुए उन्होंने कहा जाता है कि जो देश प्रकृति के अनुसार चलता है, प्रकृति उसकी रक्षा करती है। वर्तमान में जिस प्रकार से विश्व के अनेक हिस्सों प्रकृति का कुपित रूप दिखाई देता है, उससे मानव जीवन के समक्ष अनेक प्रकार की विसंगतियां प्रादुर्भूत हुई हैं। यह सब पश्चिम विचार की अवधारणा के चलते ही हो रहा है। हिंदूओं की संस्कृति मानव जीवन को सुंदर और सुखमय बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। विश्व की महान और शाश्वत परंपराओं का धनी आर्यावर्त भले ही अपने अपनी पहचान बताने वाली कई बातों का भूल गया हो, लेकिन कुछ बातें ऐसी भी हैं, जिनका स्वरूप आज भी है ।जब हम आर्यावर्त कहते हैं तो इसके भितर वर्तमान का भारत और नेपाल दोनों पड़ता है।

पार्लियामेंट में हुई कार्यक्रम में बिट्रिश सांसद गारेथ थोमस,
विरेन्द्र शर्मा की उच्च स्तरीय सहभागिता था।
युके चेम्बर अफ कमर्स के अध्यक्ष महेन्द्र जडेजा के मुलाकात में श्री अशोक कुमार बैद ने नेपाली टोपी और अंगबस्त्र उपहार दिया।
जिन कार्यक्रमों में नेपाल के वरिष्ठ समाजसेवी श्री बैद की सहभागिता रही उसमें भारतीय और नेपाली मूल के लोगों की उपस्थिति था।

श्री बैद जब भी विदेश यात्रा में रहते हैं तब वे वहां के उच्च स्तर के लोगों से मिलते हैं और नेपाली जनता का शांति और सद्भाव का संदेश सुनाते हैं।



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