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हिंदुस्तान की अनमोल धरोहर डॉ श्रीमती विनीता चतुर्वेदी हमेशा अमर रहेंगी


प्रो.एस.एस.डोगरा । माता-पिता के लालन-पालन उपरांत किसी भी व्यक्ति को जीवन में शिक्षा से लेकर काबिल इंसान बनाने में एक शिक्षक का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है इसीलिए भारतीय समाज में विशेषतौर पर शिक्षक का पद सर्वोच्च माना जाता है | यही वजह है कि शिक्षक अमर रहते हैं | महावीर, गौतम बुद्ध, महर्षि वाल्मीकि, गुरु रविदास, शंकराचार्य गुरु द्रोणाचार्य, रामकृष्ण परमहंस, गुरु नानक, कबीर आदि-आदि महान गुरुओं को भला कौन नहीं जानता ? क्योंकि इन्ही गुरुओं के बताए सद्मार्ग पर चलते हुए इनके शिष्यों ने अपने गुरुओं के नाम को दुनियाभर में रोशन किया | वास्तव में शिक्षक निश्चित रूप से फूलों के बीच गुलाब की तरह है जो हमारे जीवन को महकाता है। शिक्षक ही देश के असली अनमोल धरोहर होते हैं। एक शिक्षक की भूमिका समाज निर्माण में अक्षुण्ण और अतुलनीय है। इससे उत्तम अन्य कोई कार्य नहीं हैं।
इसी कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी ही महान शिक्षिका की जिनका नाम है डॉ श्रीमती विनीता (नीरजा) चतुर्वेदी | पिछले ही महीने मंगलवार के दिन 30 अप्रैल को डॉ विनीता जी का सरिता विहार स्थित निवास स्थल पर निधन हो गया | अगले दिन यानी 1 मई को लोधी रोड़ स्थित शमशान घाट पर डॉ विनीता के पार्थिव शरीर को उनके सुपुत्र मशहूर टीवी एवं फिल्म अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी ने पारंपरिक हिन्दू विधिविधान से मुखाग्नि देते हुए दाह संस्कार किया | डॉ विनीता की अंतिम यात्रा पर उनके रिश्तेदारों, पारिवारिक मित्रों, शिष्यों के अलावा देश-विदेश के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने श्रधान्जली अर्पित की |
आइए डॉ श्रीमती विनीता (नीरजा) चतुर्वेदी के गौरवशाली 84 वर्षीय व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हैं | जी हाँ डॉ विनीता जी का जन्म 13 मई 1940 इटावा, उत्तरप्रदेश में एक शिक्षित ब्राह्मण परिवार में हुआ | उनकी प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा कलकत्ता में हुई | जबकि उन्होंने उच्च शिक्षा (विवाहोपरान्त) आगरा, जम्मू, नई दिल्ली में प्राप्त की | इन्हें पढने के साथ-साथ, माता-पिता दोनों ही के परिवार की साहित्यिक अभिरुचि के प्रभाव स्वरूप बचपन से ही लेखन के प्रति विशेष रूचि थी । परिणामस्वरूप, मात्र 9- 10 वर्ष की आयु में ही कलकत्ता के दैनिक “विश्वमित्र”, “नवभारतटाइम्स” के बाल – स्तम्भों, “शिशु” “पराग”आदि बाल पत्रिकाओं, जातीय पत्रिका “चतुर्वेदी” में रचनाएं बराबर प्रकाशित होने लगी थीं। गौरतलब है कि डॉ विनीता जी ने अपने जीवन काल में मानवता के अग्रदूत, माध्यमिक कक्षाओं की पुस्तकों की अभ्यास पुस्तिकाएं, फूलों से स्वस्थ जीवन (“डॉ मालती खेतान” द्वारा अंग्रेजी में लिखित “Flowers that heal” पुस्तक) का हिंदी में अनुवाद, “सुश्री शालिनी मिगलानी” द्वारा अंग्रेजी में लिखित पुस्तक “Indigo Earth” का हिंदी में अनुवाद तथा बच्चों के लिए स्वलिखित कविताओं का संग्रह, रूपक, नृत्य नाटिकाओं तथा कहानी संग्रह आदि-आदि कई प्रेरक पुस्तकें भी लिखीं|
इतना ही नहीं उन्होंने इसके अलावा अनेकों नाटक, नृत्य नाटिकाओं, गीत कविताओं, रूपक आदि की रचना बच्चों के लिए करती रहीं | हिन्दी भाषी बच्चों में हिंदी के प्रति रुझान उत्पन्न करने में आपका और आपके पति श्री अभयकांत चतुर्वेदी ( जो माडर्न स्कूल में ही कार्यरत थे और “आकाशवाणी” तथा “दूरदर्शन” पर हिन्दी के प्रसिद्ध कमेन्टेटर थे) का विशेष योगदान रहा। परिवार के विवाहादि समारोहों के लिए भी आप उच्च स्तर के साहित्यिक स्वागत गीत, जयमाला गीत, मंगल गीतों की रचना समय-समय पर करती रही हैं। आकाशवाणी – दूरदर्शन पर भी इनकी अनेकों नृत्यनाटिका तथा गीत प्रसारित हुए। अपने अभिनेता-निर्देशक पुत्र श्रीअभिनव चतुर्वेदी की कार्पोरेट फ़िल्मों की भी स्क्रिप्ट लिखती रही है, दिल्ली के तत्कालीन प्रसिद्ध रंगमंच “दिशांतर” के लिए भी लेखन कार्य किया। दिल्ली के प्रसिद्ध विद्यालय “माडर्न स्कूल”, माउन्ट आबू के “गुरु शिखर” तथा दिल्ली के ही “ज्ञान भारती स्कूल” के अध्यापन काल, में यह रचना यात्रा अबाध रूप से चलती रही।
इसी दौरान 16नवम्बर सन् 1971को दिल्ली के विज्ञान भवन में “ज्ञान पीठ एवार्ड” प्राप्त ग्रन्थ कवि सम्राट विश्वनाथ सत्यनारायण द्वारा लिखित “रामायणकल्पवृक्षम” के अभिनेता ओम शिवपुरी द्वारा निर्देशित मंचित अंश का पद्यानुवाद, तथा उन्हीं के द्वारा निर्देशित “दिशांतर थियेटर ग्रुप” के अंतर्गत श्री सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा लिखित कहानी “लड़ाई” का नाट्य रूपांतरण किया।
दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केन्द्र की प्रिंसिपल रहते हुए हिन्दी साहित्य के लिए उत्थान के लिए नाट्य – रूपांतरण करती रहीं | हिंदी भाषा में डॉ विनीता के अमूल्य योगदान के लिए उन्हें सहारनपुर की हिन्दी साहित्यिक संस्था “विभावरी” ने, गुरु शिखर स्कूल, माउन्ट आबू , ज्ञान भारती स्कूल, नई दिल्ली , “माडर्न स्कूल ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन” द्वारा संचालित “गुरु दक्षिणा” कार्यक्रम के अंतर्गत, भूतपूर्व शिष्य जस्टिस संजय कृष्ण कौल द्वारा शाल उढ़ा कर सम्मानित किया गया| इसी तरह करनाल (हरियाणा) के “ऐन्टी करप्शन फ़ाउन्डेशन आफ़ इन्डिया” द्वारा एजूकेशन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए “लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड” से सम्मानित किया |
डॉ श्रीमती विनीता चतुर्वेदी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं रहीं परन्तु उन्होंने अपनी 84 वर्ष के जीवनकाल के दौरान अपने शिक्षण, लेखन, पारिवारिक तथा सामाजिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया | पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, रविवार 5 मई को शाम 3.30 बजे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शोक सभा होगी | वे सच में हिंदुस्तान की अनमोल धरोहर रहीं उन्हें दिल्ली सरकार अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा भी सम्मानित किया जाना चाहिए |

शोक सभा रविवार 5 मई शाम 3.30
बजे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित

(लेखक नेपाल से प्रकाशित हिमालिनी पत्रिका के ब्यूरो प्रमुख हैं और पांच पुस्तकें भी लिख चुकें हैं )



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