गजेंद्र नारायण सिंह की २४वीं पुण्य तिथि…याद किए गए गजेन्द्र बाबू
काठमांडू, माघ १० – गुरुवार को गजेंद्र नारायण सिंह के २३वें स्मृति दिवस के अवसर पर गजेंद्र नारायण सिंह अध्ययन द्वारा आयोजित ’गजेंद्र बाबू के विचार और मधेस की भावी दिशा’ विषय पर अन्तरक्रिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता गजेन्द्रनारायण सिंह अध्ययन केन्द्र के अध्यक्ष अनील महासेठ ने की । आज के कार्यक्रम में सहभागी सभी नेताओं ने गजेन्द्र बाबू को स्मरण करते हुए उनके बारे में बहुत सी बातें साझा की ।
कार्यक्रम में जनता प्रगतिशील पार्टी के अध्यक्ष ह्दयेश त्रिपाठी ने गजेन्द्र नारायण सिंह को याद करते हुए कहा कि जिस समय उन्होंने मधेश के मुद्देें को उठाया, देश में संघीयता की बात की, वो एक अलग माहौल था । झापा से लेकर कंचनपुर कैलाली तक का भूगौल एक था । मधेश को हम २२ जिलें में देख रहे थे । ये गजेन्द्रबाबू के समय में था । आज समय बदला हुआ है आज ८ जिलें में हैं हम । चुनौतियां उस समय में भी थी चुनातियां आज भी हैं । उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि – आज हम अलग हो चुके हैं । ऐसा क्या हो गया है कि हम अलग हो गए ? एक समय ऐसा था जब केवल दो प्रदेश की बात चल रही थी लेकिन ये हम ही थे जिसके कारण यह संभव नहीं हो पाया क्योंकि हम एक नहीं थे हम बंटे हुए थे ।
लेकिन एकबार फिर एकता की बात आ रही है । सहकार्य की बात हो रही है । तो हम कुछ बातों में सहकार्य कर सकते हैं । उन्होंने यह भी कहा कि हम दो कारणों से एक होते हैं एक भय से, दूसरा विवेक से तो विवेक में कमी है और भय का माहौल बन रहा है । त्रिपाठी ने कहा कि हममें जो तिक्तता है वह दूर हो । जो मनमुटाव है उसे दूर करें । रही बात जात जाति की राजनीति की तो मैं मानता हूँ कि जो कमजोर नेता हैं वहीं इसका हाथ थामते हैं ।
कार्यक्रम में जसपा सहअध्यक्ष रेणू यादव ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि आज गजेन्द्र बाबू के लिए सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी हम अपनी अहमता और घमंड को छोड़कर एक हो जाए । हम और आप कहीं भी रहे मधेश जिंदा रहना चाहिए । समय आ गया है कि मधेश को लेकर चिंतन करें ।
इसी तरह तमलोपा के नेता वृषेशचन्द्र लाल ने कहा कि – आज जरुरत है कि हम आत्ममंथन करें । हम अपने एजेण्डा से बाहर आ गए हैं । हमें अपनी जनता का भी ध्यान रखना है । मधेश की जनता में चरम निराशा है । आवश्यकता है कि हम अब अभिभावक की भूमिका में आए ।
कार्यक्रम में जनता समाजवादी पार्टी नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव की भी सहभागिता थी । गजेन्द्र बाबू का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि गजेन्द्र नारायण सिंह एक क्रांतिकारी नेता थे लेकिन जो नेता या जो लोग उनके साथ थे वे बहुत स्वार्थी थे ।
आज के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि परिवर्तन नहीं हुआ है । समय के साथ देश में बदलाव आया है, लेकिन खस आर्य शासन प्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया । इसके साथ ही यादव ने यह भी कहा कि भाषा और संस्कृति में कोई बदलाव नहीं आया है । उन्होंने कहा कि देश की ब्राह्मणवादी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है ।
कार्यक्रम में अपनी बात को रखते हुए जनमत पार्टी के अध्यक्ष सीके राउत ने कहा कि –गजेन्द्र नारायण सिंह हमेशा कहा करते थे कि हिन्दी हमारी एकता का आधार है ।
गजेन्द्र सिंह को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि वो राजनीति में मेरी प्रेरणा का स्रोत हैं।’ किताब में गांधी को पढ़ने से पहले मुझे उन्हें समझने का मौका मिला ।
कार्यक्रम में महिला बालबालिका तथा जयेष्ठ नागरिक मा.नवल किशोर साह ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि –गजेन्द्र बाबू मेरे हीरो हैं । वो केवल एक व्यक्ति नहीं संस्था थे । उन्होंने भी अपनी बातों में कहा कि अपने अहम को छोड़कर एक साथ आइए ।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र महतो ने कहा कि – आज सबसे ज्यादा आवश्यकता इस पर विचार करने की है कि– जिस विचार को देकर गए हैं वो सांदर्भिक है या नहीं । तो मेरा मानना है कि उस विकट समय में उन्होंने जो विचार दिए थे वो आज के दिन में भी सांदर्भिक है ।जो विचार देकर वो गए आज हम उनकी बातों का मनन कर रहे हैं या नहीं ।
उन्होंने गजेन्द्र बाबू को याद करते हुए कहा – जब मधेशी भी खुद को मधेशी कहने में झिझकते थे, उस समय मधेश में मधेशवाद लाना आसान नहीं था । काठमांडू ने इसे स्वीकार नहीं किया । मधेश में भी इसे स्वीकार करना मुश्किल था । ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में गजेन्द्रबाबू ने मधेशवाद का विचार स्थापित किया ।
अभी के समय को लेकर उन्होंने कहा कि ये तो सब चाहते है कि हम एक हो लेकिन एक होने से पहले यह भी जरुरी है कि हम सोचे की कि किस बात के लिए एकता होनी चाहिए । हम एकता करें मधेशी जनता के लिए । सरकार में जाने, सत्ता पाने या कुर्सी पाने के लिए जनता हमारी एकता नहीं चाहती है । वो अपने लिए हमारी एकता चाहती है।





