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राम नेपाल में जन्मे हैं, प्रचार से क्यों डरें ? : प्रधानमंत्री ओली का फिर विवादास्पद उदघोष

 

अथः श्री ओली रामायण कथा

काठमांडू, २३ असार २०८२ (७ जुलाई २०२५) । नेपाल के पूर्वप्रधानमन्त्री एवं नेकपा (एमाले) के वरिष्ठ नेता केपी शर्मा ओली ने एक बार फिर राम जन्मभूमि को लेकर बड़ा बयान दिया है। काठमांडू में आयोजित नेकपा एमाले के पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन विभाग के कार्यक्रम में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “भगवान श्रीराम नेपाल में जन्मे थे और इस तथ्य के प्रचार से डरने की कोई जरूरत नहीं है।

ओली ने यह भी जोड़ा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत मान्यता नहीं है, बल्कि वाल्मीकिकृत रामायण के आधार पर कही जा रही ऐतिहासिक सच्चाई है। उन्होंने कहा कि चितवन के माडी क्षेत्र में स्थित ठोरी ही वह स्थान है, जिसे वह राम जन्मभूमि मानते हैं। इससे पहले भी ओली समय-समय पर इस विषय में इसी प्रकार के दावे कर चुके हैं, लेकिन इस बार उन्होंने स्पष्ट कहा कि “किसी के नाराज होने के डर से सत्य को छिपाया नहीं जाना चाहिए।”

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ओली बोले — “शिव यहीं के हैं, विश्वामित्र यहीं के हैं”

प्रधानमन्त्री ओली ने भारतीय महाकाव्य रामायण की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “विश्वामित्र चतराका हैं। उन्होंने कोशी नदी पार करके राम-लक्ष्मण को शिक्षा दी थी। यह मैंने नहीं लिखा, वाल्मीकि ने लिखा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत को भगवान राम के नाम पर सांस्कृतिक गौरव प्राप्त है, तो नेपाल क्यों पीछे हटे?

पर्यटन को संस्कृति से जोड़ने की वकालत

ओली ने नेपाल पर्यटन बोर्ड की आलोचना करते हुए कहा कि “हमें विदेश जाकर प्रचार करने की जरूरत नहीं, हमें अपनी जड़ों को पहचानने और उन्हीं के माध्यम से प्रचार करने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से पूरी दुनिया को बताया जा सकता है कि राम का जन्मस्थल नेपाल में है।

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क्यों उठता है विवाद?

प्रधानमन्त्री ओली के इस प्रकार के बयान पहले भी भारत-नेपाल संबंधों में हलचल ला चुके हैं। भारत में अयोध्या को भगवान राम की जन्मभूमि माना जाता है, और वहां भव्य राममंदिर का भी निर्माणा हो चुका है। ऐसे में ओली का यह दावा भारत की धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं को चुनौती देने के रूप में देखा जाता है। हालांकि ओली का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि नेपाल की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाना है।

ओली का यह बयान केवल धार्मिक या सांस्कृतिक विमर्श नहीं, बल्कि नेपाल की पहचान, पर्यटन और राष्ट्रवाद से भी जुड़ा है। राम को नेपाल से जोड़ना एक रणनीतिक सांस्कृतिक दावी हो सकता है, जिससे नेपाल अपनी ऐतिहासिक पहचान को विश्वमंच पर प्रस्तुत कर सके। ओली बारबार इस तरह का बयान देतें रहतें हैं जिससे कि मीडिया में चर्चा होती रहती है ।

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प्रधानमन्त्री ओली के इस भाषण ने एक बार फिर राम जन्मभूमि को लेकर बहस को हवा दी है। जहां एक ओर यह नेपाल की सांस्कृतिक गौरवगाथा के रूप में जोड़ा गया है, वहीं दूसरी ओर इससे भारत-नेपाल संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। लेकिन ओली स्पष्ट हैं— “राम का जन्म नेपाल में हुआ है, इसे कहने में डर किस बात का?”

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