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प्रेम प्रकाश मल्ल ‘मधुकर’ स्मृति पुरस्कार डा. हरि प्रसाद तिमिल्सिना को प्रदान

 


नेपालगंज, बाँके / संवाददाता – पवन जायसवाल । स्व. प्रेम प्रकाश मल्ल ‘मधुकर’ की 90वीं जन्मजयन्ती के अवसर पर स्थापित ‘प्रेम प्रकाश मल्ल मधुकर स्मृति पुरस्कार’ इस वर्ष डा. हरि प्रसाद तिमिल्सिना को प्रदान किया गया है। नेपालगंज के महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस में प्राध्यापक रहे डा. तिमिल्सिना को यह सम्मान श्रावण १० गते, शनिवार को नेपालगंज–१८ में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन भेरी साहित्य समाज केन्द्रीय समिति द्वारा किया गया था, जिसमें डा. तिमिल्सिना को ५१ हजार १११ रूपये सहित सम्मान पत्र और दोसल्ला प्रदान किया गया। यह सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्राज्ञ सनत कुमार रेग्मी के करकमलों द्वारा प्रदान किया गया।

समारोह में प्रेम प्रकाश मल्ल मधुकर के जीवन, कृतित्व और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला गया। प्रमुख अतिथि रेग्मी ने उनके काव्य-संग्रहों के प्रकाशन की आवश्यकता जताई।

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भेरी साहित्य समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद रिजाल ने बताया कि २०७२ से २०८१ तक कुल ११ साहित्यकारों को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है। इस वर्ष डा. तिमिल्सिना को चयनित करने की प्रक्रिया और कोष की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में पुरस्कार कोष में ५ लाख १ सय ४७ रूपये मूलधन है।

कार्यक्रम में शिक्षाविद् किरण आचार्य, प्राज्ञसभा सदस्य महानन्द ढकाल, लुम्बिनी प्राविधिक विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रा. डा. कृष्णप्रसाद घिमिरे, वरिष्ठ साहित्यकार नरेन्द्रजंग पिटर, समालोचक लेखप्रसाद प्याकुरेल, और हाम्रो पूर्णिमा साहित्य प्रतिष्ठान के अध्यक्ष पुस्करनाथ रिजाल सहित कई विद्वानों ने स्व. मल्ल के योगदान पर विचार रखे। प्याकुरेल ने मल्ल द्वारा रचित चर्चित गीत “पोखरा त साँच्चिकै पोखरा नै रैछ” को उल्लेख करते हुए बताया कि यह गीत यूट्यूब पर १ लाख १० हजार से अधिक बार देखा गया है। वरिष्ठ कलाकार सुन्दर गुरुङ ने यह गीत कार्यक्रम में प्रस्तुत किया।

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पुरस्कार कोष की संस्थापक और मल्ल की ज्येष्ठ सुपुत्री वाणीश्री मल्ल ने साहित्य के क्षेत्र में पिता के योगदान को जीवित रखने की प्रतिबद्धता जताते हुए कोष में १ लाख रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की, जिससे अब कुल कोष राशि ६ लाख १ सय ४७ रूपये हो गई है।

सम्मानित डा. हरि प्रसाद तिमिल्सिना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पुरस्कार की राशि से तिमिल्सिना वाङमय प्रतिष्ठान नेपालगंज को ५१ हजार १११ रूपये भेंट स्वरूप दिया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूरी पुरस्कार राशि पौरखी बहुउद्देश्यीय सहकारी संस्था में मुद्दती खाता के रूप में सुरक्षित रखी गई है, जिससे मिलने वाले ब्याज से कार्यक्रम संचालन और पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता भेरी साहित्य समाज के अध्यक्ष इन्द्र बहादुर बस्नेत ने की, जबकि संचालन महासचिव गीता अर्याल ने किया। अतिथियों को गम्छा ओढ़ाकर स्वागत इन्दिरा गौतम और चन्द्रावती अधिकारी ने किया।

इस कार्यक्रम में नेपाल और भारत के विभिन्न हिस्सों से आए ६२ साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता रही, जिनमें शारीक रब्बानी (भारत), कृष्णप्रसाद श्रेष्ठ, बलराम यादव, पुष्पमणि प्रधान, कविराम रेग्मी, करिश्मा कुमारी योगी, मणिदेव अर्याल, जेबी अनुरागी, अर्जुन ओली, डा. राजकुमार थारु, मीना बराल और अन्य गणमान्य साहित्यसेवी शामिल थे।

स्व. प्रेम प्रकाश मल्ल ‘मधुकर’ का जन्म वि.सं. १९९३ श्रावण ११ गते हुआ था और उनका निधन २०७२ वैशाख ११ गते हुआ। वे एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे — साहित्यकार, गायक, गीतकार, संगीतकार और लेखक के रूप में उनकी ख्याति रही है।

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