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सादगी और हकीकत की मिसाल – प्रधानमंत्री सुशीला कार्की

 

काठमांडू, भाद्र 29, 2082 (14 सितंबर, 2025) । नेपाल की नवनियुक्त प्रधानमंत्री सुशीला कार्की, जो पूर्व प्रधानन्यायाधीश रह चुकी हैं, अपनी सादगी और हकीकत भरे स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। शनिवार, 28 भाद्र 2082 को, उनके पति दुर्गा सुवेदी ने टोखा, धापासी हाइट स्थित अपने साधारण घर से बालुवाटार के सरकारी निवास में जाने की तैयारी की। इस दौरान उन्होंने दो बोरा चावल, आधा बोरा दाल, दो माना सत्तू और अन्य आवश्यक सामान पैक कर गाड़ी में रखवाया। यह लेख कार्की के व्यक्तित्व, उनके जीवन और इस बदलाव की कहानी को दर्शाता है।

**सादगी भरा जीवन**

टोखा के धापासी हाइट में स्थित कार्की का दो मंजिला सामान्य घर, जो करीब साढ़े तीन आना जमीन पर बना है, उनके सादगी भरे जीवन का प्रतीक है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कार्की ने कभी अपने पद का रौब नहीं दिखाया। पड़ोसन सरिता भण्डारी ने बताया कि कार्की हमेशा हंसमुख और मृदुभाषी रही हैं, और उनके व्यवहार से कभी नहीं लगा कि वह इतने बड़े पद पर रही हैं। शारदा पंगेनी और हरिकला पौडेल ने भी उनकी सादगी और सामान्य व्यवहार की तारीफ की, जिसमें वह पड़ोसियों को “बहन” कहकर पुकारती थीं।

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**दुर्गा सुवेदी: एक समर्पित साथी**

सुशीला कार्की के पति दुर्गा सुवेदी स्वयं एक प्रजातंत्रवादी और आंदोलनकारी रहे हैं। पंचायत काल में उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व में विमान अपहरण की योजना का हिस्सा बनकर अपनी भूमिका निभाई थी। शनिवार को वह बालुवाटार जाने की तैयारी में व्यस्त थे, हालांकि उनकी और कार्की की इच्छा अपने घर में ही रहने की थी। सुवेदी ने बताया कि सुरक्षा और अन्य कारणों से बालुवाटार जाना जरूरी हो गया।

**प्रधानमंत्री बनने की यात्रा**

जेन-जी आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन के फलस्वरूप कार्की शुक्रवार को अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री बनीं। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने उन्हें छह महीने के भीतर प्रतिनिधिसभा का चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। कार्की का यह सफर उनके पूर्व के करियर से भी प्रेरणादायक है। वह 2065 में सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं और 2073 में नेपाल की पहली महिला प्रधानन्यायाधीश बनीं। 2074 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह अपने टोखा वाले घर में लौट आई थीं, लेकिन अब कार्यकारी प्रमुख के रूप में वह फिर से बालुवाटार पहुंची हैं।

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**पड़ोसियों और कर्मचारियों का नजरिया**

स्थानीय निवासी देवीबहादुर खड्का ने कार्की को एक ईमानदार और सादगी पसंद व्यक्ति बताया, जिनके बारे में कभी भ्रष्टाचार की बात नहीं सुनी गई। उनके ड्राइवर रमेशसिंह महर्जन, जो 15 वर्षों से उनके साथ हैं, ने बताया कि कार्की ने कभी अपने पद का घमंड नहीं दिखाया और उन्हें हमेशा मां जैसा प्यार दिया। महर्जन ने कहा कि कार्की का सादा जीवन और उनका व्यवहार उन्हें आम लोगों से अलग नहीं करता।

**बालुवाटार में स्थानांतरण**

कार्की और सुवेदी शुरू में अपने टोखा वाले घर में ही रहना चाहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में सुरक्षा और अन्य जिम्मेदारियों के कारण बालुवाटार जाना जरूरी हो गया। शनिवार शाम तक कार्की परिवार सरकारी निवास में स्थानांतरित हो चुका था। सुवेदी ने बताया कि टोखा का स्थान अपेक्षाकृत असुविधाजनक और काठमांडू से दूर होने के कारण यह निर्णय लिया गया।

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**निष्कर्ष**

सुशीला कार्की का जीवन सादगी, ईमानदारी और समर्पण का प्रतीक है। एक वकील से लेकर नेपाल की पहली महिला प्रधानन्यायाधीश और अब प्रधानमंत्री तक का उनका सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सादगी और नैतिकता के साथ भी उच्च पदों पर पहुंचा जा सकता है। उनके पड़ोसी और सहकर्मी उनके इस स्वभाव की तारीफ करते नहीं थकते, और उनकी यह यात्रा नेपाल के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।  **स्रोत**: समाचार लेख, दुर्गा दुलाल,

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