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सम्बन्धों में तकरार : वाणी नित्या

वाणी नित्या, हिमालिनी अंक नवंबर । आज कल की सबसे बड़ी समस्या है संबंधों को सुचारु रूप से चलाना और आपस में मधुरता रखना । परन्तु आज चाहे वह सम्बन्ध पति पत्नी का हो या सास बहु का भाई बहन या फिर अन्य रिश्तेदारों के साथ, ज्यादातर सम्बन्ध मधुर नहीं हैं । नित नए तलाक के केस, घर टूटने के किस्से, बहु को नए नए तरीके से प्रताडि़त करने की साजिश और कहीं कहीं तो लड़कियों ने ही घर तोड़ने की साजिश की । क्यों आखिर यह सब क्यों ?
क्या हो सकते हैं इसके कारण ?

आपसी समझदारी की कमी–जब घर में लड़की ब्याह करके आती है वह बिलकुल आपके घर के तौर तरीकों से अनजान होती है यदि उसको समझा जाए उसकी नादानियों को मापÞm करके उसे समझाया जाए तो बहुत हद तक समस्याएं सुलझ सकती हैं ।
लेकिन घर के सारे सदस्य उसके खिलाफ हो जाते हैं बात बात पर ताने कि तुम्हे अपने माँ बाप ने कुछ सिखाया नहीं, यह सब सुनकर लड़की का विद्रोही स्वभाव हो जाता है और घर टूटने की कगार पर आ जाता है ।
कण्ट्रोल करने की कोशिश–रिश्तों में आजकल यह आम बात है जो थोड़ा सीधा है कमजोर है उसको चाहे वह पति हो या पत्नी या फिर सास बहु कण्ट्रोल करने की कोशिश करते हैं । अपने अनुसार सबको चलाने की कोशिश ही विद्रोह का कारण बनती है और घर टूटता है ।

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मैनिपुलेट करना–अपने अनुसार दूसरो को चलाने की मंशा ही मैनिपुलेट का कारण बनती है, हर बात में खुद को सर्वोपरी रखना और अपनो की भावनाओं का सम्मान नहीं करना घर टूटने का कारण बनती हैं ।
शोषण करना–रिश्तों में शोषण सुनकर बड़ा अजीब लगता है न लेकिन यह सच है । दूसरे घर से आई बेटी का शोषण ससुराल पक्ष के लोग खूब करते हैं इसलिए बहुओं में मन में आदर भाव ससुराल के लिए खत्म हो जाता है । चालाक रिश्तेदार सीधे सादे अपनों का खूब शोषण करते हैं चाहे वह आर्थिक मामले में हो या फिर किसी घरेलू काम में ।

शिक्षा का अभाव–घर के सभी लोग पढ़े लिखे हों कोई जरूरी नहीं, इसी वजह से लड़कियों के ऊपर बेवजह के ताने मिलते हैं, बहु कितनी भी पढ़ी लिखी हो अपने करियर का त्याग करके चूल्हा चौका सम्भालो यही सुनने को मिलता है । कितनी महिलायें घर के लिए अपनी नौकरी तक का बलिदान कर देती हैं तब शुरू होता है अंतहीन प्रताड़ना के सिलसिले और यह भी घर टूटने का प्रमुख कारण है । यदि घर के बड़े बुजुर्ग अपने संतान को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार दें तो घर सुखमय बनता है चाहे वह संतान लड़का हो या फिर लड़की ।
पुरानी मान्यता–मान्यताओं के नाम पर महिलाओं के साथ अत्याचार से प्राचीन काल से चलता आ रहा है । पुरानी मान्यताएं और उसपर केवल महिलाये ही चले यह भी घर टूटने का कारण बनती हैं । समय के साथ हमें बदलना सीखना होगा लेकिन अच्छी बातों के लिए ।
मेरे विचार से इन सब कारणों को यदि समझकर समझदारी अपनाये जाए तो बहुत हद तक हम एक स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं, यह कहना उचित ही होगा कि स्वस्थ परिवार एवं समाज से खुशहाल प्रगतिशील देश का निर्माण हो सकेगा ।

वाणी नित्या

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