काठमांडू में ‘हिन्दी साहित्य उत्सव’ के दौरान तीन साहित्यकारों पर विमर्श
काठमांडू, २० फरवरी । हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार वृन्दावनलाल वर्मा, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ तथा अमृतलाल नागर के साहित्यिक योगदान पर काठमांडू में विचार–विमर्श किया गया । काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास काठमांडू द्वारा आयोजित ‘हिन्दी साहित्य उत्सव’ कार्यक्रम में इन साहित्यकारों की रचनात्मक उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई ।
कथाकार एवं उपन्यासकार वृन्दावनलाल वर्मा पर डीएवी सुशील केडिया विश्वभारती स्कूल की शिक्षिका स्मृति श्रीवास्तव ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्माजी की लेखनी में युगचेतना का स्पष्ट बोध होता है और उनकी रचनाएँ इतिहास के प्रति गहरा आकर्षण उत्पन्न करती हैं । उनके अनुसार वर्मा के साहित्य में इतिहास और साहित्य का अद्भुत संगम दिखाई देता है । उन्होंने यह भी बताया कि वर्मा ने प्रेमचन्द की सामाजिक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए कथा और उपन्यास के माध्यम से भारतीय इतिहास, कला और पुरातत्व की पहचान को स्थापित किया । उन्होंने कहा कि प्रगति तभी सार्थक होती है, जब व्यक्ति अपनी परम्परा, धर्म और संस्कृति को नहीं भूलता, और यही संदेश वर्मा के साहित्य से युवा पीढ़ी को प्राप्त होता है ।
इसी क्रम में केन्द्रीय विद्यालय काठमांडू के शिक्षक नरपत सिंह चौहान ने कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि निराला छायावाद के प्रमुख स्तम्भों में से एक हैं । उनके अनुसार निराला के जीवन और काव्य दोनों में संघर्ष की प्रेरणा मिलती है तथा उनकी कविताएँ गहन दार्शनिक चिंतन से प्रेरित हैं ।
उपन्यासकार अमृतलाल नागर के साहित्य पर चाँदबाग स्कूल के शिक्षक मुकेश कुमार मिश्र ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नागर गद्य विधा के अत्यन्त कुशल और सिद्धहस्त लेखक हैं । उन्होंने अपनी कथा और उपन्यासों में भारतीय जनजीवन, विशेषतः लखनऊ और उसके आसपास के क्षेत्रीय परिवेश का सजीव चित्रण किया है तथा उपेक्षित समुदायों की पीड़ा को प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त किया है । उन्होंने अपनी रचनाओं में सामुदायिक, राजनीतिक और सामाजिक विभेद को भी सशक्त रूप में प्रस्तुत किया है । मिश्र के अनुसार नागर नारी जीवन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील थे तथा मध्यम और निम्न वर्ग के जीवन का यथार्थ चित्रण करने की उनमें विशिष्ट क्षमता थी ।
उल्लेखनीय है कि ‘हिन्दी साहित्य उत्सव’ पिछले कुछ महीनों से प्रत्येक माह के अंतिम सप्ताह में काठमांडू में आयोजित किया जा रहा है । जिस माह में जिन साहित्यकारों की जन्मतिथि या पुण्यतिथि होती है, उसी माह उनसे संबंधित साहित्यकारों पर चर्चा की जाती है । इसी क्रम में फरवरी माह से जुड़े साहित्यकारों वृन्दावनलाल वर्मा, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ और अमृतलाल नागर पर इस बार विशेष चर्चा की गई ।

