पुराने दिग्गजों के अहंकार को तोड़, सिराहा ने चुना अपना ‘उम्मीद वाला इंजीनियर’ तपेश्वर यादव
Tapeshwar yadav RSP mp from siraha-04 तपेश्वर यादव की जीत ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो और विजन स्पष्ट, तो जनता आपको सर-आँखों पर बिठाती है। अब सिराहा-४ के विकास का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
हिमालिनी डेस्क, १८ मार्च ९२६।
कहते हैं कि जब वक्त करवट लेता है, तो इतिहास की दीवारें खुद-ब-खुद ढहने लगती हैं। सिराहा की उस तप्त दोपहर में, जब मतगणना के आँकड़े एक नए सूरज के उगने की गवाही दे रहे थे, तब वह जीत केवल एक पार्टी की नहीं, बल्कि उन बूढ़ी आँखों की थी जो दशकों से अपने गाँव की बदहाली पर आँसू बहा रही थीं। यह जीत उन युवाओं की थी, जो हाथों में डिग्री लेकर रोजगार की तलाश में अपनी मिट्टी छोड़ने को मजबूर थे।
सोचिए, एक ३३ साल का नौजवान तपेश्वर यादव ,जिसके पास एक सुरक्षित सरकारी नौकरी थी, एक सम्मानजनक इंजीनियरिंग का करियर था और एक सुकून भरी जिंदगी थी—वह सब कुछ दांव पर लगाकर धूल और धूप से भरी सियासत की गलियों में क्यों उतर आया ? क्योंकि उसे ‘नक्शे’ कागजों पर नहीं, बल्कि सिराहा की तकदीर पर बनाने थे। १५ माघ २०४९ को नरहा गाँव की जिस मिट्टी में तपेश्वर ने अपना पहला कदम रखा था, आज उसी मिट्टी ने उसे अपने कंधों पर उठाकर संसद की दहलीज तक पहुँचा दिया है।

Summary
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ऐतिहासिक जनादेश: रास्वपा के तपेश्वर यादव ने 36,210 मत प्राप्त कर एकतरफा जीत हासिल की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अजय शंकर नायक (नेकपा) को 28,218 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी।
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दिग्गजों की विदाई: इस चुनाव में जनता ने पुराने स्थापित चेहरों को नकार दिया। अजय शंकर नायक (7,992), वीरेन्द्र महतो (5,041), धर्मनाथ साह (4,227), और राज किशोर यादव (3,484) जैसे दिग्गजों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
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इंजीनियर से सांसद तक: 33 वर्षीय तपेश्वर एक पेशेवर सिविल इंजीनियर हैं। व्यवस्था सुधारने के लिए उन्होंने 2079 BS में मिर्चैया नगरपालिका के सरकारी पद से इस्तीफा देकर राजनीति का कठिन रास्ता चुना।
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परिवर्तन की लहर: यह जीत केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सिराहा की जनता के उस आक्रोश की है जो दशकों से उपेक्षा और ‘छलावे’ की राजनीति झेल रहे थे।
महल हारे, बेटा जीता: सिराहा की गलियों से संसद तक, एक युवा इंजीनियर के संघर्ष की अनकही दास्तान
नेपाल की राजनीति में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जो केवल हार-जीत तय नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन जाते हैं। सिराहा निर्वाचन क्षेत्र संख्या ४ का परिणाम भी कुछ ऐसा ही है। यह केवल तपेश्वर यादव (Tapeshwar yadav RSP mp from siraha-04)की जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों आँखों के सपनों की जीत है जो बरसों से उपेक्षा और बेरोजगारी के अंधेरे में जी रहे थे।
जब चुनाव परिणाम घोषित हुए, तो सिराहा की हवाओं में एक अलग ही सुकून था। एक ३३ साल का युवा, जो कल तक नगरपालिका में एक इंजीनियर के रूप में फाइलों और नक्शों के बीच काम करता था, आज उसी जनता का ‘भाग्य विधाता’ बन गया है। यह कहानी है उस साहस की, जिसने सुरक्षित सरकारी नौकरी को लात मारकर जनता के बीच पसीना बहाना बेहतर समझा।
जनता का आक्रोश और बदलाव का सैलाब
सिराहा-४ की रणभूमि में इस बार मुकाबला बराबरी का नहीं था। एक तरफ धन-बल और दशकों पुराना राजनीतिक रसूख था, तो दूसरी तरफ एक युवा का ‘परिवर्तन’ का विजन। जब वोटों की गिनती शुरू हुई, तो फासला इतना बड़ा था कि बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के गणित फेल हो गए।
तपेश्वर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को लगभग २८,००० से अधिक मतों से हराया। यह जीत चीख-चीख कर कह रही है कि अब जनता को ‘खोखले वादे’ नहीं, बल्कि ‘ठोस विकास’ चाहिए। पुराने नेताओं ने जनता को जात-पात और धर्म के नाम पर उलझाए रखा, लेकिन इस बार सिराहा के किसान, युवा और माताओं ने उस ‘इंजीनियर’ को चुना जो उनके जीवन का नक्शा बदल सके।
कलम से राजनीति तक : एक इंजीनियर का संघर्ष
१५ माघ २०४९ को नरहा गाँव में जन्मे तपेश्वर यादव की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी प्रेरणादायक है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने अपनी तकनीकी शिक्षा का उपयोग समाज सेवा के लिए किया। उन्होंने मिर्चैया नगरपालिका में दो साल तक अनुबंध पर काम करते हुए व्यवस्था के भ्रष्टाचार और सुस्ती को करीब से देखा।
२०७९ साल में जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो वह केवल एक नौकरी नहीं छोड़ रहे थे, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य को दांव पर लगाकर व्यवस्था बदलने के अनिश्चित सफर पर निकल पड़े थे। नेपाल इंजीनियर्स एसोसिएशन के मधेश प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनका अनुभव आज उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
“पुराने नेताओं ने सिर्फ ठगा है”
जीत के बाद तपेश्वर के शब्द उन लाखों युवाओं की आवाज़ हैं जो व्यवस्था से थक चुके हैं। उन्होंने नम आँखों से कहा— “पुराने नेताओं ने जनता को सिर्फ छला है, लोग अब थक चुके थे। मेरी जीत मेरी नहीं, उन आम लोगों की है जिन्होंने बदलाव की उम्मीद में मुझे अपना वोट दिया।” उनकी प्राथमिकताएँ स्पष्ट हैं:
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बुनियादी ढांचा विकास: एक इंजीनियर होने के नाते, वे जानते हैं कि बिना अच्छी सड़कों और पुलों के विकास संभव नहीं।
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शिक्षा और स्वास्थ्य: सिराहा के अस्पतालों और स्कूलों की हालत सुधारना उनका संकल्प है।
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बेरोजगारी का खात्मा: मधेश के युवाओं को खाड़ी देशों में पसीना न बहाना पड़े, इसके लिए स्थानीय रोजगार पैदा करना उनकी प्राथमिकता है।
एक पिता का गौरव और जनता का विश्वास
इस जीत की सबसे मार्मिक तस्वीर तब दिखी जब उनके पिता सत्यनारायण यादव की आँखें खुशी से भर आईं। एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व क्या होगा कि उसका बेटा आज पूरे क्षेत्र की आवाज़ बन गया है। उनका कहना है, “वह हमेशा से राजनीति में रुचि रखता था, आज वह सांसद है, मुझे गर्व है। मैं बस यही चाहता हूँ कि वह ऐसा काम करे कि हमारा सिर हमेशा फख्र से ऊँचा रहे।”
निष्कर्ष: एक नई उम्मीद का उदय-Tapeshwar yadav RSP mp from siraha-04
तपेश्वर यादव की यह जीत मधेश प्रदेश की राजनीति में एक नए सूर्योदय की तरह है। यह उन सभी युवाओं के लिए संदेश है जो राजनीति को गंदा समझकर दूर भागते हैं। जनता ने ‘पुराने’ को नकार कर ‘काबिलियत’ को अपनाया है।
सिराहा ने अपना ‘इंजीनियर’ चुन लिया है, अब बारी इस इंजीनियर की है कि वह जनता की उम्मीदों के उस पुल का निर्माण करे, जो भ्रष्टाचार से मुक्त और विकास से लबालब हो।
People Also Ask
1. तपेश्वर यादव किस पार्टी से निर्वाचित हुए हैं ? तपेश्वर यादव राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा/NISP) के उम्मीदवार के रूप में सिराहा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-4 से प्रतिनिधि सभा के सदस्य (MP) चुने गए हैं।
2. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को कितने मतों के अंतर से हराया ? यह इस चुनाव की सबसे बड़ी जीत में से एक है। तपेश्वर यादव को 36,210 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी अजय शंकर नायक (नेकपा) को केवल 7,992 मत प्राप्त हुए। जीत का अंतर 28,218 वोटों का रहा।
3. राजनीति में आने से पहले उनका पेशा क्या था ? तपेश्वर यादव एक पेशेवर सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने त्रिभुवन विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) किया है और राजनीति में आने से पहले विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी परियोजनाओं में एक कुशल इंजीनियर और तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य किया है।
4. उन्होंने सरकारी नौकरी क्यों छोड़ी ? उन्होंने मिर्चैया नगरपालिका में 2 साल तक अनुबंध पर इंजीनियर के रूप में काम किया। व्यवस्था की कमियों को सुधारने और समाज में बड़े स्तर पर बदलाव लाने के उद्देश्य से, उन्होंने 2079 BS में अपने पद से इस्तीफा दे दिया और औपचारिक राजनीति में प्रवेश किया।
5. उनकी उम्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है ? तपेश्वर यादव की उम्र मात्र 33 वर्ष है। उनका जन्म 15 माघ, 2049 को सिराहा के नरहा गाँव (नरहा ग्रामीण नगरपालिका-5) में हुआ था। उनके पिता सत्यनारायण यादव हैं, जो उनकी इस उपलब्धि पर अत्यंत गौरवान्वित हैं।
6. संसद में उनकी मुख्य प्राथमिकताएं क्या होंगी ? एक इंजीनियर होने के नाते उनकी पहली प्राथमिकता क्षेत्र का बुनियादी ढांचा विकास (Infrastructure) है। इसके साथ ही वे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर बेरोजगारी खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
7. क्या उनके पास पहले से कोई संगठनात्मक अनुभव है ? जी हाँ, वे राजनीति में आने से पहले ही सक्रिय रहे हैं:
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वे नेपाल इंजीनियर्स एसोसिएशन (मधेश प्रदेश) के केंद्रीय महासचिव और दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं।
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वे पोखरा स्थित तराई छात्र सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे हैं।
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वर्तमान में वे रास्वपा के मधेश प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

