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प्रधानमंत्री बालेन का फैसला – विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों से हटेंगे दलीय विद्यार्थी व कर्मचारी संगठन

 

काठमांडू, 20 अप्रैल: प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) ने देशभर के विश्वविद्यालयों तथा स्वास्थ्य संबंधी शैक्षिक संस्थानों में सक्रिय दलीय विद्यार्थी और कर्मचारी संगठनों की संरचनाओं को हटाने का निर्णय अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है।

प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय में आयोजित लंबी चर्चा के दौरान उपकुलपतियों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियाँ अस्वीकार्य हैं। कैंपस, अस्पताल और विद्यालयों में किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव या ढाँचे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार आवश्यकता पड़ने पर कानूनी बाधाओं को भी हटाने को तैयार है।

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प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि जो लोग राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं, वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से अलग होकर पूर्णकालिक राजनीति करें।

चर्चा के दौरान कई उपकुलपतियों ने बताया कि विद्यार्थी संगठनों की संरचनाएँ हटाने के प्रयास में सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। इस पर प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि किसी भी समस्या पर संबंधित मंत्रालय या उनके सचिवालय को सूचित करें, और आवश्यक सुरक्षा सहायता प्रदान की जाएगी। सुरक्षा निकायों को कर्तव्यनिष्ठा से परिचालित करने का आश्वासन देते हुए उन्होंने उपकुलपतियों से बिना किसी डर के अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।

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इसी क्रम में उन्होंने शैक्षिक कैलेंडर का पूर्ण पालन और परीक्षा परिणाम अधिकतम एक माह के भीतर जारी करने का भी निर्देश दिया।

शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशानुसार दलीय संगठनों की संरचनाएँ हटाने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

उपकुलपतियों ने अपने-अपने संस्थानों की स्थिति प्रस्तुत करते हुए बताया कि कई स्थानों पर राजनीतिक गतिविधियाँ कम हो रही हैं, लेकिन कुछ कैंपसों में अब भी प्रभाव बना हुआ है। वहीं, कुछ का मानना है कि प्रशासनिक सख्ती बरती जाए तो शैक्षिक क्षेत्र से राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त हो सकता है।

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