मधेश सरकार से समर्थन वापस लिया जनमत पार्टी ने, अब सरकार बहुमत परीक्षण की ओर
जनकपुरधाम। नेपाल के मधेश प्रदेश की कृष्णप्रसाद यादव सरकार को एक और झटका लगा है। जनमत पार्टी ने सोमवार (ज्येष्ठ २१, २०८३) को इस सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। पार्टी ने प्रदेश प्रमुख के कार्यालय में एक पत्र भेजकर समर्थन वापसी की औपचारिक जानकारी दी।
जनमत पार्टी के प्रमुख सचेतक चंदन कुमार सिंह के हस्ताक्षर वाला यह पत्र सोमवार को कार्यालय समय समाप्त होने के बाद प्रदेश प्रमुख के कार्यालय पहुंचा। प्रदेश प्रमुख के सचिव नारायणप्रसाद दहल ने पत्र प्राप्त होने की पुष्टि की है।
प्रमुख सचेतक सिंह ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष डॉ. सीके राउत से परामर्श करके यह निर्णय लिया गया है। हालाँकि, पार्टी के संसदीय दल के नेता तथा वर्तमान सरकार में अर्थमंत्री महेश यादव ने इस मामले में अपनी अनभिज्ञता जताई है। इससे पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद होने की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि गत वर्ष १९ मंसिर को कांग्रेस नेता कृष्णप्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने थे। मधेश प्रदेश सभा में जनमत पार्टी के १२ सांसद हैं। यह समर्थन वापसी के बाद भी राजनीतिक समीकरण समझना जरूरी है:
· मधेश प्रदेश सभा में कुल सदस्य: १०४
· जनमत के सांसद: १२
जनमत के समर्थन वापस लेने के बावजूद, मुख्यमंत्री यादव के पास अभी भी जसपा, लोसपा, माओवादी और एकीकृत समाजवादी के समर्थन से बहुमत बरकरार है। लेकिन एक सहयोगी दल के समर्थन वापस लेने के कारण अब सरकार को ३० दिनों के भीतर प्रदेश सभा में विश्वास मत हासिल करना अनिवार्य हो गया है।
जनमत पार्टी के इस फैसले से मधेश की राजनीति गरमा गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार विश्वास मत परीक्षा में खरी उतर पाएगी, या फिर मधेश में सियासी संकट गहराता है।
पार्टी के दो मंत्री – महेश यादव (अर्थ) और वसंत कुसवाहा (खेलकुद) – अब क्या रुख अपनाते हैं, यह भी देखना दिलचस्प होगा।


