Sat. Feb 29th, 2020

नहीं चला जादू

मिस नेपाल के प्रतियोगियों का अर्न्ताष्ट्रीय मंच प कोई खास जादू नहीं चल पाया। इस वर्षमिस नेपाल २०११ का खिताब जितने वाली मलीना जोशी ने लण्डन में आयोजित मिस वलर््ड २०११ में टाँप १५ में भी जगह नहीं बना पाई। ऐसा ही कुछ हाल मिस नेपाल की सेकेण्ड न अप सीना मास् के का भी हुआ। चीन में हुए मिस इंटनेशनल २०११ में सीना मास् के से भी लोगों को काफी उम्मीद थी लेकिन वहां भी नेपाल का कोई भी जादू नहीं चला। इसी तह फष्र्ट न अप अनुपमा गुरूंग भी मिस अर्थ में हिस् सा लेक खाली हाथ लौट चुकी है। आखि क्या वजह है कि नेपाल की सुन्दयिों का जलवा देश के बाह नहीं चल पाता है। इसके लिए शायद उन्हें पफेक्ट ट्रेनिंग की जरूत होती है जि कि नेपाल में उपलब्ध नहीं हो पाती है। इससे पहले भी अर्न्ताष्ट्रीय मंचों प अच्छा पर््रदर्शन क चुकी नेपाल की कई सुंदयिों ने बताया कि नेपाल में मिस नेपाल प्रतियोगिता हो जाने के बाद इस बात प ध्यान नहीं दिया जाता है। आयोजक संस् था की यह जिम्मेवाी होती है कि वह मिस नेपाल में विजेता सुन्दयिों को ट्रेनिंग दे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। जिसे अर्ंताष्ट्रीय मंच प अपनी प्रस् तुति देनी पडती है उसे ही अपने स् त प तैयाी कनी पडती है।  नेपाली सुन्दी प्रतियोगिता का इस समय नेपाल में ही कई संस् थाओं औ महिला संगठनों द्वाा विोध किया जाता है। ऐसे में नेपाल में मिस नेपाल जैसी सौर्ंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन भी बहुत ही मुश्किल से औ सुक्षा घेा के बीच हो पाता है। माओवादी के विोध की वजह से तो एक बा प्रतियोगिता को अन्तिम समय में आक स् थगित कना पडा था। कई अन्य काण भी है जिसकी वजह से नेपाल की सुन्दयिों को काफी मुश्किलों का सामना कना पडता है।  इस सौर्ंदर्य प्रतियोगिता में हिस् सा लेने वालों में ऐसा नहीं है कि उनमें प्रतिभा की या तो सौर्ंदर्य की कोई कमी होती है। लेकिन अर्न्ताष्ट्रीय मंचों प दुनिया भ के प्रतियोगियों के साथ टक्क लेने के लिए नेपाल के प्रतियोगियों को काफी कडी मेहनत औ उच्च स् तीय प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इस बा के मिस नेपाल प्रतियोगिता में ही देखा गया तो जो भी फाईनलिष्ट प्रतिभागी पहुंची थी उनका बोलने का निर्ण्ाायकों के सवाल का जवाब देने का जो तीका था वह कोई खास आकषिर्त औ स् तीय नहीं था। हां कुछ एक प्रतिभागियों ने शानदा औ आकर्ष जवाब दिया था। लेकिन अधिकांश प्रतिभागियों में आत्मविश्वास की जबर्दस् त कमी खल ही थी। औ यही आत्मविश्वास की कमी उन्हें अर्ंताष्ट्रीय मंचों प आगे बढने से ोकती है।

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