100 दिनों की चुप्पी के बाद संवाद की राह पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, उद्योग जगत से लेकर शिक्षाविदों तक बढ़ाया संपर्क
काठमांडू, 17 जुलाई। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह ने सरकार गठन के लगभग सौ दिनों तक सीमित सार्वजनिक संवाद बनाए रखने के बाद अब विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से लगातार मुलाकात और परामर्श का सिलसिला शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह के दौरान उन्होंने उद्योगपतियों, व्यापारियों, निर्माण व्यवसायियों, होटल उद्यमियों, महिला उद्यमियों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, जूता उद्योग के प्रतिनिधियों तथा राजनीतिक नेताओं से अलग-अलग बैठकों में देश की अर्थव्यवस्था, निवेश, शिक्षा, उद्योग और सुशासन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री शाह पर यह आरोप लग रहा था कि वे सिंहदरबार तक सीमित हो गए हैं और निजी क्षेत्र, विपक्ष, कूटनीतिक समुदाय तथा आम जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद से दूरी बनाए हुए हैं। अब उनके बदले हुए रवैये को सरकार की नई कार्यशैली के रूप में देखा जा रहा है।
उद्योग जगत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश
हाल के दिनों में उद्योग एवं व्यापार जगत में सरकार की नीतियों को लेकर असमंजस और भय का माहौल बना हुआ था। जेनजी आंदोलन के दौरान औद्योगिक प्रतिष्ठानों में आगजनी तथा उसके बाद कुछ व्यवसायियों की गिरफ्तारी से निजी क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ी थी।
इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री शाह ने उद्योगपतियों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य उद्यमियों को परेशान करना नहीं बल्कि औद्योगिक वातावरण तैयार कर आर्थिक समृद्धि हासिल करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र को विकास का साझेदार मानती है, लेकिन कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
जूता उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने नेपाल जूता उत्पादक संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात कर स्वदेशी जूता उद्योग को प्रोत्साहन देने, बाजार विस्तार, आयात प्रतिस्थापन और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। इस दौरान उद्योग से जुड़े नीतिगत सुधार और उत्पादन बढ़ाने के विषय भी प्रमुखता से उठाए गए।
महिला उद्यमियों को सरकार का भरोसा
महिला उद्यमी महासंघ नेपाल के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
महिला उद्यमियों ने व्यवसाय-अनुकूल वातावरण, अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच, व्यापार मेलों में भागीदारी तथा निर्यात प्रोत्साहन की मांग रखी। उन्होंने महासंघ द्वारा विकसित “मैं उद्यमी” (म उद्यमी) ब्रांड को सरकारी सहयोग देने का आग्रह भी किया, जिसे प्रधानमंत्री ने सकारात्मक रूप से लिया।
होटल व्यवसायियों से पर्यटन पर चर्चा
होटल एसोसिएशन नेपाल (हान) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री शाह ने पर्यटन क्षेत्र को अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बताते हुए सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से पर्यटन उद्योग को सशक्त बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने छोटे एवं मध्यम होटल व्यवसायियों को पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराने और कर प्रणाली के दायरे में आने की भी सलाह दी।
निर्माण व्यवसायियों की समस्याओं पर हुई चर्चा
नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भुगतान में देरी, परियोजनाओं की समयसीमा, मूल्य समायोजन, बैंकिंग कठिनाइयों और निवेश संबंधी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्माण क्षेत्र आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना निर्माण का प्रमुख स्तंभ है तथा सरकार व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म करने की पहल
प्रधानमंत्री शाह ने हाल ही में नियुक्त विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक कर उच्च शिक्षा में सुधार, सुशासन, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर बल दिया।
बैठक में कुलपतियों ने विश्वविद्यालय परिसरों को दलगत राजनीति से मुक्त रखने तथा प्रशासनिक एवं शैक्षणिक सुधार लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
निजी क्षेत्र के साथ नियमित संवाद पर सहमति
नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ, नेपाल उद्योग परिसंघ और नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में निवेश वातावरण सुधारने, नीतिगत स्थिरता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सरकार तथा निजी क्षेत्र के बीच नियमित संवाद की आवश्यकता पर सहमति बनी।
व्यापारिक संगठनों ने सरकार से विश्वास बहाली और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की मांग की।
एडीबी अध्यक्ष से पहली औपचारिक मुलाकात
प्रधानमंत्री शाह ने एशियाई विकास बैंक (ADB) के अध्यक्ष मासातो कांडा से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने नेपाल और एडीबी के छह दशक पुराने विकास सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
बैठक में जलविद्युत, पर्यटन, डिजिटलाइजेशन और सड़क अवसंरचना में सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई।
हालाँकि इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया। हाल के समय में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के बीच मतभेदों की खबरें भी सामने आती रही हैं।
विपक्ष और राजनीतिक संवाद की शुरुआत
प्रधानमंत्री शाह ने पहली बार राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई।
हालाँकि विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अभी तक संसद में प्रमुख विपक्षी नेताओं के साथ औपचारिक संवाद शुरू नहीं किया है।
पहले संवादहीनता को लेकर हुई थी आलोचना
प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने विदेशी राजदूतों और कूटनीतिक प्रतिनिधियों से सामूहिक मुलाकात की थी, लेकिन उसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक संवाद से लगभग दूर रहे।
इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक मंदी, संसद में गतिरोध और जनता की बढ़ती असंतुष्टि पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है। संसद में नीति एवं कार्यक्रम तथा बजट पर उठे सवालों का समय पर जवाब न देने को लेकर भी प्रधानमंत्री की आलोचना हुई।
सीमा संबंधी एक विवादास्पद टिप्पणी के बाद विपक्ष ने संसद में लगातार सरकार को घेरना शुरू किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने अब तक संसद में उस विषय पर विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
विशेषज्ञों की राय
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति केदारभक्त माथेमा का मानना है कि संवादहीनता समाप्त कर विभिन्न पक्षों से बातचीत शुरू करना एक सकारात्मक कदम है। उनके अनुसार, सरकार ने शुरुआती महीनों में नीति निर्माण और अध्ययन पर ध्यान दिया और अब संबंधित पक्षों से संवाद कर रही है, जिससे बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
वहीं राजनीतिक विश्लेषक डॉ. पिताम्बर भण्डारी का कहना है कि सरकार पहले सिंहदरबार तक सीमित दिखाई दे रही थी, लेकिन अब विषय और आवश्यकता के आधार पर संवाद का दायरा बढ़ा रही है। हालांकि उनका मानना है कि प्रधानमंत्री की कार्यशैली में अभी भी काठमांडू महानगर के मेयर वाले दौर की झलक दिखाई देती है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की हालिया सक्रियता यह संकेत देती है कि सरकार अब संवाद आधारित शासन व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहती है। उद्योग, व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और राजनीतिक क्षेत्र के विभिन्न प्रतिनिधियों से लगातार हो रही बैठकों ने निजी क्षेत्र में विश्वास बहाली की शुरुआत की है। हालांकि विपक्ष और संसद के साथ नियमित एवं संस्थागत संवाद स्थापित करना अभी भी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यदि यह संवाद आगे भी निरंतर और परिणामोन्मुखी रहा, तो इससे आर्थिक सुधार, नीतिगत स्थिरता और राजनीतिक विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक वातावरण बन सकता है।


