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जीवन यात्रा एक मंडी है, जहाँ हर क्षण कर्मों का व्यापार होता है : बिमल सर्राफ

 

रक्सौल, पूर्वी चंपारण। “यह संसार एक विशाल मंडी के समान है, जहाँ विभिन्न स्थानों से आए लोग अपनी-अपनी इच्छाओं, आवश्यकताओं और कर्मों का व्यापार करते हैं।” यह प्रेरणादायी विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ( 322 ई )के जोनल चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन, समाजसेवी तथा भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक एवं मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से बातचीत के दौरान व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए दिन-रात परिश्रम करता है, कोई सच्चे मित्र की तलाश में भटकता है, किसी को धन-संपत्ति और जायदाद बढ़ाने की चिंता रहती है, तो कोई मान-सम्मान और प्रशंसा प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है। जितने अधिक लोग हैं, उतनी ही उनकी अलग-अलग रुचियाँ, आकांक्षाएँ और प्राथमिकताएँ हैं।

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बिमल सर्राफ ने कहा कि सांसारिक व्यापार में कुछ लोग लाभ कमाते हुए दिखाई देते हैं और कुछ हानि उठाते हुए, किंतु वास्तविकता यह है कि अंततः सब कुछ यहीं छूट जाता है। न तो मनुष्य अपनी इच्छाओं का अंत कर पाता है और न ही उसकी चिंताओं का। परंतु जो लोग प्रभु-भक्ति रूपी धन एकत्र करते हैं, वे मानसिक शांति और संतोष प्राप्त करते हैं। उनकी “राम नाम” रूपी पूँजी निरंतर बढ़ती रहती है और उन्हें हानि का भय नहीं सताता।

उन्होंने कहा कि प्रेम और करुणा जितनी अधिक हमारे भीतर होगी, हमारा जीवन उतना ही सुंदर, सार्थक और आनंदमय बनेगा। जीवन में मेहनत का फल और समस्याओं का समाधान देर से ही सही, लेकिन अवश्य मिलता है। भाग्य के भरोसे बैठने वाले लोग अवसर खो देते हैं, जबकि बुद्धिमान व्यक्ति अपने पुरुषार्थ, कर्म और उद्यम के बल पर श्रेष्ठ उपलब्धियाँ प्राप्त करते हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि जीवन में अपना व्यक्तित्व इतना विनम्र और सरल रखें कि कोई उसमें से कुछ घटा न सके, लेकिन जिसके साथ खड़े हो जाएँ, उसका आत्मविश्वास और सम्मान कई गुना बढ़ जाए। जिंदगी में यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि कौन आगे है और कौन पीछे, बल्कि यह अधिक महत्वपूर्ण है कि हम किसके साथ खड़े हैं और कौन हमारे साथ खड़ा है।

कबड्डी के उदाहरण से उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई खिलाड़ी सफलता की रेखा को छूता है, वैसे ही विरोधी उसके पैर खींचने लगते हैं। ठीक इसी प्रकार जीवन में भी सफलता मिलते ही अनेक लोग बाधाएँ उत्पन्न करने लगते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सृजन का प्रारंभ जिज्ञासा से होता है, और जिज्ञासा को सार्थक बनाने के लिए संवेदनशीलता का होना अत्यंत आवश्यक है।

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