एलपीजी गैस लेने के लिए नागरिकता और परिचयपत्र अनिवार्य, नेपाल आयल निगम की व्यवस्था की चौतरफा आलोचना
नेपाल आयल निगम ने खाना पकाने वाली एलपीजी गैस के वितरण को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से गैस लेने आने वाले उपभोक्ताओं के लिए नागरिकता तथा परिचयपत्र अनिवार्य कर दिया है। निगम के इस फैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से नागरिक इस व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।
निगम ने शुक्रवार को एक सूचना जारी कर बताया था कि शनिवार को काठमांडू घाटी के पाँच स्थानों पर विभिन्न गैस कंपनियों के सिलेंडरों की बिक्री-वितरण की व्यवस्था की गई है। सूचना में उपभोक्ताओं से गैस लेने आते समय नागरिकता प्रमाणपत्र और राष्ट्रीय परिचयपत्र अनिवार्य रूप से साथ लाने को कहा गया था।
गैस लेने के लिए नागरिकता और राष्ट्रीय परिचयपत्र अनिवार्य किए जाने के बाद इस फैसले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नेपाल आयल निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर के अनुसार, गैस वितरण को व्यवस्थित, पारदर्शी और वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
उनके अनुसार, कुछ लोगों द्वारा एक ही व्यक्ति के नाम पर कई सिलेंडर लेकर उन्हें जमा करने की शिकायत सामने आई है। इसके कारण वास्तव में तत्काल गैस की आवश्यकता वाले उपभोक्ताओं को गैस से वंचित होना पड़ रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड रखने और उन्हें आसानी से गैस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पहचान संबंधी दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं।
प्रवक्ता ठाकुर ने स्पष्ट किया कि नागरिकता या राष्ट्रीय परिचयपत्र नहीं होने की स्थिति में भी संबंधित व्यक्ति की पहचान स्पष्ट करने वाला अन्य आधिकारिक परिचयपत्र प्रस्तुत करके गैस प्राप्त की जा सकती है। इनमें मतदाता पहचानपत्र, विद्यार्थी परिचयपत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेज शामिल हैं।
उनका कहना है कि पहचान संबंधी दस्तावेज के आधार पर गैस वितरण किए जाने से यह स्पष्ट रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि किस व्यक्ति ने कितनी गैस प्राप्त की है। इससे कालाबाजारी और गैस के अनावश्यक भंडारण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
प्रवक्ता ठाकुर ने कहा कि यह व्यवस्था किसी नागरिक को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं की गई है, बल्कि तत्काल आवश्यकता वाले वास्तविक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराने के लिए लागू की गई है। निगम ने अपने अधीनस्थ डिपो और विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि इस व्यवस्था के कारण किसी वास्तविक उपभोक्ता को गैस से वंचित न किया जाए और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाए।
हालाँकि, नागरिकों का कहना है कि गैस जैसी अत्यावश्यक घरेलू जरूरत की वस्तु प्राप्त करने के लिए पहचानपत्र की अनिवार्यता आम उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए व्यवस्था को लागू करने से पहले इसकी व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सरल और सहज वितरण प्रणाली विकसित करने की मांग भी उठ रही है।


