बीपी कोइराला और गणेशमान सिंह को किसी परिवार या सीमित समूह तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए : गगन थापा
नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा ने कहा है कि बीपी कोइराला और गणेशमान सिंह जैसे नेताओं को किसी परिवार या सीमित समूह के भीतर कैद नहीं किया जाना चाहिए।
हाल के दिनों में कांग्रेस के भीतर ही बीपी कोइराला के विचारों की अपनी सुविधा के अनुसार व्याख्या करने और राजनीतिक आवश्यकता पड़ने पर ही उनके नाम का इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। थापा ने इस पर असंतोष व्यक्त किया।
रविवार को धर्म गौतम द्वारा प्रकाशित पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभापति थापा ने आरोप लगाया कि नेता अपने राजनीतिक निर्णय स्वयं लेने में असमर्थ होकर बीपी कोइराला के नाम का सहारा लेने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि अपनी राजनीतिक आवश्यकता पूरी करने के लिए ‘राष्ट्रीय मेलमिलाप’ का प्रसंग उठाकर बीपी को ढाल बनाने की प्रवृत्ति उनके वास्तविक विचारों को कमजोर करती है।
थापा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं की ओर संकेत करते हुए कहा, “हाल के दिनों में हमारी परंपरा बन गई है कि जहां अपनी जरूरत होती है, वहीं बीपी कोइराला को इस्तेमाल किया जाता है। मैं अभी भी देख और सुन रहा हूं कि जगह-जगह होने वाली चर्चाओं में बीपी कोइराला का राष्ट्रीय मेलमिलाप का संदर्भ बहुत व्यापक रूप से सामने आ रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “नेताओं ने फिर रातोंरात बीपी को याद करना शुरू कर दिया है। रातोंरात बीपी को याद करने के पीछे यहां अभी क्या लेन-देन करना है, किससे मिलना है, किससे कानाफूसी करनी है—यह बात स्वयं कहने का साहस नहीं है। जब वह साहस नहीं होता तो किसे याद करें? बीपी को याद करते हैं।”
थापा ने जोर देकर कहा कि बीपी कोइराला और गणेशमान सिंह का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “बीपी कोइराला या गणेशमान को किसी को भी इस घर के भीतर कैद करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि आज बीपी के विचारों की गलत व्याख्या की जा रही है। ऐसे में बीपी के आह्वान पर आंदोलनों में शामिल होने वाले धर्म गौतम जैसे पुरानी पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को वास्तविकता नई पीढ़ी के सामने रखनी चाहिए।
थापा ने कहा कि नई पीढ़ी के पास बीपी के साथ प्रत्यक्ष अनुभव नहीं है। इसलिए कभी-कभी कोई व्यक्ति गलत बात भी यह कहकर प्रस्तुत कर देता है कि “बीपी ने ऐसा कहा था”, तो उसे मान लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता।
उन्होंने कहा, “हमारे पास वह प्रामाणिकता नहीं होती। कभी-कभी तीन लोग बातचीत के लिए बैठते हैं और कोई कहता है कि बीपी ने ऐसा कहा था। हमने कहीं पढ़ा भी नहीं, सुना भी नहीं, लेकिन जब वह कहता है कि उन्होंने कहा था तो हमें ‘शायद ऐसा ही होगा’ मानना पड़ता है। इसलिए उस समय के जो कार्यकर्ता और आंदोलनकारी थे, उन्हें बीपी के बारे में वास्तविक बातें बतानी चाहिए।”
बीपी कोइराला के लंबे और निरंतर विकसित होते राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए थापा ने कहा कि लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी मूल प्रतिबद्धता कभी नहीं बदली।
उन्होंने कहा कि बीपी के आर्थिक विकास, उत्पादन, ग्रामीण विकास, लघु उद्योग और तकनीक के प्रयोग संबंधी विचारों का वर्तमान विकास संबंधी बहस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संदर्भ में भी अध्ययन किया जा सकता है।


