देवानगंज में हुई सांप्रदायिक झड़प और सुरक्षा कार्रवाई को लेकर रास्वपा के दो सांसदों के बीच विवाद
2 months ago
देवानगंज में हुई सांप्रदायिक झड़प और सुरक्षा कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के दो सांसदों के बीच विवाद बढ़ गया है।
सुनसरी क्षेत्र नंबर 2 के सांसद लालविक्रम थापा और क्षेत्र नंबर 4 के सांसद दीपककुमार साह के बीच सोशल मीडिया और संचार माध्यमों के जरिए आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है।
सांसद साह की टीम द्वारा तैयार किए गए स्थलगत अध्ययन प्रतिवेदन में सांसद थापा की सोशल मीडिया भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें जांच के दायरे में रखने की सिफारिश किए जाने के बाद विवाद सामने आया। प्रतिवेदन सार्वजनिक होने के बाद सांसद थापा ने फेसबुक के जरिए आरोप लगाया कि साह और उनके सचिवालय ने सरकारी प्रतिवेदन के नाम का दुरुपयोग करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश की है।
साह के प्रतिवेदन को झूठा, आधारहीन और योजनाबद्ध प्रचार बताते हुए थापा ने खुद को निर्दोष बताया। थापा ने लिखा, “नेपाल माता, मैं अपराधी नहीं हूं। अपराधी को कानून के कठघरे में खड़ा करने वाला बहादुर बेटा हूं।”
थापा का कहना है कि साह और उनके सचिवालय द्वारा स्वयं चार पन्नों का दस्तावेज तैयार कर भ्रामक प्रचार करवाना निंदनीय है। गृह मंत्रालय की आधिकारिक जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, ऐसे में किसी अन्य सांसद द्वारा अपनी ओर से रिपोर्ट बांटना उन्होंने षड्यंत्र बताया। उन्होंने हिंसा भड़काने में अपनी भूमिका साबित करने की चुनौती देते हुए कानूनी उपचार तलाशने की चेतावनी भी दी है।
थापा के आरोप के बाद सांसद साह ने कहा कि उनका प्रतिवेदन किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए तैयार किया गया एक प्रारंभिक दस्तावेज मात्र है। साह ने कहा कि संभव है थापा ने पूरी रिपोर्ट पढ़े बिना और उसके लेखन के भाव को समझे बिना प्रतिक्रिया दी हो।
साह ने स्पष्ट किया, “बिंदु नंबर 13 में स्थानीय लोगों की बात और सोशल मीडिया के प्रभाव के बारे में समग्र रूप से लिखा गया है। यह किसी के ऊपर आरोप नहीं है।”
उन्होंने कहा कि नेता का काम सवाल उठाना और जांच के लिए सरकार से आग्रह करना है, जबकि रिपोर्ट को स्वीकार करने का अधिकार सरकार के पास है। साह ने बताया कि सुनसरी में एक समुदाय अभी भी भयभीत है और पुलिस के सामने ही दुकान जला दिए जाने के बावजूद लोग शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वोट की राजनीति के लिए नेताओं द्वारा समाज को खतरे में डालने की कोशिश किए जाने की शिकायतें मिली हैं, इसलिए उनकी टीम ने केवल सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया है।
थापा ने क्या कहा था?
देवानगंज की घटना के तुरंत बाद घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे सांसद थापा ने सुरक्षा प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व पर नाराजगी जताई थी। अस्पताल में घायलों से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि प्रमुख जिला अधिकारी ने घटना के बारे में अनभिज्ञता जताई, जिस पर उन्होंने असंतोष व्यक्त किया।
उस समय थापा ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा था, “मैंने सीडीओ से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं है। इतनी बड़ी दमनात्मक कार्रवाई होने के बावजूद प्रशासन प्रमुख को जानकारी न होना झूठी बात है, वह झूठ बोल रहे हैं।”
उस समय उन्होंने सुरक्षाकर्मियों की कार्यशैली पर भी गंभीर आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था, “कहीं गोली लगने से लोगों को गड्ढों में तो नहीं डाल दिया गया है?” सुरक्षाकर्मियों को जांच करने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा था, “कहीं-कहीं बच्चे तड़पकर मर तो नहीं गए हैं, सर्च ऑपरेशन जारी रखो।”
थापा ने बताया था कि उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री से बात करके घायलों के उपचार के लिए हेलीकॉप्टर मंगाने की पहल की थी। उन्होंने नई सरकार के कार्यकाल में युवाओं पर हुए कथित बर्बर दमन पर दुख भी व्यक्त किया था।


