रक्षा बंधन और जनेऊ पूर्णिमा आज: सनातन परंपरा, आत्मरक्षा और भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व
1 week ago
काठमांडू।
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज पूरे नेपाल में हिंदू धर्मावलंबी रक्षा बंधन और जनेऊ पूर्णिमा (यज्ञोपवीत पूर्णिमा) का पर्व श्रद्धा, आस्था और वैदिक विधि-विधान के साथ मना रहे हैं। सत्ययुग से चली आ रही इस पवित्र परंपरा का उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि, आत्मरक्षा और धर्म के प्रति समर्पण का संकल्प लेना है।
सप्तऋषियों की पूजा और पवित्र स्नान
आज प्रातःकाल श्रद्धालु नदियों, तालाबों, सरोवरों और अन्य जलाशयों में स्नान कर सप्तऋषियों तथा प्रजापति ऋषियों का पूजन करते हैं। वैदिक परंपरा के अनुसार वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भरद्वाज इन सात महान ऋषियों की स्तुति कर उन्हें तर्पण अर्पित किया जाता है।
रक्षा सूत्र बांधने की वैदिक परंपरा
इस दिन गुरु या पुरोहित श्रद्धालुओं की कलाई पर रक्षा सूत्र (डोरा) बांधते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार देवगुरु बृहस्पति ने इसी रक्षा सूत्र से महाबली दानवराज बलि को बांधकर देवताओं की रक्षा की थी। उसी स्मृति में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा प्रचलित हुई।
पूजन के समय यह वैदिक मंत्र बोला जाता है—
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
अर्थ: जिस पवित्र रक्षा सूत्र से महान दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूँ। यह रक्षा सूत्र तुम्हारी सदैव रक्षा करे और कभी विचलित न हो।
जनेऊ बदलने का धार्मिक महत्व
ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ण के यज्ञोपवीतधारी आज पुराने जनेऊ का त्याग कर वैदिक मंत्रों के साथ नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करते हैं। जनेऊ बदलने से पहले जौ, तिल और कुश के माध्यम से ऋषियों को तर्पण दिया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार जनेऊ धारण करने से मनुष्य की आयु, बुद्धि, तेज, बल और आत्मानुशासन में वृद्धि होती है तथा वह विवेकशील और धर्मनिष्ठ बनता है।
पौराणिक परंपरा में जनेऊ
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शिव, ब्रह्मा, महाराजा जनक, माता पार्वती, माता सीता और माता दुर्गा सहित अनेक दिव्य व्यक्तित्वों ने यज्ञोपवीत धारण किया था। प्राचीन काल में महिलाओं द्वारा भी जनेऊ धारण करने की परंपरा थी, जो समय के साथ धीरे-धीरे समाप्त हो गई।
राखी का पर्व: भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक
नेपाल के तराई क्षेत्र और भारत में प्रचलित राखी बांधने की परंपरा अब पूरे नेपाल में व्यापक रूप से मनाई जाती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
इसके बदले भाई बहनों को उपहार, दक्षिणा और जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं। यही परंपरा भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट संबंध को और अधिक मजबूत बनाती है।
रक्षा बंधन का संदेश
रक्षा बंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य, विश्वास, संरक्षण और आत्मिक सुरक्षा का भी महापर्व है। यह पर्व हमें परिवार, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए प्रेम, समर्पण और उत्तरदायित्व का संदेश देता है।


