अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में 9 कोरियाई नागरिक समेत कई नेपाली मजदूर लापता,सरकार द्वारा निजी हेलीकॉप्टरों को रेस्क्यू की अनुमति नहीं
216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 (माथिल्लो त्रिशूली-1) जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 9 दक्षिण कोरियाई नागरिकों सहित कई नेपाली मजदूर पिछले पाँच दिनों से लापता हैं।
विनाशकारी भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद परियोजना स्थल पर काम कर रहे कोरियाई और नेपाली कर्मचारी लापता हो गए। आरोप है कि समय पर बचाव कार्य शुरू न होने के कारण दक्षिण कोरिया सरकार ने नेपाल सरकार को पत्र भेजकर निजी हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू की अनुमति माँगी, लेकिन अब तक आवश्यक समन्वय नहीं हो सका है।
इस परियोजना में मुख्य निवेश कोरियाई कंपनी का है। परियोजना संचालक कंपनी और नेपाल स्थित दक्षिण कोरियाई दूतावास ने अपने नागरिकों की स्थिति जानने और उन्हें बचाने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन कंपनी का कहना है कि गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने हेलीकॉप्टर उड़ान की अनुमति नहीं दी। उनका यह भी दावा है कि सरकारी स्तर पर अब तक प्रभावी बचाव अभियान शुरू नहीं किया गया है।
लापता लोगों के परिजनों और कंपनी के प्रतिनिधियों ने सरकार की उदासीनता पर नाराज़गी जताई है। एक परिजन ने कहा,
“पाँच दिन हो गए हैं, हमें लोगों की कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास अपने संसाधन हैं, हेलीकॉप्टर भी तैयार है, लेकिन सरकार अनुमति नहीं दे रही।”
विदेश मंत्रालय ने भाद्र 12 को रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर फिस्टेल एयर और प्रभु हेलि के छह हेलीकॉप्टरों को उड़ान और लैंडिंग की अनुमति देने का अनुरोध किया था। दक्षिण कोरियाई दूतावास ने भी कूटनीतिक नोट के माध्यम से अपने नागरिकों की खोज और बचाव के लिए अनुमति माँगी थी।
हालाँकि, संबंधित पक्षों का आरोप है कि विदेश मंत्रालय की सिफारिश के बावजूद गृह और रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा तथा अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए केवल दो उड़ानों की अनुमति दी, जबकि बाकी अनुरोध लंबित रखे गए।
दक्षिण कोरिया ने अपने नागरिकों की खोज और बचाव के लिए एक विशेष राहत दल भी नेपाल भेजा है, लेकिन उसे भी अब तक उड़ान की अनुमति नहीं मिली है।
बताया जा रहा है कि कुछ लोग 90 डिग्री ढलान वाले पहाड़ और घने जंगल में घायल अवस्था में फँसे हो सकते हैं। कंपनी और परिजनों का कहना है कि यदि तत्काल बचाव नहीं किया गया तो मानवीय क्षति और बढ़ सकती है।
इस बीच, अब तक लापता लोगों की आधिकारिक सूची भी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे पीड़ित परिवारों में भारी नाराज़गी और चिंता है।


