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मधेशी मधेश ही नही देश भी चलाने में सक्षम है : विश्लेषक सि.के. लाल

 

कैलास दास,जनकपुर,  २९ सेप्टेम्बर |

CK-lalराजनीतिक विश्लेषक सि.के. लाल ने कहा है कि मधेशी मधेश ही नही देश चलाने की क्षमता रखता है । खसवादी शासक देश चलाने में असक्षम सावित हो चुका है यह संविधान से जाहीर होता है । अगर देश चलाने की क्षमता उनमे होती तो आज देश में द्वन्द नही होता, इसलिए कहता हूँ कि अब वो लोग राजनीतिक मधेशी जनता को शोप दें ।

‘पेशाकर्मी सभक सञ्जाल धनुषा’ द्वारा सोमवार जनकपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि खसवादी शासक जनता के मत का दुरुपयोग किया है । बड़ी सख्यां में जितकर जाना और शासन करना बडी बात नही है क्योकि इसका भी बहुत बडा इतिहास है, हिटलर भी बहुमत से ही जितता था, लेकिन उसका क्रुरु शासन होने के कारण ही अन्त हुआ इतिहास साक्षी है । ऐसा बहुत सारा इतिहास है कि बहुमत के बल पर जनता की आवाज को दवाने वाला खुदको मिटा चुका है । वर्तमान शासक ने भी मधेश आन्दोलन को यही समझ रखा है । वह समझते है कि राष्ट्र का सेना, जिल्ला प्रशासक, न्याय, कुटनीतिक के साथ साथ ही बहुमत भी हमारे साथ है । हम जैसा चाहे वैसा कर सकते है । अगर ऐसा मनसाय नही होता तो जायज माँग के लिए आन्दोलित निहथ्या जनता उपर बन्दूक की गोलियाँ नही बरसाते, अश्रु ग्यास नही छोडते, घर घर में जाकर नही पिटते । जबतक जनता के मत का सदुपयोग होता है तब उसका शासन चलता रहता है, जनता की मत दुरुपयोग होने पर शासन खतरे में रहा है इतिहास बतला चुका है ।

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उन्होने मधेश आन्दोलन के शहीदप्रति श्रद्धाञ्जली अर्पण करते हुए कहा कि बहुमत की बात कर मधेशी जनता उपर अब शासन नही चलेगा । पाकिस्तान के मुसरफ ने भी ९० प्रतिशत मत तथा इराक के सद्दाम ने ९५ प्रतिशत मत के आधार में क्रुरता पूर्वक शासन किया था । लेकिन नतिजा यह निकला की वह पतन हो गया । अब वही हाल नेपाल में होगा वह भविष्य बतला रहा है ।

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उन्होने एमाले पार्टी उपर ब्यंग करते हुए कहा कि एमाले तो एक सीमित समुदाय की पार्टी है, उसे सम्प्रदायिक पार्टी कहने से भी होगा । लेकिन अफसोच की बात यह है कि जिन्होने १७ हजार जनता को कुर्वानी के बाद सत्ता सम्भाले है एमाओवादी जनता की मर्म और भावना नही समझ सका । जिस मुद्दा को लेकर उन्होने सर्वसाधारण जनता का कुर्वानी दिया है उसका ही अधिकार इस संविधान में वन्चित रखा है । अब एमाओवादी भी शासक वर्ग के सूची में मानना होगा ।

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विश्लेषक लाल ने संविधान में नागरिकता, जनसंख्या के आधार में निर्वाचन, समावेसिता, न्याय प्रणाली, आत्म निर्णय के अधिकार सहित त्रुटिपुर्ण रहा बताया है ।

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