81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा: वैश्विक मंच पर आवाज बुलंद करेगा नेपाल
काठमांडू:19 सितंबर 2026। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र और नेपाली जनजीवन पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों को नेपाल अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रहा है। 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में नेपाल जलवायु न्याय, ‘क्षति और नुकसान’ (लॉस एंड डैमेज) वित्तपोषण, जलवायु अनुकूलन और हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखेगा।
गुरुवार को सिंहदरबार में संसदीय अंतरराष्ट्रीय संबंध और पर्यटन समिति की बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव अमृत बहादुर राई ने नेपाल के इस एजेंडे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेपाल जलवायु संकट के कारण देश में हो रहे भारी जान-माल के नुकसान की ओर विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित करेगा। राई ने जोर देते हुए कहा कि नेपाल जैसे भूमि से घिरे (लैंडलॉक्ड) और अल्प विकसित देशों के लिए अपने राष्ट्रीय हितों और चिंताओं को दुनिया के सामने रखने के लिए महासभा एक बेहद महत्वपूर्ण मंच है।
वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग की होगी मांग
सचिव राई के अनुसार, नेपाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ‘फंड फॉर रेस्पोंडिंग टू लॉस एंड डैमेज’ जैसे तंत्रों के माध्यम से तत्काल और उचित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह करेगा। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को कम करने के लिए जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे, ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ कृषि, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता विकास में विकसित देशों से सहयोग की अपील की जाएगी। नेपाल अपने जलवायु न्याय के मुद्दे को वैज्ञानिक प्रमाणों और देश के वास्तविक जमीनी हालात से जोड़कर पेश करेगा।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह करेंगे महासभा को संबोधित
महासभा के उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान होने वाली ‘जनरल डिबेट’ को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह संबोधित करेंगे। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी द्विपक्षीय मुलाकात तय है। यह नेपाली प्रतिनिधिमंडल, जिसमें विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार कुमार व्यंजनकार शामिल हैं, 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होगा और 26 सितंबर को स्वदेश लौटेगा।
महासभा के इतर विदेश मंत्री अल्प विकसित देशों (LDC), भूमि से घिरे विकासशील देशों (LLDC), गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) और ग्रुप-77 व चीन (G-77 & China) की मंत्री स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे तथा कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे।
नेपाल आयोजित करेगा ‘सगरमाथा टू द सी’ साइड इवेंट
इस वैश्विक मंच पर नेपाल 40 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र, विशाल हिमालय और विस्तृत नदी प्रणालियों के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपने महत्वपूर्ण योगदान को भी रेखांकित करेगा। जलवायु संकट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नेपाल महासभा के दौरान ‘सगरमाथा टू द सी: ए कॉल टू एक्शन फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंट फ्यूचर’ (एवरेस्ट से समुद्र तक: जलवायु अनुकूल भविष्य के लिए कार्रवाई का आह्वान) विषय पर एक उच्च-स्तरीय ‘साइड इवेंट’ भी आयोजित करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में आ रहे खतरनाक बदलावों और उससे उत्पन्न होने वाले जोखिमों के प्रति दुनिया को आगाह करना है।


