पुलों की मजबूत नींव पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक: भोटेकोशी बाढ़ के संदर्भ में विशेष प्रासंगिकता : तानुकलाल यादव द्वारा लिखित
काठमांडू, २० सितंबर, हिमालिनी डेस्क। नेपाल में 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी-त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर हिमाली क्षेत्र में परिवहन तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं की प्राकृतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया है। इस बाढ़ से सड़कें, पुल, बस्तियाँ, जलविद्युत परियोजनाएँ तथा अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएँ व्यापक रूप से प्रभावित हुईं। नेपाल सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 55 किलोमीटर सड़क, 37 मोटरेबल पुल और 68 झूला पुल क्षतिग्रस्त हुए तथा 13 जलविद्युत परियोजनाएँ प्रभावित हुईं।
ऐसे समय में नेपाल सरकार के पूर्व सचिव ई. तनुक लाल यादव द्वारा लिखित Pile Foundation for Bridges के तीसरे संस्करण का प्रकाशन विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है। यह पुस्तक पुल निर्माण के उस महत्वपूर्ण, किंतु अक्सर कम दिखाई देने वाले पक्ष पर केंद्रित है, जिस पर पूरे पुल की स्थिरता, सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोगिता निर्भर करती है – अर्थात् उसकी नींव (Foundation)। 
नेपाल में पुलों का निर्माण दुर्गम पर्वतीय भूभाग, जटिल भूगर्भीय संरचना, भूकंपीय जोखिम, अस्थिर ढलानों, तेजी से बदलती नदी-धारा एवं नदी-आकृति, तीव्र बाढ़ तथा नदी-तल में होने वाले कटाव (scour) जैसी परिस्थितियों में किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में केवल मानक सूत्रों या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के आधार पर डिजाइन पर्याप्त नहीं होता; सही साइट-अध्ययन, इंजीनियरिंग विवेक और स्थानीय परिस्थितियों की समझ भी आवश्यक होती है।
तीसरे संस्करण की प्रमुख विशेषता सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक इंजीनियरिंग के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास है। इसमें योजना एवं इंजीनियरिंग जाँच से लेकर भू-तकनीकी तथा संरचनात्मक डिजाइन, पाइल लोड टेस्ट, निर्माण, गुणवत्ता आश्वासन, निरीक्षण, मर्मत-संभार (maintenance) और पुनर्स्थापना तक पुल की नींव के लगभग पूरे जीवन-चक्र को समाहित किया गया है। चित्रों, तालिकाओं, फ्लोचार्ट और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विषय को विद्यार्थियों तथा कार्यरत इंजीनियरों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाया गया है।
पुस्तक का शैक्षणिक महत्व भी उल्लेखनीय है। इसे त्रिभुवन विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग अध्ययन संस्थान (IOE) में स्नातक स्तर की इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए संदर्भ पुस्तक (reference book) के रूप में अपनाया गया है। पाइल फाउंडेशन के मूल सिद्धांतों से लेकर इंजीनियरिंग इन्वेस्टिगेशन, डिजाइन, लोड टेस्टिंग, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, निरीक्षण, मर्मत-संभार, पुनर्स्थापना, और राष्ट्रिय एवं अन्तर्राष्ट्रिय पुल-विफलताओं के केस स्टडी तक इसकी विषय-वस्तु विद्यार्थियों के साथ-साथ परामर्शदाताओं, निर्माण व्यवसायियों, सरकारी इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों के लिए उपयोगी है।
भोटेकोशी की हालिया बाढ़ ने इस विषय की उपयोगिता को और स्पष्ट किया है। प्रारंभिक वैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और भूकंप (Earthquake) के कारण बर्फ और चट्टान के बड़े पैमाने पर स्खलित होने से उत्पन्न मलबायुक्त बाढ़ ने नदी के निचले क्षेत्रों तक व्यापक नुकसान पहुँचाया। ऐसी घटनाएं यह रेखांकित करती हैं कि पुलों के डिजाइन में केवल सामान्य बाढ़ की गणना पर्याप्त नहीं है। नदी की बदलती प्रकृति, बाढ़ का व्यवहार, नींव की गहराई, कटाव (scour), भू-तकनीकी परिस्थितियाँ, निर्माण गुणवत्ता, निरीक्षण, मर्मत-संभार और पुनर्स्थापना पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक है।
भोटेकोशी आपदा से नेपाल के लिए एक व्यापक सीख भी सामने आती है। देश ने सड़क, पुल, जलविद्युत और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में दशकों का अनुभव अर्जित किया है, लेकिन परियोजनाओं से प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव का पर्याप्त दस्तावेजीकरण तथा संस्थागत उपयोग अभी भी आवश्यक है। पुलों की विफलताओं, नदी के बदलते व्यवहार, कटाव (scour), भू-तकनीकी जोखिम तथा जलवायु एवं पर्वतीय आपदाओं का व्यवस्थित अध्ययन भविष्य की परियोजनाओं को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने में सहायक हो सकता है।
आज जब नेपाल को नए पुलों और सड़कों के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा संरचनाओं की सुरक्षा, टिकाऊपन और आपदा-प्रतिरोधक क्षमता पर भी ध्यान देना है, Pile Foundation for Bridges का तीसरा संस्करण एक समयानुकूल प्रकाशन के रूप में सामने आया है। पुस्तक इस मूल इंजीनियरिंग तथ्य को रेखांकित करती है कि सुरक्षित और टिकाऊ पुल की शुरुआत मजबूत नींव, सही साइट-अध्ययन, उचित हाइड्रोलॉजिकल एवं हाइड्रोलिक आकलन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण तथा निरंतर निरीक्षण से होती है।
पुस्तक के बारे में अधिक जानकारी के लिए: www.tanuklalyadav.com




