खेल के मैदान में नेपाल का बढ़ता कदम और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी : कृतिका यादव

कृतिका यादव, 23 सितंबर।अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर जब-जब नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज लहराता है, हर नेपाली का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। जापान में इन दिनों आयोजित हो रहे 20वें एशियाई खेल (एशियन गेम्स) खेल प्रेमियों के लिए आकर्षण और उत्साह का सबसे बड़ा केंद्र बने हुए हैं। राष्ट्रीय खेल परिषद (NSC) के अनुसार, इस बार नेपाल की ओर से 21 विभिन्न खेलों में कुल 135 एथलीट अपनी पूरी ऊर्जा और प्रतिभा के साथ मैदान में उतरे हैं।
*महिला कबड्डी टीम की ऐतिहासिक सफलता और अन्य खेलों का प्रदर्शन*
इस महाकुंभ में सबसे खास और प्रेरणादायक प्रदर्शन हमारी महिला कबड्डी टीम का रहा है। एशियाई मंचों पर अपनी धाक जमाते हुए, नेपाल की महिला टीम ने थाईलैंड के खिलाफ शुरुआती बाधाओं को पार कर 46-43 से एक रोमांचक और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पहले हाफ में पिछड़ने के बावजूद, जिस तरह से टीम ने दूसरे हाफ में शानदार वापसी की और 31 अंक बटोरे, वह उनके अटूट जज्बे और कभी हार न मानने वाले हौसले को दर्शाता है। इससे पहले हांग्जो एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली यह महिला टीम एक बार फिर देश के लिए पदक की सबसे बड़ी उम्मीद बन गई है। कबड्डी के साथ-साथ तैराकी, मुक्केबाजी, कराटे, स्क्वैश, टेबल टेनिस और वुशु जैसे कठिन खेलों में भी हमारे खिलाड़ी पूरी शिद्दत के साथ कड़ा मुकाबला कर रहे हैं। हेड कोच पार्वती राई के मार्गदर्शन में टीम का यह उच्च मनोबल पूरे देश के युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा है।
खिलाड़ियों की चुनौतियाँ और आत्मविश्लेषण
तथापि, इन शानदार पलों के बीच हमें यह आत्मविश्लेषण भी करना होगा कि क्या हमारे खिलाड़ियों को वह आधारभूत ढांचा, आधुनिक प्रशिक्षण और वित्तीय सुरक्षा मिल पा रही है, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं? देश में खेल प्रतिभाओं की कभी कोई कमी नहीं रही है; कमी रही तो सिर्फ उचित दिशा-निर्देश, दीर्घकालिक नीतियों और जमीनी स्तर पर ध्यान देने की।
*विद्यालयीय स्तर से खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता*
इस दिशा में बदलाव की शुरुआत हमें अपने विद्यालयों से करनी होगी। बच्चों और युवाओं के मन में खेल के प्रति रुचि जगाने के लिए स्कूलों में खेलकूद को केवल एक विषय नहीं, बल्कि प्राथमिकता देनी होगी। यदि हम प्राथमिक कक्षाओं और विद्यालयों से ही खेल अकादमियों का विकास करें, विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाएं और खेल संस्कृति को बढ़ावा दें, तो ग्रामीण और शहरी अंचलों से अनगिनत छुपी हुई प्रतिभाएं देश का भविष्य संवारने के लिए आगे आएंगी। जब तक हम स्कूली स्तर पर बच्चों को नहीं तराशेंगे, तब तक वैश्विक मंचों पर स्थायी सफलता पाना कठिन होगा।
*निष्कर्ष*
एशियाई खेलों में उतरी हमारी यह युवा पीढ़ी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि तमाम संघर्षों और सीमित संसाधनों के बावजूद नेपाली खिलाड़ियों के हौसले बुलंद हैं। जरूरत इस बात की है कि हम केवल जीत के क्षणों का जश्न मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि सरकार, विद्यालय प्रबंधन और खेल निकायों को मिलकर एक मजबूत और पारदर्शी कार्ययोजना तैयार करनी होगी। यदि हम अपने बच्चों और युवाओं को सही मंच, प्रोत्साहन और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर सकें, तो वह दिन दूर नहीं जब नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज खेल जगत के सर्वोच्च शिखरों पर शान से लहराएगा और देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन होगा।


