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ओली का राजीनामा खुशखबरी या प्रचण्ड का नेतृत्व ?

 

मालिनी मिश्र, २६ जुलाई, काठमाण्डू ।

प्रचण्ड के नेतृत्व में बनने को तैयार अब आने वाली सरकार क्या भारत के पुराने प्रभाव को कायम करेगी ? अभी हाल फिलहाल भारतीय समाचार पत्र में ओली के राजीनामें के साथ ही एक टिप्पणी की थी ।

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राजनीति के इस खेल में कभी किसी पार्टी की सत्ता होती है तो कभी किसी व सत्ता बदलने के साथ ही व्यक्तिगत सोच का प्रभाव पडना लाजिमी है पर इसका प्रभाव देशों के कूटनीतिक संबंधों के बीच में लाया जाए तो यह तो किसी भी देश के लिए थोड़ी समस्यात्मक स्थिति हो सकती है । वह चाहे भारत हो या नेपाल या चीन व विकसित देश अमेरिका । जब तक एक देश किसी दूसरे देश को व्यक्तिगत या वैदेशिक संबंधों में पड़कर हस्तक्षेप न करने दे तो दूसरा देश किसी भी तरह हस्तक्षेप नही कर सकता है । वह चाहे निकटवर्ती देश भारत ही क्यों न हो ।

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देखना है कि आने वाली सरकार किस देश के साथ कैसा संबंध बनाती है । ये वैदेशिक मामला है और इसका असर देश की आन्तरिक स्थिति पर भी निःसन्देह पड़ता है क्योंकि नेपाल कई मायनों में परनिर्भर देश है । चीन हो या भारत नेपाल अभी जैसी स्थिति में है उसे हर एक देश की सहायता व सहयोग की आवश्यकता है । सरकार तो किसी की पार्टी की बने उद्देश्य, मात्र नेपाल का विकास होना चाहिए ताकि नेपाली जनता भस् समृद्धि और संतुष्टि का स्वाद चख सके ।

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