काठमांडू के लौनचौर स्थित भारतीय राजदूतावास द्वारा ६८वें गणतन्त्र दिवस

काठमांडू, जनवरी, २७ |काठमांडू के लौनचौर स्थित भारतीय राजदूतावास के परिसर में २६ जनवरी को एक भव्य समागम के बीच भारत के ६८वें गणतन्त्र दिवस विविध कार्यक्रमों के साथ मनाया गया । मौके पर भारतीय राजदूत रंजित राय ने झण्डोत्तोलन किया तथा भारतीय राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने देश के नाम पर दिए सन्देश को वाचन किया । सन्देश में पड़ोसी मुल्क की शांति और स्थायित्व पर भी प्रकाश डाला गया था ।
अवसर पर राजदूत रंजित राय ने नेपाल के दुर्गम एवं सुगम स्थानों के ६० शैक्षिणिक संस्थानों एवं प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों को पुस्तकें भेंट दी । इसी प्रकार नेपाल के विभिन्न जिलों में अवस्थित अस्पतालों, परोपकारी संस्थाओं तथा शैक्षणिक संस्थानों को २० एम्बुलेंस और ४ बसें तथा २८ जिलों के विभिन्न शैक्षणिक तथा कल्याणकारी संस्थाओं को ११८ बसें भी प्रदान की । भारत ने सन् १९९४ से लोकर अभी तक नेपाल के ७३ जिलों में अवस्थित विभिन्न संस्थाओं को ६०२ एम्बुलेन्स प्रदान कर चुके हैं ।
अवसर पर केन्द्रीय विद्यालय, इंडियन मॉर्डन स्कूल एवं भारतीय सांस्कृतिक केन्द्रों के विद्यार्थीयों एवं कालाकारों ने राष्ट्रभक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं । इसी प्रकार मणिपुर के सांस्कृतिक टीमों के द्वारा ‘मणिपुर रासलीला’ एवं ‘लोक नृत्य’ की शानदार प्रस्तुति दी गई ।

ध्यातव्य है कि १५ अगस्त, १९४७ में भारत स्वतन्त्र होने के बाद भारत के प्रत्येक नागरिक को समान माना जाये, उन्हें तमाम सुविधाएं मुहैया करवायी जाएं और देश को चलाने में सबकी भागीदारी हो । इसे सुनिश्चित करने के लिए भारत में एक सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष डॉ. भमिराव अम्बेडकर बने । उनकी देख–रेख में सदस्यों के द्वारा २ साल, ११ महीने और १७ दिन के निरंतर शोध के बाद एक नियमावली तैयार की गयी, जिसका नाम दिया गया ‘संविधान’ । इसमें यह स्पष्ट रुप से बताया गया कि इस पुस्तिका में लिखे नियम के अनुसार भारत के नागरिकों की देखभाल की जाएगी । इसके लिए एक व्यवस्था होगी– लोकतान्त्रिक व्यवस्था । इस तरह देश के नियम–कानून की यह पुस्तक २६ जनवरी, १९५० को भारतवासियों को सर्पित किया गया । इसी दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने । तब से लेकर अब तक हर साल उल्लास के संग २६ जनवरी को गणतन्त्र दिवस के रुप में मनाया जाता है ।

