Wed. Apr 1st, 2020

बहुत जल्द टूटेगा मधेश का चक्रव्यूह : मुकेश झा

एक मत बराबर एक मत एवम् मधेशी, आदिवासी जनजाति की एकता नेपाल के चक्रव्यूह पर विजय प्राप्त करने का अचूक अस्त्र है, लेकिन कौरव रूपी नेपाल के शकुनि रूपी नेतागण इसे इतनी आसानी से होने नहीं देगा ।

नेपाली सत्ता का विभेद एवम मधेशवादी राजनैतिक दलों के अंतरकलह को आधार बना कर नेपाल से मधेश को अलग करने की बात भी चक्रव्यूह का एक घेरा है । बांकीयूह के घेरे ने तो मधेशी पहाड़ी को अलग किया परंतु विखण्डन केयूह ने मधेश को भी दो भागों में बांट दिया । जिनको नेपाली सत्ता से असंतुष्टि थी उन्होंने मधेशवादी पार्टीयों पर उम्मीद लगाई पर मधेशवादी पार्टियों के सत्ता मोह से क्षुब्ध हुएयक्तियों का झुकाव विखण्डन की ओर हुआ । ऐसे विखण्डन के समर्थक को वर्तमान में सत्ता साझेदार की गलतियों से ज्यादा मधेशवादी पार्टियों की गलती दिख रही है । क्योंकि जिनसे उम्मीद रहती है अगर वह उम्मीद टूटती है तो इंसान चोटिल हो जाता है और अपना पराया भूल जाता है जिससे अंततः अपने को भी कष्ट होता है । विखण्डन का आंदोलन भले ही आंदोलनकारी की तरफ से शान्तिपूर्वक करने की घोषणा हो पर इस आंदोलन में मधेश के होनहार युवाओं का भविष्य देशद्रोह के मुकदमे में पड़कर बर्बाद हो रहा है । आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से विखण्डन की बात करे पर क्या सरकार कोई दमन की नीति नहीं लेगी ? कुल मिलाकर यह विखण्डन की आवाज मधेश को द्वंद्व में धकेलने कायूह है ।
राज्य का चौथा अंग कहलाने वाली मीडिया का नश्लीययवहार भी चक्रव्यूह का एक घेरा है । सत्ताधारी पार्टियों के वफादार को सरकार की गलतियां कैसे दिखाई देगी ? मधेश के ऊपर हुए अत्याचार की घटना से विश्व को अनभिज्ञ रखना, तोड़ मरोड़ कर तथ्य को परोसना, मधेश के विरुद्ध झूठा और तथ्यहीन समाचार सम्प्रेषण करना पालतू मीडिया एवम् राष्ट्रीय मीडिया दोनों का परम कर्तव्य है । दुनिया को गुमराह करने की जिम्मेदारी को पूरी लगन और मेहनत के साथ पूरा करके नेपाल सरकार द्वारा तक्मा प्राप्त करना ही नेपाल के नश्लीय मीडिया का लक्ष्य बन गया है ।
इस तरह के कई घेरों के चक्रव्यूह में फंसा मधेश अब मुक्ति की राह देख रहा है । महाभारत के युद्ध के समय जब चक्रव्यूह की रचना की गई तो चक्रव्यूह के पूर्ण जानकार अर्जुन कृष्ण और प्रद्युम्न कहीं और युद्ध कर रहे थे, उन्हें जानकारी भी नहीं थी कि चक्रव्यूह की रचना की गई है, जिससे चक्रव्यूह का अधूरा ज्ञान रखने वाला सुभद्रा नन्दन अभिमन्यु को उसमें जाना पड़ा और अपनी जान गंवानी पड़ी । परन्तु नेपाली सत्ता द्वारा बनाए गए चक्रव्यूह के बारे में मधेशी को जानकारी है इसलिए अब मधेश को उस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अधूरी तैयारी के साथ अभिमन्यु को नहीं बल्कि पूर्ण तैयारी के साथ अर्जुन, कृष्ण, प्रद्युम्न को आगे आना होगा जिससे इसयूह को ध्वस्त किया जा सके ।
एक मत बराबर एक मत एवम् मधेशी, आदिवासी जनजाति की एकता नेपाल के चक्रव्यूह पर विजय प्राप्त करने का अचूक अस्त्र है, लेकिन कौरव रूपी नेपाल के शकुनि रूपी नेतागण इसे इतनी आसानी से होने नहीं देगा । कभी पहाड़ की विकटता को दिखायेगा, तो कभी हिमाल की ऊँचाई को । अब कहीं की विकटता को दिखाकर कहीं के अधिकार को कटौती करना कहाँ का न्याय है ? मधेशी जनता बराबर का मताधिकार माँग रही हैं, अपने लिए समान कानून माँग रही हैं तो क्या गलत कर रही है ? मधेशियों का कहना है कि प्रधानमंत्री चुनते वक्त एक सांसद का एक मत ही होता है तो पहाड़ की जनता का एक मत बराबर मधेश की जनता का चार मत क्यों ?
सत्ताधारी को जब जैसा कानून से फायदा होने वाला हो दुर्योधन की तरह वैसा कानून लादते चला जा रहा है । जिसका ताजा उदाहरण है ‘सरकार बनाने के लिए बहुमत और संशोधन के लिए दो तिहाई’ का प्रावधान । । एक ही संसदीय प्रक्रिया के लिए दो तरह का कानून क्यों ? या तो बहुमत रखे या दो तिहाई, यही मधेशी जनता की माँग है । इसके साथ–साथ जनसंख्या और स्रोत के अनुपात में बजट विनियोजन हो भी रही हैं । पर वास्तविक माँग को अनसुनी करके धृतराष्ट्र बने सरकार का कौरव पक्षीय चक्रव्यूह ध्वस्त होगा, क्योंकि इस चक्रव्यूह में अर्जुन, कृष्ण, प्रद्युम्न और अभिमन्यु साथ प्रवेश करेंगे और विजयी होंगे ।

 

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