Tue. Jul 14th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

नेपाल को अपनी सोंच में परिवर्तन लाना चाहिए : डा.महेन्द्र पी लामा

 

 

जवाहरलालनेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली के प्राध्यापक तथा नेपाल-भारत सम्बन्ध पुनर्माजित करने के लिए गठित प्रबुद्ध समूह के सदस्य डा.महेन्द्र पी लामा ने कहा कि नेपाल को अपनी सोंच में परिवर्तन लाना चाहिए | टोकियो  स्थित इचिगाया के चुकुबा विश्वविद्यालय ने रविवार को नेपाल-भारत सम्बन्ध और १९५० की सन्धि पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया ग्या | इसमें दोनों देशों के सम्बन्ध को और उचाई पर लेजाने पर जोड़ दिया गया |

कार्यक्रम में जवाहरलालनेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली के प्राध्यापक तथा नेपाल-भारत सम्बन्ध पुनर्माजित करने के लिए गठित प्रबुद्ध समूह के सदस्य डा.महेन्द्र पी लामा ने कहा कि नेपाल अपनी शक्ति को नही पहचान पाया है | भारत और  चीन के बीच नेपाल की  महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है ।

यह भी पढें   गणेश नेपाली आत्मदाह – जाँच समिति का गठन

पी लामा ने कहा कि नेपाल को चाहिए कि  १९५० की संधि की जो जो बूंदा नेपाल को पसंद नही है वः लिखित रूप में पेश करें |लेकिन नेपाल नही कर पा रहा है | उनका कहना था कि भारत चाहता है कि नेपाल से उसका सम्बन्ध प्रगाढ रहे | भारत नेपाल की शक्ति को पहचानता है | नेपाल भारत और चीन के वीच का सैण्डविच है उन्होंने कहा कि नेपाल सैंडविच के बिच का बटर है | बटर नही रहे तो सैंडवीच स्वादिष्ट नही होता है | उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल को अपनी सोच में परिवर्तन करके नेपाल भारत और चीन के बिच में अपनी भूमिका दिखानी चाहिए | उन्होंने यह भी कहा कि १९५० की संधि से दोनों देशों को फैदा भी होरहा है | किस किस असहमति के बूंदा को परिवर्तन किया जाय यह नेपाल की ओर से अभी तक पेश नही किया जा रहा है |

यह भी पढें   बालेन सरकार के सौ दिन का कार्यकाल असफल-राजेन्द्र महतो

चुकुवा विश्वविधालय के ही सह-प्राध्यापक डा. कमल लामिछाने ने१९५० की मैत्री सन्धि की कुछ बुँदा  राणा शासन की सत्ता टिकाने के लिए बनाया गया था | उन्होंने कहा कि नेपाल का डिप्लोम्याटिक च्यानलमजबूत बनाना पड़ेगा |

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *