Fri. Jul 10th, 2020

आतंकवादी संगठन से आवद्ध थे खुर्सिद, इण्डियन मुजाहिद्दीन को दिलाए थे नेपाली नागरिकता

काठमांडू, २३ सितम्बर । नेपाल सरकार द्वारा शहीद घोषित सुनसरी जिला भुटाहा–५ निवासी खुर्सिद आलम अन्सारी आंतकवादी संगठन से आवद्ध थे, जिन्होंने इण्डियन मुजाहिद्दीन को नेपाली नागरिकता दिलाया था । गत बिहीबार खुर्सिद अज्ञात समूह की गोली प्रहार से मारे गए । इधर नेपाल में विश्लेषण हो रह है कि खुर्सिद को भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने ही गोली मार कर हत्या की है । इस तरहका आरोप लगानेवाले ही कहते हैं कि खुर्सिद आतंकवादी संगठनों से मिलकर जाली भारतीय रुपयां और अवैध हथियार का भी कारोबार करते थे ।
एक बात तो पुष्टि हो चुका है कि सन् २००८ में भारतीय शहर दिल्ली, गोरखपुर, फैजावाद, लखनउ, बनारस, जयपुर अहमदावाद में हुए श्रृंखलाबद्ध बम बिस्फोट में आतंकवादी संगठनों का हाथ है, और उस आतंकवादी संगठनों से खुर्सिद भी संलग्न थे । अनुसंधान से पता चला है कि दिल्ली बिस्फोट में संलग्न आतंकवादियों के साथ नेपाली नागरिकता था, आतंकवादी सुनसरी जिला से प्राप्त नागरिकता और पासपोर्ट लेकर दिल्ली पुहँचे थे । और आतंकवादियों को नागरिकता दिलाने का काम खुर्सिद ने ही किया था ।
जब इस रहस्या का फर्दाफास हुआ तो भारतीय सुरक्षा अधिकारियों ने खुर्सिद को भारतीय सुरक्षाकर्मी समक्ष सुपुर्दगी करने के लिए कहा । भारतीय दूतावास की ओर से नेपाल सरकार को भी आग्रह किया गया, लेकिन नेपाल सरकार ने खुर्सिद को भारत समक्ष सुर्पदगी नहीं किया । इसी तथ्य को जोड़कर आज विश्लेषण हो रहा है कि खुर्सिद को सुपुर्दगी न करने के कारण ही भारतीय सुरक्षाकर्मी नेपाल घूस कर उनकी हत्या कर दी ।
खैर ! बात जो भी हो, खुर्सिद का संबंध अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के साथ जुड़ा हुआ था, यह बात पुष्टि हो चुका है । अनुसंधान से पता चला है कि वि.सं. २०६६ साल में सुनसरी जिला प्रशासन कार्यालय से डा. सहनवाज वादा साजिद ने सहनवाज मियाँ के नाम से नेपाली नागरिकता लिया । इसीतरह अबु रसिद ने मोहम्मद अहमद हुसैन मियां के नाम से, सलमान सेख ने मोहम्मद फहद अन्सारी के नाम से, मोहम्मद खालिद ने इर्शाद अलाम अन्सारी के नाम से नेपाली नागरिकता लिया । सहनवाज वादा साजिद और अहमद हुसेन को नागरिकता दिलाने के लिए नरसिंहपुर निवासी मोहम्मद समिम मियाँ पिता बने थे । इर्शाद अलाम अन्सारी और फहद अन्सारी को नागरिकता दिलाने के लिए मिसर मियाँ पिता बने थे । लेकिन यह सब फर्जी कागजात तैयार कर किया गया था । उन लोगों को इस तरह नागरिक दिलाने के लिए खुर्सिद ने ही सहयोग किया था । इसतरह नेपाली नागरिकता प्राप्त करनेवाले ही सन् २००८ में भारत में हुए श्रृंखलावबद्ध बम बिस्फोट में सहभागी हुए थे, जो आतंकवादी संगठन में आबद्ध थे ।
भारतीय रिसर्च एण्ड एनालाईसिस विङ (रअ) ने नेपाल पुलिस को सन् २०१५ जनवरी २३ में एक पत्र लिख कर इसके बारे में अनुसंधान करनेके लिए कहा । जब गृह मन्त्रालय ने छानबीन किया तो तब पता चला कि उन चारों ने फर्जी नाम से नागरिकता लिया है । नागरिकता दिलानेवाले प्रशासन के कर्मचारी तथा उसके लिए सहयोग करनेवाले खुर्सिद को सरकार ने कारवाही नहीं किया । खुर्सिद द्वारा संरक्षित सहनाज वि.सं. २०७१ में भारतीय शहर कानपुर से गिरफ्तार हुए, उस वक्त उनके पास से नेपाली पासपोर्ट मिला । जब इण्डियन मुजाहिद्दीन के अब्दुल सुभान कुरैसी और आरिज खान काठमांडू में गिरफ्तार हुए, उसके बाद थप स्पष्ट हो गया कि खुर्सिद ने अपने ही घर में रखकर उन लोगों को नेपाली नागरिकता दिलाया था ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: