मेरे जज्बातों की कुण्डी खटखटाया ना करो । तपती रेत सी जलने दो मुझे : पूजा बहार
‘ पूजा बहार ‘
यूँ आश के दीपक जलाया ना करो ,
मुझे सब कुछ भूल जाने दो ,
मेरे ख़्वाबों ..ख्यालातों में
यूँ बार . .बार आकर ,
मेरे जज्बातों की कुण्डी खटखटाया ना करो ।
तपती रेत सी जलने दो मुझे ,
अपनी मीठी ..मीठी बातो का तुषार ,
मेरे लहकतें धधकतें
मन कें आंगन में बरसाया ना करो ।
यूँ आश .. …. ….. … …..!
बिरान खण्डहर सा मेरा आशियां ,
खामोशीयों की सरगोशियां ,
टेढ़ी ..मेढ़ी ,ऊबड. ..खाबड़
मेरी रास्ते की पगडंडियाँ ,
ना मंजिल है कोई ना ही कोई कारवाँ ,
हर पल सोचती हूँ
किसकें लिए जीती हूँ ,
मुझे यायावरो सा
यहाँ ..वहां बेवजह भटकते रहने दो ,
पल दो पल का रहनुमा बनकर ,
मेरी उँगलियों को पकड़कर ,
यूँ रास्ता दिखाया ना करो !
यूँ आश ….. ….. …… ….!
मैं तन्हा हूँ तों मुझे तन्हा ही रहने दो ,
यूँ बार …बार साथ देकर ,
हरपल अपनी मौजुदगी का
एहसास कराया ना करो ।
माना की किसी शिथिल नदी सी हूँ मैं ,
चुपचाप , मौन ठहरी सी ,
ना ही बहाव है ना ही उमंग ,
अपनत्व का कंकरकँटीर्ता मार ..मार कर ,
मेरे दिल में हलचल मचाया ना करो ।
यूँ आश …. …… …….. …..!
यूँ बार बार मेरे करीब आकर
अपनी ख़ुशबू से मेरी सांसो को महकाया ना करो ,
देखो पहले ही बहुत परेशां हूँ मैं ,
कसम है तुमको ,
मेरी मुश्किलों को और बढाया ना करो । ‘


