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समर्थन को लेकर मधेशी मोर्चा में विवाद, मोर्चा में विभाजन के संकेत

 

प्रधानमंत्री चुनाव में अब महज कुछ घण् ही बच गए हैं लेकिन अभी तक सत्ता समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करने वाली मधेशी मोर्चा ने अपने तरफ से समर्थन को लेकर कोई भी निर्णय कर पाने में अभी तक असफल रही है। मोर्चा के नेताओं द्वारा आज दिन भर इस विषय पर माथापच्ची करने के बाद भी अन्तिम निर्णय में नहीं पहुंच पाई।

समझा जा रहा है कि समर्थन को लेकर मधेशी मोर्चा में विवाद उत्पन्न हो गया है। यद्यपि मोर्चा के नेताओं ने विवाद के खबर का खण्डन करते हुए मोर्चा में विभाजन से साफ इंकार किया है। मोर्चा की आज हुई बैठक के बाद उन्होंने कल दावा किया है कि मोर्चा इस विषय पर एक मत होकर कल लोई निर्णय किए जाने की बात बताई है।

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मधेशी मोर्चा ने प्रधानमंत्री पद पर समर्थन देने के लिए निर्णय करने का अधिकार मोर्चा से आबद्ध सभी पांच दल के अध्यक्षों को सौंपी गई है।

मोर्चा के नेताओं द्वारा लाख दावा किए जाने के बावजूद मोर्चा में विभेद की खबरों को नकारा नहीं जा सकता है। मोर्चा के कुछ घटक कांग्रेस के समर्थन में सरकार बनाने के पक्ष में है जबकि कुछ दल डॉ बाबूराम भट्टराई को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में निर्णय किए जाने का दबाब डाल रहे है।

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बाहर आ रही खबरों के मुताबिक मोर्चा से आबद्ध तमलोपा और फोरम लोकतांत्रिक कांग्रेस के पक्ष में है जबकि फोरम गणतांत्रिक और सदभावना माओवादी के डॉ बाबूराम भट्टराई को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में दिखते हैं। इसी बीच फोरम गणतांत्रिक के अध्यक्ष जेपी गुप्ता ने आज माओवादी द्वारा सार्वजनिक किए गए शान्ति प्रक्रिया और संविधान निर्माण संबंधी अवधारणा को सकारात्मक बताते हुए उसके पक्ष में जाने की ओर इंगित भी किया था।

इसके अलावा कुछ अन्य छोटी मधेशी पार्टी है जो कि माओवादी के पक्ष में दिखती है। उपेन्द्र यादव के नेतृत्व में रही फोरम नेपाल ने पहले ही माओवादी के पक्ष में समर्थन देने का संकेत दे चुकी है तो सरिता गिरि की नेपाल सद्भावना पार्टी पहले से ही माओवादी के पक्ष में है।

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एमाले के कांग्रेस के तरफ झुकाव होने के कारण सत्ता का समीकरण बदलने के लिए मधेशी मोर्चा की काफी अहम भूमिका रहने वाली है। इस समय कुछ अन्य छोटी पार्टियों को मिलाकर मधेशी मोर्चा के पास कुल ८२ सभासद हैं जो कि किसी भी उम्मीद्वार के पक्ष में जाने से उसकी जीत सुनिश्चित हो सकती है।

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