Fri. Nov 16th, 2018

’80 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा के कारण तलाक के रास्ते पर जाने के लिए विवश होती हैं।

नई दिल्ली. एमबीए की पढ़ाई कर चुकी सपना ने सपना देखा था कि शादी के बाद भी वह नौकरी करती रहेगी और पति को सहयोग देगी। शादी हुई। जिंदगी बदली। लेकिन कुछ महीनों बाद ही सपना के पति ने उसकी नौकरी छुड़वा दी। लेकिन सपना ने नौकरी करने की जिद नहीं छोड़ी। आखिर में रिश्ता इतना बिगड़ा कि बात तलाक तक पहुंच गई और दोनों अलग हो गए।

यह सिर्फ एक सपना की कहानी नहीं है। देश में तलाक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार तो अजीबोगरीब वजह बताते हुए तलाक मांगा जाता है। वैसे, शारीरिक हिंसा तलाक का सबसे बड़ा कारण है। जबकि शादी के बाद भी पर पुरुष या स्त्री से शारीरिक संबंध, नशे की लत, जीवन साथी  को लेकर बहुत अधिक पजेसिव (उस पर अधिकार जमाना) होने जैसे कारण भी रिश्तों में दरार के लिए जिम्मेदार हैं।

मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, जैसे महानगरों में तलाक की जो दर है, वह छोटे शहरों से कहीं ज़्यादा है। मुंबई और दिल्ली जैसे महानगर तलाक की ‘राजधानी’ बनकर उभर रहे हैं। एक आकलन के मुताबिक इन दोनों शहरों में हर साल 10 हजार से अधिक तलाक होते हैं। जबकि देश में होने वाली हर 100वीं शादी का अंत तलाक पर जाकर होता है। केरलाज मेंटल ब्लॉक रिपोर्ट के अनुसार, ‘देश की कुल आबादी में तलाक का प्रतिशत 1.1 है तो केरल में यह दर 3.3 फीसदी है। केरल सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है। यहां पिछले एक दशक में तलाक की दर 350 फीसदी बढ़ी है। जबकि कृषि आधारित राज्य, पंजाब और हरियाणा में एक दशक में 150 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है।’ राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बीते पांच-छह सालों में तलाक की दर सौ फीसदी बढ़ गई है।

‘उद्योग’ बना तलाक और दोबारा शादी
देश में तलाक हजारों करोड़ रुपये का ‘धंधा’ बन गया है। तलाक से अब सिर्फ वकीलों की ही चांदी नहीं होती है बल्कि कई वेबसाइट कुछ रकम लेकर तलाकशुदा लोगों के लिए फिर से नए हमसफर खोज रही हैं। तलाकशुदा लोगों के लिए ऐसी ही एक साइट सेकेंडशादी डॉट कॉम चलाने वाले मुंबई के विवेक पाहवा कहते हैं कि हर महीने उनके पास चार हजार कस्टमर आते हैं। यह तादाद कम नहीं है।  Source: dainikbhaskar.com

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