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कानून व्यवसायी क्लब और शंकरलाल केडिया फाउण्डेशन द्वारा कानून व्यवसायियों को सम्मान

काठमांडू, ४ मार्च । कानून व्यवसायी क्लब काठमांडू और शंकरलाल केडिया फाउण्डेशन ने कानून के क्षेत्र में विशेष योगदान देनेवाले विभिन्न व्यक्तित्व को काठमांडू में आयोजित एक समारोह में सम्मान तथा पुरस्कृत किया है । विगत १० साल से जारी इस श्रृंखला अन्तर्गत आइतबार प्रमुख अतिथि तथा सर्वोच्च अदालत के प्रधानन्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा के हाथों उन लोगों सम्मान और पुरस्कृत की गई है ।


स्व. शंकरलाल केडिया स्मृति कानून पुरस्कार से इस वर्ष पूर्व प्रधानन्यायाधीश रामकुमार प्रसाद साह को सम्मानित किया गया है । इसीतरह स्व. शंकरलाल केडिया स्मृति कानून युवा पुरस्कार से शरदप्रसाद कोइराला और स्व. शंकरलाल केडिया उत्कृष्ट पुस्तक लेखन पुरस्कार से वरिष्ठ अधिवक्ता डा. चन्द्रकान्त ज्ञवली को सम्मान किया गया है । कानून पत्रिका में साल भर प्रकाशित लेख–रचनाआें में से उत्कृष्ट लेख रचना पुरस्कार से इस साल (वि.सं. २०७५) १६ स्रष्टा सम्मानित हुए हैं । लेख–रचना पुरस्कार से सम्मानित होनेवाले १६ व्यक्तित्व, पुुरस्कार के संस्थापक निम्नानुसार हैं–


१.
पुरस्कार ः स्व. हजुरआमा उसोदा देवी के स्मृति में स्थापित लगानी प्रवर्धन लेखन कानून पररकार
संस्थापकः अ. रुन्द्र शर्मा÷सम्झना शर्मा
पुरस्कृत लेखक तथा व्यक्तित्वः अ. सज्जनराम भण्डारी
२.
पुरस्कारः शर्मिला अच्युतकान्त सिलवाल वातवारण कानून उत्कृष्ट लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः प्रा.डा. अ. चन्द्र बहादुर बस्नेत
पुरस्कृत लेखक तथा व्यक्तित्वः अ. चन्द्रबहादुर बस्नेत
३.
पुरस्कारः राष्ट्रीयता प्रवर्धन लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. बालकृष्ण न्यौपाने
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः व.व. मोहन बन्जाडे
४.
पुरस्कारः स्व. देवनाथ प्रसाद शर्मा कानून व्यवसायी लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः मा.न्या..स.अ. अनीलकुमार सिंहा
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः सुमन खरेल (कानून के विद्यार्थी)
५.
पुरस्कारः स्व. यज्ञप्रसाद उप्रेती तथा लक्ष्मीमाया उप्रेती, फौजदारी कानून लेखन पुरस्कार
संस्थापकः पूर्व मा.मु.न्या. दुर्गाप्रसाद उप्रेती÷भुवनेश्वरी उप्रेती
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः डा. श्रीप्रकाश उप्रेती
६.
पुरस्कारः नेपाली कानूनी इतिहास तथा प्रणाली, अन्वेषणात्मक लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. लोकभक्त राणा
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः अ. चन्द्रकुमार राई
७.
पुरस्कारः स्व. यज्ञप्रसाद उप्रैती तथा लक्ष्मीमाया उप्रेती, सम्पत्ति कानून लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः प्रधान सम्पादक कानून पत्रिका व.अ. लक्ष्मीप्रसाद उप्रेती÷उषा शर्मा
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः अ. अवतार न्यौपाने
८.
पुरस्कारः स्व. लक्ष्मीमाया उप्रेती, उत्कृष्ट महिला हस्ताक्षर कानुन पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. सभुद्रा सिटौला
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः सविता गोदार थापा
९.
पुरस्कारः स्व. मिनप्रसाद भट्टराई, मिन भट्टराई मानव अधिकार कानून लेखन पुरस्कार
संस्थापकः अ. ऋषिराम भट्टराई
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः अ. अच्युतमणि न्यौपाने
१०.
पुरस्कारः स्व. ताराप्रसाद खरेल न्याय प्रशासन लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. शयाम प्रसाद खरेल
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः मा.न्याय पवन कुमार ओझा
११.
पुरस्कारः स्व. गणेशलाल÷पदमावती निर्भिक लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. पूर्व म.न्या. कमल नारायण दास
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः पूर्व मा.न्या. उद्धव बास्कोटा
१२.
पुरस्कारः श्री कृष्णप्रसाद घिमिरे कानुनी साहितय मसौदा लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. लयर्स क्लब अध्यक्ष कोमल प्रसाद घिमिरे
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः अ. विनय रेग्मी
१३.
पुरस्कारः स्व. पण्डित खगेन्द्रप्रसाद भट्टराई उत्कृष्ट अंग्रेजी लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः अ. रामप्रसाद भट्टराई
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः सुमनराज आचार्य
१४.
पुरस्कारः स्व. विरपल सिंह और आमा स्व. परुलीदेवी धामी मानव अधिकार लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः अ. प्रेमसिंह धामी
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः मा.न्याय टेकनारायण कुँवर
१५.
पुरस्कारः स्व. लक्ष्मण अधिकारी राष्ट्रीय गौरव लेखन कानून पुरस्कार
संस्थापकः अ. राजेन्द्र अधिकारी
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः अ. तुलसी सिंखडा
१६.
पुरस्कारः स्व. खुमानन्द और स्व. मां प्रेमकला ज्ञवाली के स्मृति में नेपाल के संवैधानिक कानुन की विकास में योगदान लेखन पुरस्कार
संस्थापकः व.अ. चन्द्रकान्त ज्ञवाली
पुरस्कृत लेखक÷व्यक्तित्वः डा. महेन्द्रजंग शाह

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सम्मान कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए प्रमुख अतिथि तथा सर्वोच्च अदालत के प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा ने कहा कि संवैधानिक सर्वोच्चता, संविधवानवाद की मूल्यमान्यता अनुसार सर्वोच्च अदालत क्रियाशील हो रही है । विश्वसनीय न्याय सम्पादन पर जोर देते हुए प्रधान न्यायाधीश राणा ने यह भी कहा कि न्यायपालिका के प्रति आम आदमी का आशा और भरोसा रहती है, इसीलिए इसकी गरिमा को कायम रखते हुए कानून व्यवसायियों को कार्य सम्पादन करने की जरुरत है ।

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कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए पूर्व प्रधानन्यायाधिश रामकुमार प्रसाद साह ने कहा कि न्यायाधिशों को निष्पक्षता में प्रतिबद्ध रहने की जरुरत है । उन्होंने कहा कि आज न्यायालय क्षेत्र और कानून व्यवसायी विवादित बनते जा रहे हैं, न्यायमुर्ति इस तरह विवाद में आना दुःखद है । उन्होंने यह भी कहा कि आज सर्वोच्च अदालत में जो प्रधान न्यायाधिश (चोलेन्द्र शमशेर) हैं, उनकी सक्रियता से आम जनता में न्यायालय के प्रति पुनः आशा और विश्वास जगने लगा है ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए महान्याधिवक्ता तथा पूर्व कानून मन्त्री अग्नि खरेल ने कहा कि समाज में कानूनी शिक्षा से अनभिज्ञ जनशक्ति अधिक है, इसीलिए उन लोगों को कानूनी ज्ञान प्रदान कर कानून के क्षेत्र में दक्ष जनशक्ति को बढ़तोरी करनी चाहिए । महान्यायाधीवक्ता खरेल ने यह भी कहा कि न्यायालय और राजनीतियों के बीच कभी–कभार द्वन्द्व और विरोधाभाष की स्थिति दिखाई देती है, जो स्वतन्त्र और निष्पक्ष न्यायपालिका निर्माण के लिए ही होता है ।
इसीतरह नेपाल बार एसोसिएसन के अध्यक्ष शेरबहादुर केसी ने कहा कि देश में जारी नयां कानून के बारे में कई कानून व्यवसायी भी अनभिज्ञ हो रहे हैं, प्रभावकारी न्याय सम्पादन के लिए यह दुःखद बात है । उनका यह भी मानना है कि कानून दृष्टिकोण से आज भी महिला सबसे अधिक पीडित हैं, इसीलिए महिला संबंधी विषय अगर अदालत में पहुँच जाता है तो उसको ३ महीना के अन्दर समाधान करनी चाहिए । अध्यक्ष केसी ने यह भी कहा कि फौजदारी कानून को जल्दबाजी में सम्पादन करते वक्त किसी भी बाहने में किसी को भी अन्याय नहीं होना चाहिए । उनका मानना है कि कई सवाल में न्याय सम्पादन करनेवाले न्यायाधीश को ही आरोपित किया जाता है, ऐसी अवस्था नहीं आनी चाहिए ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए स्व. शंकरलाल केडिया फउण्डेशन के अध्यक्ष अनिल केडिया ने संस्था की सक्रियता और विगत में सम्पन्न सम्मान, पुरस्कार और कानुन के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्व के बारे में जानकारी दिया । अध्यक्ष केडिया ने कहा कि उनके स्व. पिता जी शंकरलाल केडिया द्वारा कानून के क्षेत्र में किए गए योगदान की सम्झना स्वरुप ही उन्होंने पुरस्कारों का स्थापना किया है । उन्होन कहा कि आज राजनीतिक तथा कानूनी क्षेत्र में अधिकारों की बात हो रही है, अगर जिम्मेवारी व्यक्ति अपनी कर्तव्य का बोध करते हैं तो अधिकार भी स्वतः आने लगती है ।

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