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‘क्या सीता नेपाल से थी…. ?’ सन्दर्भ सेमिनार हंसराज कॉलेज : मधुर शर्मा

मधुर शर्मा, दिल्ली | आज देल्ही युनिवेर्सिटी में भारतीय साहित्य वर्तमान,भुत और भविष्य पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया | सेमिनार का आयोज इन्द्रप्रस्त रिव्युअर गिल्ड द्वारा किया गया था | इस अवसर पर जब नेपाल आयीं डा. श्वेता दीप्ति वोल रहीं थी  ‘बाबा पशुपतिनाथ, महात्मा बुद्ध, माँ जानकी की धरती से आई मैं श्वेता दीप्ति आप सभी अपना अभिवादन समर्पित करती हूँ।’

हंसराज कॉलेज में अपने उदबोधन में जब डा. श्वेता दीप्ति ने यह कहा तो मेरी पीछे वाली पंक्ति में बैठी एक लड़की ने अपने साथ बैठी महिला (जो उसकी माँ लगती थी) से पूछा कि ‘क्या सीता नेपाल से थी ?’ वह महिला स्पष्ट उत्तर नहीं दे पाईं। शायद उनको पता नहीं था या उन्होंने उत्तर देना उचित नहीं समझा।

मैं कोई निजी टिप्पणि नहीं करूंगा परन्तु एक टिप्पणि ज़रूर करूंगा। आज सांस्कृतिक बोध कितना कम है समाज में? राम कथा भारतीयों के बहुत बड़े वर्ग की सांस्कृतिक केंद्र है परन्तु हम राम कथा को कितना जानते हैं ? कितने लोग माँ जानकी की कथा जानते हैं?

डॉ श्वेता दीप्ती ने यह भी कहा कि आज युवा अंग्रेजी साहित्य की तरफ़ ज़्यादा झुका हुआ है। यह सत्य भी है। यह बौद्धिक उपनिवेशवाद ही है जो हम बच्चों को हिंदी (या जो भी उनकी मातृभाषा है) नहीं पढ़ने देते और उसे दोयम समझते हैं।

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