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निवेश सम्मेलन सिर्फ सम्मेलन से समृद्धि सम्भव नहीं : लीलानाथ गौतम

हिमालिनी, अंक अप्रील 2019 |नेपाल में वैदेशिक निवेश बढ़ाने के सरकार ने चैत्र १५ और १६ गते काठमांडू में दो दिनों का ‘नेपाल लगानी सम्मेलन’ आयोजन किया । सरकार का नारा है कि ‘समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाल ।’ सत्ताधारी पार्टी से आबद्ध नेता तथा सरकारी अधिकारियाें मानना है कि नारा को मुर्त रुप देने के लिए नेपाल में वैदेशिक निवेश भी आवश्यक है, इसीलिए यह सम्मेलन आयोजन किया गया । सम्मेलन में सहभागी राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यवसायिक क्षेत्रों से कुल १५ आयोजना में निवेश करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त हुई है । इसी तरह और भी १७ आयोजना के लिए आवेदन प्राप्त हुआ है । विशेषतः निवेशकर्ताओं ने विद्युत (ऊर्जा) उत्पादन के क्षेत्र में ज्यादा दिलचस्पी ली है ।

सम्मेलन में चौधरी ग्रुप की ओर से सबसे अधिक ४ परियोजना निर्माण के लिए विभिन्न बहुराष्ट्रीय कम्पनी के साथ सम्झौता किया गया है । चौधरी समूह ने प्रदेश नं. २ में २ सौ मेगावाट क्षमता का सोलार प्लान्ट, जलविद्युत, सिजी लाईफसेल टेलिकम कम्पनी, सार्क ग्रुप अफ मल्टी पर्पोज सेन्टर आदि क्षेत्रों में निवेश के लिए सम्झौता किया है । इसीतरह अरुण–३ जलविद्युत आयोजना, अपर तामाकोशी जलविद्युत आयोजना निर्माण के लिए भी सम्झौता हुआ है । लगभग ४० देशों से आए व्यवसायिक प्रतिनिधि और ६ सौ से अधिक व्यवसायी सहभागी सम्मेलन में सरकार की ओर से ५० और निजी क्षेत्र की ओर से २ दर्जन से अधिक परियोजना पेश की गई थी । उसमें से १५ परियोजना के लिए निवेश जुट पाया है । समग्र में देखा जाए तो सरकार की अपेक्षा अनुसार निवेश की प्रतिबद्धता नहीं हुई है, लेकिन जो प्रतिबद्धता की गई है, वह भी कम नहीं है । सम्झौता अगर पूर्ण रूप में कार्यान्वयन हुआ तो यही हमारे लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है ।

निवेश के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त होना और उसको कार्यान्वयन करना बिल्कुल अलग बात है । क्योंकि नेपाल के लिए यह पहला सम्मेलन नहीं है । प्रजातान्त्रिक कालखण्ड के बाद वि.सं. २०७३ फाल्गुन १९ और २० गते आयोजित दूसरे लगानी सम्मेलन में कुल १४ खर्ब के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी । लेकिन तथ्यांक है कि प्रतिबद्धता अनुसार निवेश नहीं आया, उस समय सिर्फ २९ प्रतिशत निवेश ही आया था । इसीलिए इसबार भी कहीं ऐसा न हो, सरकार को इसके प्रति सतर्क रहने की जरुरत है । क्योंकि निवेश के लिए सिर्फ नेपाल ही नहीं, विश्व के कई देश हैं । व्यवसायी जहां अपने को सुरक्षित महसूस करते हैं, वही जाते हैं । निवेश करनेवालों को विश्वास होना आवश्यक है कि उनका निवेश सुरक्षित है । शान्ति सुरक्षा का वातावरण और मुनाफा की सुरक्षा ग्यारेन्टी ना होने तक कोई भी व्यवसायी पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं होते हैं । इसीलिए उल्लेखित वातावरण निर्माण करने की जिम्मेदारी सरकार की है, सिर्फ लगानी सम्मेलन घोषणा करने से और उसमें व्यक्त प्रतिबद्धता से ही समृद्ध नेपाल निर्माण सम्भव नहीं है ।

अगर सुरक्षित वातावरण बन जाता है तो सम्मेलन घोषणा किए बिना भी वैदेशिक निवेश आ सकता है । लेकिन एक बात तो सच है कि सम्मेलन में सहभागी विश्व जगत के व्यवसायियों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि वे लोग नेपाल में निवेश के लिए तैयार हैं । लेकिन उन लोगों के अन्दर आशंका और विरोधाभास भी दिखाई देती है । निजी क्षेत्र संबंधी सरकारी नीति, बार–बार होनेवाला राजनीतिक आन्दोलन तथा बन्द–हड़ताल, अस्थिर सरकार, चन्दा आतंक आदि के कारण नेपाल के कई व्यवसायी पीडि़त हैं, जो विश्वजगत के अन्य व्यवसाय बखूबी जानते हैं । अन्तर्राष्ट्रीय निवेशकर्ताओं को आंशका है कि नेपाल में निवेश करने से हमारा निवेश सुरक्षित तो हो सकता है ? इस प्रश्न का जबाव सरकार को देना होगा ।

सत्ता में शामिल राजनीतिक पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अपनी भाषणबाजी में तो कई बार कहा है कि नेपाल निवेश के लिए सुरक्षित है, लेकिन व्यवहारतः वह पुष्टि नहीं हो पा रहा है । इसीलिए नेपाल निवेश के लिए सुरक्षित जगह है, इस की अनुभूति निवेशकर्ताओं को होनी चाहिए । उसके बाद भी कह सकते हैं कि नेपाल में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां निवेश की अधिक सम्भावना है ।
हम लोगों की अवस्था तो ऐसी है कि अभी तक हमारे लिए वैदेशिक निवेश किस के लिए ? इसी प्रश्न का ठोस जबाव नहीं है । वैदेशिक निवेश को आमन्त्रित करते हैं तो किस–किस क्षेत्र में आमन्त्रित किया जाता है और उसके लिए हमारी नीति क्या होगी ? इसमें भी हम लोग अस्पष्ट हैं । नेपाल के कई राजनीतिक दल के नेता तथा बुद्धिजीवी ऐसे हैं, जो कहते हैं कि नेपाल में वैदेशिक निवेश को आमन्त्रण करने से नेपाल पर–निर्भर हो जाएगा और यहां वैदेशिक हस्तक्षेप बढ़ जाएगा । इसी मान्यता के अनुसार कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता वैदेशिक निवेश वाले कई कम्पनियों के ऊपर बारबार आक्रमण करते आ रहे हैं । ऐसी पृष्ठभूमि में कोई भी विदेशी निवेशकर्ता पैसा लेकर नेपाल नहीं आएंगे । उससे पहले वैदेशिक लगानी को किस–किस क्षेत्र में कैसे परिचालन करना है, इसमें हमारी राष्ट्रीय सहमति आवश्यक है और हमारी आवश्यकता क्या है, उसको पहचान करना जरूरी है । सार्वजनिक समारोह में समर्थन वा विरोध में भाषणबाजी निवेशकर्ता विश्वस्त नहीं हो पाएंगे ।
सरकारी नीति, राजनीतिक कार्यकर्ता के अलवा नेपाल के निजी क्षेत्र, लगानी के लिए तय स्थानीय क्षेत्र में रहनेवाले बासिन्दा आदि क्षेत्रों से वैदेशिक लगानी को स्वागत होना जरुरी है । नहीं तो वे लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते हैं । ऐसे कई सवाल है, जो निवेशकर्ताओं की मन में आशंका पैदा करती है । निवेश के लिए निश्चित क्षेत्र निर्धारण से लेकर नीति नियम में स्पष्टता और सुरक्षित वातावरण ही वैदेशिक निवेश के लिए प्राथमिक शर्त है । नेपाल सरकार, यहां के सभी राजनीतिक पार्टी और निजी क्षेत्र क्या इसके लिए तैयार हैं ? नहीं तो सम्मेलन में प्रतिबद्धता करने से ही निवेश आनेवाला नहीं है ।

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