Tue. Oct 22nd, 2019

ग़र इश्क़ हो महबूब से, तारे जमीं पर ला जरा.. : अनीताशाह

गम जो सहे हँसकर हमेशा होठ पर मुस्कान हो,
हारे नहीं वो हौसला, जब जंग का मैदान हो।

जीते सभी अपने लिए, मरते सभी अपने लिए,
आ दूसरों के काम तू, मुश्किल सदा आसान हो।

रब ने बनाया ये जहां, दिल में जगाया आसरा,
खुर्शीद जैसी रोशनी देते उसी का मान हो।

ग़र इश्क़ हो महबूब से, तारे जमीं पर ला जरा,
माँ को हमेशा प्यार दे, इस बात का भी ध्यान हो।

तैनात सरहद पर खड़े, लड़ते वतन के वास्ते,
बरकत मिले हमको तभी,जब देश की पहचान हो।
*************अनीताशाह

अनीताशाह,

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