Fri. Nov 15th, 2019

हाय हाय सरकार : .बिम्मी शर्मा

 

व्यग्ंय , धोबी जो सभी के गंदे कपडे धोता और प्रेस करता है । पर हमारी सरकार धोबी जैसा अपने देश के नागरिकों का गंदे कपडे तो नहीं धोती पर समय, समय पर धोबी पछाड जरुर देती है । सिर्फ धोबी पछाड ही नहीं देती गर्म, गर्म प्रेस से नागरिकों का दिमाग प्रेस कर के अक्ल ठिकाने ला देती है । इसी लिए तो मीडिया विधेयक से देश के पत्रकारों कों प्रेस कर के तह लगा रही है । और सरकार के मंत्री जो है वह तो धोबी के कुत्ते और गधे बराबर ही हैं । धोबी का कुत्ता घर का न घाट का होता है मंत्री मंडल के कई मंत्री भी न ईधर के है न उधर के । बस अनाप, शनाप बोल कर अपना टाईम पास कर रहे हैं । और ईन के कारण प्रेस और गर्म हो जाता है जो ईनको दागने के लिए हमेशा तैयार रहता है । धोबी तो कपडे कि गदंगी साफ करता है पर ईस देश की सरकार ससंद और सडक दोनों तरफ कचरा फैला रही है । सरकार का सारा ध्यान प्रेस कि तरफ है ।

इसी लिए मीडिया विधेयक लागू कर के वह अपने गर्म प्रेस से पत्रकारों के कपडे और भविष्य दोनों जलाना चाहती है । जैसे धोबी का कुत्ता घाट या नदी पर धोबी के कपडों की सुरक्षा करते हुए भौंकता रहता है । उसी तरह सरकारी प्रवक्ता भी भौंक, भौंक कर प्रेस का ध्यान अपनी तरफ खींचते है । अभी हाल ही में सरकार के ईसी कुत्ते ने गूठी और ईस के संरक्षकों को सामंतवादी कह दिया । तब क्या था गूठी ने अपना गढ ही बना कर विधेयक का ऐसा विरोध किया कि धोबी सरकार विधेयक गूठी को कपडे जैसा पानी में खंगालने लगी । धेबी को कपडे धोने के अलावा और कोई काम आता नहीं । बस हमारे देश की सरकार भी वैसी ही है अपने देश के अवाम को कपडे जैसा महंगाई में धो कर राजस्व के धूप में सुखा देती है ।

और देश के अवाम भी मजे से मेहनत का पसिना बहाते हुए सुख जाती है और उफ भी नहीं करती । उसके बाद यह धोबी सरकार अपने अवाम को कडक प्रेस कर के ऐसे तह लगा कर रखती है कि कडकपन भी शर्मा जाए ।ये इतने कडक हो जाते हैं कि बेचारे हिलडुल भी नहीं पाते । क्यों कि दो तिहाई के धोबी सरकार को अवाम के विरोध से सख्त नफरत है । सरकार चाहती है बस कठपुतली कि तरह मुंडी हिलाने वाली अवाम । पर अवाम तो अपनी आंख और कान भले ही फूट जाए पर दो तिहाई के सरकार का विरोध करना नहीं छोडते । धोबी सरकार हायल, कायल है अपने अवामों के व्यवहार से । ईसी लिए तो धोबी सरकार के सरदार कहते हैं कि मीडिया के संबोधन में उनके प्रति कोई सम्मान नहीं हैं । मीडया उनको तुम कह कर संवोधन करती है और धोबी सरदार चाहते है शाही जी हजूरी वाला संबोधन । यह धोबी सरकार अवाम को कपडे की तरफ संसद के घाट में भले धोती हो पर उसी घाट के पानी में अपना गंदा चेहरा न देख पाती है न धोने का कसरत ही करती है ।

यह धोबी सरकार सब से ज्यादा खफ है मीडया से । ईसी लिए तो मीडिया को अपने नियंत्रण मे रखने के लिए प्रेस काउसिंल विधेयक लागू कर के मीडिया को अपना वफादार कुत्ता और गधा बनाना चाहती है । यह धोबी सरकार को प्रेस इतना पसंद है कि हमेशा प्रेस ही कहती और करती है । एक प्रेस होता है कोयले से जलने और चलने वाला । और दुसरा प्रेस होता है बिजली से जलने और चलने वाला जिसकी आंच और ताप को कम ज्यादा किया जा सकता है । सरकार मीडिया को बिजली से चलने वाला और सरकारी नियंत्रण में रहने वाला प्रेस बनाना चाहती है । जो धोबी सरकार के विरोधियों को तो दागे पर सरकार को न दागे या ठंडा हो जाए । धोबी सरकार को ठंडा प्रेस बहुत ही प्रिय है । खुद पर दागते हुए ठंडा और अपने विरोधियों को गर्म प्रेस से दाग कर परास्त करने का षडंयत्र रच रही है यह धोबी सरकार । दो तिहाई गधों और कुत्तों के बहूमत से बनी यह धोबी सरकार अपने देश के अवामों को भी कीडे, मकोडो से ज्यादा नहीं समझती है । बस इस धोबी सरकार को मीडिया के हाथ मे रखा गर्म कोएले के प्रेस से ही डर लगता है ।

इसी लिए जहाँ भी यह धोबी सरकार जाती है कपडे को पीटने वाले मुंग्री से पत्रकारों को गंदे कपडे कि धुलाई की तरह पीट कर सीधा कर देती है । अभी हाल ही मे एक नगरपालिका के मेयर जिसने पत्रकार के नाक की डंडी तोड्ने कि बात कही थी । तब से सरकार को धोबी पछाड देने के अलावा और कोई काम नहीं आता यह सबको मालुम हो गया था । इसी लिए सरकार संसद और सिंह दरवार दोनों को धोबी घाट बना रही है । दो तिहाई सरकार कें मंत्री बस गधे की तरह ढेंचू, ढेंचू करते रहते है । भारी तो यह क्या उठाएगें, ईनका बोझ भी अवाम ही उठा रही है । गधा जब तक दुब्ला, पतला रहे तभी भारी उठा सकता है पर सरकार के गधे जैसे मंत्री तो भ्रष्टाचार के खेत में हरी घांस खा, खा कर ईतने मोटे हो चूके है कि अपना बोझ भी नहीं उठा पा रहे हैं देश का बोझ खाक उठाएगें ? यह बैशाख नंदन है जो भ्रष्टाचार की हरी दूब पर लोटपोट करने और खाने के लिए ही पैदा हुए हैं ।

क्यों कि गधे का दूसरा नाम बैशाख नंदन है जो बैशाख महीने की हरियाली को ही अपना मानता है । इन्ही बैशाख नदंनों से ही यह देश की दो तिहाई सरकार भरी हुई है और ईनके सरदार तो ढेंचू, ढेंचू मुहावरों के बोझ से अपने मूंह को भर कर रखते है । गधे गाय की तरह जुगाली नहीं करते ईसी लिए गधे हैं गाय नहीं । गधाें को धो कर गाय नहीं बनाया जा सकता है । गाय जरुर गधा बनने की योग्यता रखती है । गधे बस गधे बन कर धोबी सरकार में सामेल हो कर अपने जन्म को कृतार्थ कर रहे हैं । इन गधों को बस सिहं दरवार और बालुवाटार में जा कर चरना है और अपने गधों के सरदार को ढेंचू, ढेंचू करना है । सरकार धोबी तो बन गई पर न देश का मयल धो सकी न अपने ही मन का । बस विरोधियों को परास्त करने और प्रेस को दागने के तानेबाने में ही उलझ कर रह गयी । प्रेस न हुआ जिन हो गया जिस को शीशी मे भर कर रखने के लिए धोबी सरकार के आका बडे बेताब रहते हैं ।

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