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स्वच्छ पर्यावरण – पर्यावरण स्वच्छ होगा, अवश्य होगा : अरुण बागला

अरुण बागला, अपने डाक्टर के पास जाते है, तो वो examine करता है, बीमारी का पता लगाता है और फिर ठीक होने का रास्ता बतलाता है। अब अपने कहते है की पर्यावरण बिगड़ गया, तो क्या बिगड़ गया ? इसका उत्तर सिर्फ सनातन बिज्ञान देता है की पंचतत्व – धरती,जल,अग्नि,वायु एवं आकाश-की पूरी प्रकृति एवं मनुष्य शरीर बनी हुई है-वो बिगड़ रही है। अब इन पंचतत्वों का, इनके गुणों [गंध,रसना,तेजस,स्पर्श,शब्द (ब्रह्म) ] के आधार पर कर पर्यावरण में धीरे-धीरे सुधर होगा। मुझे पर्यावरण को शुद्ध करने का एक मात्र यही तरीका वैज्ञानिक/आध्यात्मिक लगता है।
बिन संगम अध्यात्म के, भौतिक पंगु होय। 
तुलसी जेहि संगम किया, पूर्ण कहावे सोय।। 
 
Sun & Moon are an inseparable part of this prakriti, they have not changed.But there is a layer of protective Ozone some 600 miles above Earth’s surface, which has thinned down, and Global warming is happening. This has to be repaired-being major part in Aakash & Vayu Tatva, it has to be approached with their Guna.
Sun also controls the change of seasons in it’s too & fro journey from Tropic of Cancer & capricorn. Aditya Hrydayam Stotram describes it as:
 
 वायुर्वहिन: प्रजापाण ऋतूकर्ता प्रभाकर :। 
धनवृषिटरपां मित्रो विंध्यवीथी प्लवङ्गम :।।  
 
अब यह स्पष्ट है की सूर्य नारायण ही 6 ऋतुओ को एवं बिशेष कर वृष्टि को नियंत्रित करते है।
As per Ancient Science sun sends Three rays:
गो– For Grazing Cattles
ग्यान– Perceiver of knowledge
आयु– provides Longivity

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Now, scientist of Perdue University, USA have concluded the same, Sun sends THREE TYPES of Rays – detailed below:
1) Visible Spectrum: For animals who graze,cow, camel, horse, sheep etc
2) Near Infrared: For Energy Generation
3) Far Infrared: For Rains
Moon effects the Water element profoundly. (70% of Earth )
आज पाशचात्य जगत emission को लेकर भारतवर्ष के पीछे पड़ा है, परंतु समुद्र में जो उन्होंने करोड़ों टन waste & radioactive material dump कीये है, उसका क्या ? यह स्पष्ट होना चाहिए कि पृथ्वी पर 70% जल है और उसमें भी उतनी ही वनस्पति है, जो कि वायुमंडल को धरती से ज्यादा oxygen देती है।
नदी का एक मूल होना चाहिए:(उत्पत्ति)
 सजल मूल जिन्ह सरितन नाही
 बरस गये पुनि तबहिं सुखाहीं
नदी सदैव प्रवाह में रहनी चाहिये एवं गन्दगी से इनका साथ नही होना चाहिए:(प्रवाह और संगति)।
ग्रह भेषज जल पवन पट, पाई कुजोग सुजोग।
होहिं कुब्स्तु सुबस्तु जग, लखहीं सुलच्छन लोग।।
तेहरी Dam को ले लीजिए, 270 मीटर ऊंचा है और मात्र 2,000 MW बिजली पैदा करता है। China ने 265 मीटर ऊंचा  Dam बनाया और उससे 18,000 MW बिजली पैदा करता है। पूरी दुनिया वाले अब Dams नही बना रहे, यह एक भयंकर प्राकृतिक हस्तक्षेप है, वरन तोड़ रहे है। अब इनका मूल बदलना होगा।
1st  Priority : Irrigation – 12 महीने खेती
2nd Priority :Electricity generation
यदि किसान को 1) 12 महीने पानी मिलने लगे एवं 2) जब वो अपने उत्पाद को मंडी में बिक्री करने जाता है, तो उसको उसी दिन उसका उचित मूल्य मिले तो फिर किसान सिर्फ खेती एवं मवेशियों पर ध्यान दे सकेगा।
सनातन बिज्ञान के आधार पर जगत तीन स्तर पर exist करता है:
1) स्थूल (Gross Form )
2) सूक्ष्म (Subtle level )
3) कारण जगत (Causation level )
सर्व प्रथम कारण जगत की शांति होगी,फिर सूक्ष्म की और अंत में स्थूल की – यही क्रम है। अपने मंत्रो द्वारा सूक्ष्म जगत तक पहुंच सकते है एवं स्थूल को सुन्दर और सांस्कृतिक बना सकते है। कारण जगत तक तो योगी एवं बिरले ही जा सकते है। अपने यहाँ जो शांति मंत्र है, वो भी यही प्रतिपादित करता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में स्पष्ट लिखा है,की सृष्टि के लिए रचित पांचो तत्वों -गगन,समीर,अनल,जल,धरनी की मनुष्य को संभाल करनी चाहिए।
अपने आज के आर्थिक एवं Digital World में रहते हुए भी सूक्ष्म जगत से नाता जोड़ कर रख सकते है। ये जो चारो तरफ Radiation का भयंकर प्रकोप है,उसे कम कर सकते है। जिंदगी में GNP की जगह भूटान की तरह GNH हो जायेगा- Happiness will be Priority .EMI will not be: Early Murder of citizens
सनातन बिज्ञान के एक एक मन्त्र Physics, Chemistry और Mathematics के एक एक बहुमूल्य फार्मूला है,जिस पर व्यापक पैमाने पर शोध करने से, प्रकृति, जीव जंतु एवं मनुष्य (चर-अचर) को अत्यधिक लाभ होगा,जीवन Meaningful होगा।
सियाराम मैं सब जग जानी 
करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी 
 
एक टीम बनाकर काम किया जा सकता है:
–वेद के जानकार
–नदी विज्ञान के जानकार
–Nuclear science के जानकार
–Botany के जानकर
–Dedicated  work  force in field
एक संत ने, निम्नलिखित सूत्र दिया:
1) पुरुषार्थ: 1) लक्ष्य 20% (अभी 20 %)
                2) साधन 20% (10 %)
                3) कठिन परिश्रम 30 % (20 %)
2) प्रार्थना: 10% (अभी इस पर 50% जोर है )
3 ) प्रतीक्षा: 20 % (प्रतीक्षा तो कोई करता ही नहीं 0 %)
करम प्रधान विश्व करि राखा 
जो जस करहि तस फल चाखा  
% Marks मैंने बैठाया है।
एक ही Axis बनती है; ( Immediate )
जैविक खेती –पर्यावरण –गोवंश  
 
— गोबर का Premium हो जायेगा -ये वादा रहा। इसका Defence क्षेत्र में इतना उपयोग है।
–भारत के उत्तराखंड को Carbon negative बनाते है।
–मराठवाड़ा एवं बुंदेलखंड में 1000 Sq Km के जंगल बनाते है (2/3 साल में तैयार हो जायेगा )
— नदियों को प्रवाह में रखते हुए, उसमे गंदगी नहीं पड़ने देंगे (नदी में गंदगी ना पड़े, यह Urban development बिभाग/पर्यावरण बिभाग को देखना होगा )
— प्रार्थना में वैज्ञानिक यज्ञ होंगे, ऊपर वाली हजारो की अपनी अपनी कथा नहीं।
पर्यावरण स्वच्क्ष होगा, अवश्य होगा।  
लेखक :अरुण बागला, कलकत्ता 
अरुण बागला, कलकत्ता

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