Sat. Oct 19th, 2019

बीरगंज राजधानी के नाम पर जनता को ठगने वाले कांग्रेस और कम्युनिष्ट बेनकाब

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज, भाद्र ५ गते, विहिवार | नेपाली कांग्रेस और नेकपा के नेता बीरगंज में आकर उकसाते रहते है की प्रदेश की राजधानी बीरगंज होना चाहिए लेकिन जब निर्णायक समय आता है तो इनका काला चेहरा सामने आता है। जब प्रदेश की अस्थाई राजधानी तय करना था तो कांग्रेस से शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री थे, उस समय कांग्रेस ने प्रदेश की अस्थाई राजधानी जनकपुर रखा और पर्सा के लोगो को गुमराह करने के लिए बीरगंज घंटा घर पर खुद अनशन करने बैठ गए। जब उनकी असलियत जानकर, उनके अनशन में में लोगो ने आना बंद कर दिया तो रातो- रात अनशन का टेंट-शामियाना लेकर भाग गए।
नेकपा के नेता भी पर्सा के लोगो में बीरगंज को राजधानी बनाने का झूठा आश्वाशन देते रहते है। कांग्रेस से पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी और नेकपा के पूर्व सांसद राज कुमार गुप्ता कुछ दिनों से बीरगंज को राजधानी बनाने के लिए आंदोलन करने का राग अलाप रहे थे, लेकिन बीरगंज को राजधानी बनाने के प्रयास में इनकी नगण्य रही।
ज्ञात हो की कुछ दिन पहले सांसद प्रह्लाद गिरी ने बीरगंज को राजधानी बनाने के लिए पर्सा-बारा-रौतहट के सांसदों को पार्टीगत राजनीती से ऊपर उठकर सहयोग करने का आह्वान किया था और हिदायत दिया था की जो लोग सही में बीरगंज को राजधानी बनाना चाहते है, वे साथ दे, अन्यथा सोशल मीडिया में हीरो बनने और उन्माद पैदा करने की कोशिश नहीं करे। इसी प्रकार संघीय सांसद और जनप्रिय नेता प्रदीप यादव ने बीरगंज को राजधानी बनाने के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने का वादा किया है, उन्हें अपनी बात पर अड़ने और वादा पूरा करने वाले नेता के रूप में पहचाना जाता है।
इसी लिए पर्सा के प्रदेश सांसदों ने बीरगंज को राजधानी बनाने के लिए प्रस्ताव पेश किया। प्रदेश न. २ के सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के सांसद सिंघासन साह, जो पर्सा के ४ (ख) से निर्वाचित है। प्रदेश सांसद सिंघासन साह ने प्रदेश की राजधानी बीरगंज बनाने के लिए प्रदेश सभा में प्रस्ताव दर्ता किया। प्रस्ताव के समर्थन में  प्रदेश सांसद त्रय प्रह्लाद गिरी, करीमा बेगम हुए जन्नत अंसारी ने समर्थन किया है।
प्रदेश सभा में नेकपा ने प्रदेश का नाम जानकी और राजधानी धनुषा का प्रस्ताव किया है। कांग्रेस ने प्रदेश की राजधानी जनकपुर और नाम मिथिला- भोजपुरा रखने का प्रस्ताव रखा है।

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