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झापा आन्दोलन ‘विद्रोह’ होता है, लेकिन टीकापुर आन्दोलन क्यों नहीं ? :डा. भट्टराई

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काठमांडू, २५ अगस्त । समाजवादी पार्टी के संघीय परिषद् अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई ने कहा है कि टीकापुर घटना थारु विद्रोह ही है, लेकिन असावधानी के कारण मानवीय क्षेति हो गई है । डा. भट्टराई ने टीकापुर घटना को झापा आन्दोलन से तुलना करते हुए प्रश्न भी किया है । कैलाली जिला स्थित टीकापुर में शनिबार से शुरु थारुवान राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधन करते हुए डा. भट्टराई ने प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली की ओर संकेत करते हुए कहा– ‘अपने अधिकार के लिए लड़नेवाले थारुओं की आवाज विद्रोह नीं होता है, लेकिन आप लोगों की झापा आन्दोलन विद्रोह हो जाता है, यह कैसे ? आप लोगों की मुद्दा वापस की जाती है, लेकिन इन लोगों की मुद्दा नहीं, क्यों ?’
डा. भट्टराई ने कहा कि सत्ता में रहनेवाले प्रधानमन्त्री ओली और पुष्पकमल दाहाल वास्तविकता को अनदेखा कर रहे हैं । अपने ही पूर्व सहकर्मी प्रचण्ड और गृहमन्त्री रामबहादुर थापा को उन्होंने प्रश्न किया– ‘आप लोग अपनी आन्दोलन को राजनीतिक कह रहे हैं, लेकिन अन्य द्वारा किया गया विद्रोह राजनीतिक नहीं है ?’ डा. भट्टराई को कहना था कि वह टीकापुरबासी को भडकाने के लिए यहां नहीं आए हैं । उन्होंने आगे कहा– ‘मैं समसानघाट में होनेवाला शान्ति के पक्ष में नहीं हूँ । विभेद में रहे लोग चुपचाप रहते हैं तो वह समसानघाट की शान्ति की तरह होती है । मै. उस तरह की शान्ति के पक्ष में नहीं हूँ । हम लोग सचेत शान्ति के पक्ष में हैं ।’
अध्यक्ष डा. भट्टराई ने कहा कि सब लोग भाद्रा ७ गते की बात करते हैं, लेकिन वही लोग भाद्र ८ गते को भूल जाते हैं । उनका मानना है कि भाद्र ८ गते यहां राज्य की ओर से लूट मचाया गया है, महिलाओं की अस्मिता को लूट गया है । डा. भट्टराई ने आगे प्रश्न किया– ‘७ गते की काण्ड में रेशम चौधरी और उनके दोस्तों को कारवाही की गई, लेकिन ८ गते राज्य के साथ मिलकर लुटपाट करनेवाले और महिलाओं के ऊपर बलात्कार करनेवाले को कहां कारवाही की गई ?’

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