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मधेश की असन्तुष्टि सम्बोधन होना जरुरी हैः पूर्व राष्ट्रपति डा. यादव

काठमांडू, २५ अगस्त । पूर्व राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने कहा है कि संविधान के संबंध में मधेश में जो असन्तुष्टि है, उसमें सम्बोधना होना जरुरी है । इसके लिए उन्हाेंने प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से आग्रह भी किया है । शनिबार काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए पूर्व राष्ट्रपति डा. यादव ने कहा– ‘मेरी चाहत थी कि संविधान निर्माण करते वक्त सभी समस्या समाधान हो सके, मधेश में भी उसका स्वागत हो सके । लेकिन वैसा नहीं हो सका । तब भी मैं खुश हूँ, क्योंकि आज सभी पार्टी चुनाव में सहभागी है, सब साथ–साथ चल रहे हैं ।’
डा. यादव ने कहा कि तत्कालीन प्रमुख राजनीतिक पार्टी, नेपाली कांग्रेस, एमाले और माओवादी की ओर से संविधान में संशोधन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है, अब उस प्रतिबद्धता को कार्यान्वयन करनी चाहिए । डा. यादव ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों की प्रमुख प्राथमिकता सत्ता होने के कारण ही प्रथम संविधानसभा संविधान निर्माण के लिए असफल हो गया था । उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राष्ट्रीय और कुछ अदृश्य शक्ति भी इसके लिए क्रियाशील था । पूर्व राष्ट्रपति डा. यादव ने कहा है कि इसके बारे में वह एक पुस्तक भी लिखना चाहते हैं ।

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1 thought on “मधेश की असन्तुष्टि सम्बोधन होना जरुरी हैः पूर्व राष्ट्रपति डा. यादव

  1. It is difficult to digest what the former President Dr. Yadav says now. He should not have signed the faulty constitution. He blindly supported constitution which was against the “Will and intetest” of Madheshi people. Youths should understand.

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