Fri. Oct 18th, 2019

पिघल रही सुलग रही, तेरे प्यार में मै जल रही : निशा अग्रवाल

आज एक प्रेम गीत

धुली धुली ये वादियाँ
ये मौसमों की शोंखियाँ
पुकारता है मन मैरा
तु आ भी जा
तु आ भी जा
सरगोशियाँ करती हैं ये हवाएं
पत्ता पत्ता कोई गीत गुनगुनाए
मदहोश सा बदन मेरा
तु आ भी जा
तु आ भी जा
लो झुक गया अभिमानी आसमां
आगोश में लेने को धरा
भरले बाहों में मुझे
तु आ भी जा
तु आ भी जा
पिघल रही सुलग रही
तेरे प्यार में मै जल रही
लबों को बस तेरी प्यास है
तु आ भी जा
तु आ भी जा
हां आ भी जा, अब आ भी जा।।।।
निशा अग्रवाल
धरान

निशा अग्रवाल
धरान

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