Sat. Oct 19th, 2019

जनसंख्या वरदान या अभिशाप : योगेश मोहनजी गुप्ता

भारत से आज अत्यधिक मात्रा में मस्तिष्क का पलायन हो रहा है भविष्य में भारत के लिए बहुत ही कष्टदायी स्थिति होगी,

योगेश मोहनजी गुप्ता, मेरठ | भारत में जनसंख्या नियत्रंण हेतु विभिन्न गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के द्वारा आवाज उठाई जा रही है कि सरकार जनसंख्या नियत्रंण कानून लेकर आए। ये एनजीओ भारत में जनसंख्या कानून क्यों लाना चाहते हैं और किस धर्म की जनसंख्या पर नियन्त्रण करना चाहते हैं यह सर्वविदित है।
सम्भवतया भारत देश की जनता को यह संज्ञान होगा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद कई बार अपने भाषण में यह कहा है कि भारत की जनसंख्या ही भारत की शक्ति है और इस तथ्य को उन्होंने आज सम्पूर्ण विश्व के समक्ष प्रमाणित भी कर दिया है। प्रधानमंत्री बनने के पश्चात मोदी जी इसी विश्वास के साथ दूसरे देशों में गए। वहाँ के ओद्यौगिक जगत को उन्होंने भारत में आने के लिए निमत्रंण दिए, उस निमत्रंण में जो मूल भावना निहित होगी वह, भारत की जनसंख्या की अधिकता के कारण उसका विशाल उपभोक्ता बाजार वाला देश होना है। अर्थात् मोदी जी ने सम्पूर्ण विश्व को भारत में आकर्षित करने के लिए भारत की जनसंख्या को बहुत बड़ा अस्त्र बनाया है।
सम्पूर्ण विश्व में आज आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है, जिसके कारण एक निराशा की भावना सर्वत्र व्याप्त है। वास्तवित स्थिति यह है कि सम्पूर्ण विश्व में उत्पादन और जीडीपी भी गम्भीर रूप से गिरता जा रहा है। इसका भारत और चीन की जीडीपी पर भी प्रभाव हो रहा है परन्तु विश्व के यूरोपीय देशों की अपेक्षा कम प्रभाव पड़ रहा है। इसका एक मात्र कारण भारत की जनसंख्या और उसका विशाल उपभोक्ता बाजार है। भारत यदि प्रगतिशील बन सकता है तो वह जनसंख्या के बल पर ही बन सकता है। आज यदि निकट भविष्य में विश्व का एकमात्र युवा देश अर्थात् सबसे ऊर्जावान देश विश्व में कोई होगा तो वह भारत होगा। उसका श्रेय भी भारत की जनसंख्या को जाएगा है।
जनसंख्या नियत्रंण के सन्दर्भ में कानून के समर्थक यह तर्क देते हैं कि यदि भारत में जनसंख्या के ऊपर नियत्रंण नहीं किया गया तो यहाँ लाॅ एण्ड आॅडर आदि की समस्या हो जाएगी। लाॅ एण्ड आॅडर की समस्या जनसंख्या के कारण नहीं अपितु अशिक्षा और भ्रष्टाचार के कारण होती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन और भारत का केरल प्रदेश है। हम चीन की गणना भारत के सन्दर्भ में नहीं भी करें और भारत के केरल प्रदेश को आदर्श मानकर उसका ही उदाहरण लें तो केरल प्रदेश भारत का सर्वाधिक सम्पन्न प्रदेश है। इसका मुख्य कारण वहाँ पर 100 प्रतिशत साक्षरता है, जिसके कारण वहाँ का युवा शिक्षित होकर सम्पूर्ण विश्व में अपनी पहचान बनाए हुए है और वहाँ से धन अर्जित कर अपने प्रदेश को भेज रहा है। केरल जो कभी भारत का एक निर्धन प्रदेश हुआ करता था, वह आज एक सम्पन्न प्रदेश बन चुका है यद्यपि वहाँ मुस्लिम समुदाय अधिक संख्या में निवास करते हैं।
जनसंख्या भारत की शक्ति है। भारत को यदि सम्पन्न बनाना है और मंदी से युद्ध करना है तो उसके लिए भारत की साक्षरता पर ध्यान देना होगा। यदि जनता साक्षर हो गई तो जनसंख्या नियत्रण अपने आप ही हो जाएगी। उसके लिए आन्दोलन करने, पैदल मार्च करने की या जनता के रोजगार को नष्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस समय भारत में मंदी का वातावरण है, ऐसे में जनसंख्या नियन्त्रण कानून के लिए आन्दोलन करना सम्भवतया उचित नहीं है, वैसे भी यदि देखे तो भारत की जनसंख्या वृद्धि की 6 प्रतिशत दर पिछले 3 वर्ष में निरन्तर गिर रही है।
जनसंख्या विरोधियों का उद्देश्य यदि एक समाज की जनसंख्या को नियन्त्रित करना है तो वे यह भूल रहें हैं कि जितनी जनसंख्या बढ़ाने का दोषी वो समाज है उतना ही दोषी हिन्दू समाज की अनेको जातियाँ भी हैं, जो निरक्षरता के कारण अभी जनसंख्या रोकने पर विश्वास नहीं करती है। एक समाज का विरोध करके भारत प्रगति नहीं कर सकता। देश की प्रगति के लिए प्रधानमंत्री का कथन सबका साथ, सबका विकास होना आवश्यक है। संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत जी की पहल कि मुस्लिम समाज को भी मुख्य धारा में लाया जाए, बहुत ही प्रशंसनीय है। उनकी पहल से उस समाज में असुरक्षा की भावना कम हो रही है और वे लोग भी अब जमियत उलेमा-ए-हिन्द के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी, मोहन भागवत जी के साथ मुख्य धारा में आने के लिए लालायित हो रहें हैं। उनको हिन्दुओं के द्वारा अवसर दिया जाना चाहिये क्यांेकि जब वे मुख्य धारा में आ जाएंगे तो उनका साक्षारता दर भी बढ़ेगा तत्पश्चात केरल की भांति सम्पूर्ण देश प्रगति करेगा और भारत अपनी जनसंख्या के बल पर महाशक्ति हो जायेगा।
जनंसख्या नियत्रंण कानून के समर्थकों को यह भी सोचना चाहिए कि यदि इसे अनिवार्य रूप से मानने के लिए विवश किया गया तो इससे अविश्वास एंव विरोध का वातावरण उत्पन्न होगा और जनता में व्यर्थ का असन्तोष व्याप्त होगा। भारत एक विकासशाील देश है और भारत को विकसित देश बनाने के लिए अल्प पारिश्रमिक का अत्यधिक योगदान हो सकता है। यदि भारत से अल्प पारिश्रमिक का अंत हो गया तो भारत के विकसित देश बनने में बहुत कठिनाई होगी। आज एफडीआई अर्थात् भारत में होने वाले विदेशी निवेश का मुख्य कारण यहाँ पर सस्ते श्रमिकों का उपलब्ध होना सबसे बड़ा आकर्षण है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी देश में विदेशी धन लाना चाहते हैं। हम सब को उनके हाथ मजबूत करने चाहिए। हमें चीन से भी सबक लेना चाहिए। चीन में जनसंख्या नियत्रंण कानून लाकर जनसंख्या पर तो नियत्रंण कर लिया गया, परन्तु देश वृद्ध हो गया और चीन के शासकों को इस कानून को निरस्त करने के लिए विवश होना पड़ रहा है परिणामस्वरूप इस कानून से चीन को अत्यधिक हानि हुई है ।
भारत से आज अत्यधिक मात्रा में मस्तिष्क का पलायन हो रहा है। आज यहाँ के युवा रोजगार प्राप्त करने के लिए भारत को छोड़कर विदेशों की ओर पलायन कर रहें हैं। पलायन करने वाले भारतीयों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रहीं है, जो कि भविष्य में भारत के लिए बहुत ही कष्टदायी स्थिति होगी, क्योंकि कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देश भारतीयों को सहृदय से निमंत्रण दे रहें हैं और भारतीय युवा इस निमन्त्रण को सहर्ष स्वीकार कर रहें हैं। भविष्य में जब भारत को ज्ञानवान मस्तिष्क की आवश्यकता होगी तब वह प्रतिभासम्पन्न भारतीय देश में नहीं होगा और जिस देश में सुदृण मस्तिष्क की कमीं जो जाती है, वह देश कभी विकास नहीं कर सकता और उसे विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
भारत में जनंसख्या नियत्रंण कानून की अपेक्षा शिक्षा का प्रसार होना अतिआवश्यक है। सरकारी स्कूलों की द्वारा शिक्षा व्यवस्था की त्रुटियों को सरकार को शीघ्रातिशीघ्र दूर करना होगा। शिक्षक योग्यता के आधार पर रखने होंगे, शिक्षकों की योग्यता का समय-समय पर पुनः परीक्षण करना होगा और अयोग्य व अकर्मण्य शिक्षको को घर बैठाना होगा। भारत के घर-घर में शिक्षा पहुँचे तथा भारत का हर परिवार, हर समाज शिक्षित हो तो जनसंख्या नियत्रंण स्वंय ही हो जाएगी तथा भारत अपनी जनसंख्या से ही विश्व का एक विकसित महाशक्तिवन देश बन जाएगा।

योगेश मोहनजी गुप्ता
चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी
मेरठ
भारत

 

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