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डेंगू के इलाज के लिए तैयार की गई आयुर्वेदिक दवा जल्द ही बाजार में आएगी

 

डेंगू के इलाज के लिए तैयार की गई आयुर्वेदिक दवा का क्लीनिकल ट्रायल तीसरे और अंतिम चरण में चल रहा है और यह अगले दो सालों में बाज़ार में आ जाएगी। मंगलवार को यह जानकारी भारत में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने दी। इस दवा पर आयुष (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) शोध कर रहे हैं।

कोटेचा ने बताया कि इसे भारत में उगाई जाने वाली विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी- बूटियों से बनाया गया है और इस दवा के गोली के रूप में अगले दो सालों के अंदर बाज़ार में आने की संभावना है। पिछले 100 दिनों में मंत्रालय की उपलब्धियों पर बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस से इतर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दवा का क्लीनिकल ट्रायल तीसरे और अंतिम चरण में है। अगले दो सालों में यह पूरा हो जाएगा।

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एक बार शोध पूरा होने के बाद यह डेंगू के लिए तैयार की गई पहली दवा होगी। उन्होंने कहा कि दवा का नाम क्या होगा और यह कैसे बेची जाएगी जैसे मुद्दों पर निर्णय होना बाकी है। उन्होंने कहा कि खुराक के मानकीकरण और दवा में उपयोग की जाने वाली जड़ी-बूटी के अनुपात पर अभी आइसीएमआर और मंत्रालय की टीम को काम करना होगा।

डेंगू के लक्षण

डेंगू में बुखार के साथ आंखें लाल हो जाती है और स्किन का रंग हल्का लाल होने लगता है। डेंगू बुखार 2 से 4 दिन तक रहता है और खून में कमी होने लगती है। कुछ लोगों को चक्कर आने की वजह से बेहोशी छा जाती है। रोगी के मुंह का स्वाद बदल जाता है और उसे उल्टियां भी आती हैं। अचानक से शरीर का तापमान 104 डिग्री हो जाता है और ब्लड प्रेशर भी नार्मल से बहुत कम हो जाता है।
डेंगू बुखार उस मच्छर के काटने से होता है जिसने पहले से ही किसी डेंगू के मरीज़ को काटा है। यह मच्छर बरसात के मौसम में ज्यादा फैलते हैं और यह उन जगहों पर तेज़ी से फैलते हैं जहां पानी जमा हो।

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-यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता लेकिन उस मच्छर के काटने से होता है जिसने किसी संक्रमित व्यक्ति को काटा है

डेंगू उन लोगों को जल्दी प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यह भी हो सकता है कि डेंगू बुखार एक ही व्यक्ति को कई बार हो जाए। लेकिन ऐसी स्‍थिति में बुखार के प्रकार भिन्न होंगे।

-मलेरिया की तरह डेंगू बुखार भी मच्छरों के काटने से फैलता है। इन मच्छरों को ‘एडीज मच्छर’ कहते हैं और यह दिन में काटते हैं।

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