Wed. Feb 19th, 2020

बड़े-बड़े अमीरों को देखकर, मैं भी अमीर कहलाना चाहता हूँ : सौरभ कुमार ठाकुर

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कुछ करना चाहता हूँ,
पर कुछ कर नही पाता हूँ ।
आगे बढ़ना चाहता हूँ, 
पर आगे बढ़ नही पाता हूँ ।
कोई मदद करना चाहे,
तो मदद ले नही पाता हूँ ।
किसी से मदद मांगना चाहता हूँ, 
पर शरमा जाता हूँ ।
अच्छे जगहों पर घूमना चाहता हूँ,
पर जेब खाली पाता हूँ ।
बड़े लोगो को देखता हूँ,
तो अपने नसीब को कोषता हूँ ।
अच्छा-अच्छा भोजन चाहता हूँ, 
पर कभी-कभी भूखे पेट ही सो जाता हूँ ।
बड़े-बड़े अमीरों को देखकर, 
मैं भी अमीर कहलाना चाहता हूँ ।
पर अपने आर्थिक परेशानियों के कारण, 
मैं सिर्फ गरीब कहलाता हूँ ।
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
मुजफ्फरपुर, बिहार
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
मुजफ्फरपुर, बिहार
मो0- 8800416537
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