Sun. May 31st, 2020

महा शिवरात्री के पावन अवसर पर दो शब्द इश्वर के नाम : मीरा राजभण्डारी

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महा शिवरात्री के पावन अवसर पर दो शब्द इश्वर के नाम

एक थे हम
टुकडे मे बट् रहे हो
चन्द चांदी सिक्के
जेवर सोने का,
महल कि धुप नहलाया उन्हे
बदल् रहे है हम सिक्के मे
बट रहे है हम हर टुकडे मे
बाबा साइ जो
मनोको जोड रहे थे
बदी मुश्किल से जोडा था
चांदी के चन्द टुकडे मे
टुकडे टुकडे
हम हो रहे है
अरे किस देश कि बाते तुम कर रहे हो
जिसका अपना कोइ देश नही
कोइ भेस नही ,
शर्म करो ओ आदमी
तु जानवर से बद्तर क्युँ हो
मानलो तु हम तो
जानवर को भि पूजते है
खता तुम्हारे पैदाइशी मे है या
सन्स्कार तुझे दिया गया
भौचक्के हम रह्गये
मानवता तेरा कहाँ गये
णिराकार व इश्वर जिसे कहा गया
उस्को तुने नाम दिया
तेरे हि हिसाब से
अरे मुर्ख
जरा झाँको मनसे तु जरा
इश्वर तो तेरे मनने है
मेरे मन मे है ,
तु उस रास्ते से गुजरे
जो तेरे हिसाब से मुकाम नजदिक था
मै इस रास्ते से गुजरा हुँ
मेरा मुकाम हिसाब से
अल्लाह इश्वर राम तु
रहम कर मेरी जिसस
वह बेलगाम
बेमुराद …..
तेरी मेरी मुकाम को
बदनशिबी का पैगाम दे चले
चन्द टुकडे चांदी के लिये
बेरहम वह
हम सब को
इस धर्ती को
आशमा तारे को
तोड रहे है
जिल्लत है हमे
और बिन मुरत हम
खामोशी से देख रहे है

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मीरा राजभण्डारी,
साहित्यकार

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