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काठमांडू, १२ अप्रिल । सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के अध्यक्ष द्वय पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड और केपशर्मा ओली बीच रहे असमझदारी फिर बाहर आने लगी है । विशेषतः गत मार्गशीर्ष ४ गते दो अध्यक्ष के बीच कार्यविभाजन होने के बाद प्रायः हरेक महत्वपूर्ण सरकारी निर्णय में उन लोगों की असमझदारी सामने आती है ।

 

गृह मन्त्रालय स्रोत के अनुसार पिछली बार प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने डीआईजी बढुवा के लिए सूची मांग किया । राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् में रहे एसएसपी गणेश ऐर का नाम नेकपा अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड द्वारा आग्रह होने पर गृहमन्त्री रामबहादुर थापा ने सिफारिश किया था । प्रचण्ड ऐर को प्रथम नम्बर में ही रखकर सिफारिश करना चाहते थे, लेकिन गृहमन्त्री थापा ने उनको ५वें नम्बर में रख दिया ।

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इसीतरहर चैत्र २४ गते मन्त्रिपरिषद् बैठक ने महाप्रसाद अधिकारी को राष्ट्र बैंक में गर्भनर नियुक्त करने का निर्णय लिया । प्रचण्ड मीनबहादुर श्रेष्ठ को गभर्नर बनाना चाहते थे । लेकिन प्रधानमन्त्री ओली ने इस विषय में कोई भी विचार–विमर्श ही नहीं किया । चैत्र २ गते सभामुख अग्निप्रसाद सापकोटा ने गोपालनाथ योगी को संसद् में कार्यवाहक महासचिव का जिम्मेदारी दिया । योगी को कार्यवाहक बनाने के लिए भी दो अध्यक्ष के बीच कोई बीच सहमती नहीं हुई थी ।

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ऐसे कई प्रकरण है, जिससे अध्यक्ष द्वय ओली और प्रचण्ड के बीच में रहे संकटपूर्ण संबंध को उजागर होता है । विशेषतः गत मार्गशीर्ष ४ गते ओली और प्रचण्डबीच हुए कार्यविभाजन के बाद पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमन्त्री के बीच तालमेल नहीं हो रहा है । इसीबीच पौष २३ गते उपाध्यक्ष वामदेव गौतम निवासी में सचिवालय सदस्यों की एक भेला आयोजन संपन्न हुआ, जहां बहुमत सदस्य अध्यक्ष प्रचण्ड के पक्ष में दिखाई दिए ।

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उसके बाद ओली पक्षधर नेताओं का कहना है कि पूर्व एमाले के भीतर खेलकर प्रचण्ड ओली को घेराबंदी कर रहे हैं । इधर प्रचण्ड पक्षधर नेताओं का कहना है कि ओली सरकार में एकल निर्णय करते हैं और पार्टी संचालन में असहज अवस्था सिर्जना करते हैं ।

 

आज प्रकाशित अन्नपूर्ण पोष्ट में इसके संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित है ।

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