Wed. Dec 12th, 2018

सरहद के मुद्दों को समझना आवश्यक : रणधीर चौधरी

हिमालिनी, अंक नोभेम्बर 2018,नेपाल भारत महिला मैत्री समाज के आयोजना में १० अक्टुबर के दिन आयोजित नेपाल भारत क्रस बोर्डर जर्नलिस्ट कन्वरसेसन” कार्यक्रम मे सहभागी होने का मौका मुझे भी प्राप्त हुआ था । भारत के बिहार राज्य से दो दर्जन और नेपाल के प्रदेश नं २ से लगभग चालीस पत्रकारो का महाकुंभ था वह कार्यक्रम । वैसे ही नेपाल के नागरिक समाज एवं विद्वानो की भी सहभागिता थी ।

 

जैसा की हमें पता है नेपाल और भारत के बीच १७५८ किमी की खुली सीमा है । यह खुली सीमा नेपाल भारत के अनोखे रिश्तो को दर्शाता है वहीं सुरक्षा को लेकर यह अपने आप मे चुनौती भी है । फिर भी सदियो से खुली सीमा रहते हुए भी अभी तक नेपाल भारत के रिश्ते सौहार्दपूर्ण रहा है । और विश्वास है की आगे भी यह रिश्ता अपनी मजबूती के साथ बरकरार रहेगा । परंतु कुछ मुद्दे ऐसे हैं सरहद से जुड़े जिन पर कड़ी नजर और नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है । वह है, मानव तस्करी, लागु पदार्थ और आतंकवाद । पत्रकारों के कार्यक्रम मे बोर्डर से सम्बन्धित मुद्दाें पर सम्पन्न चर्चा में भी पत्रकाराें द्वारा ऐसे ही समस्याओ को उठाया गया था और उस पर बृहत चर्चा की गई । मठिहानी–मधवापुर, जलेश्वर–भिठ्ठामोड़, जनकपुर–जयनगर, मलंगवा–सोनवर्षा, गौर–बैर्गिनया यह नेपाल और भारत के शहर के नाम हैं जहाँ की खुली सीमा है ।

यही सीमा है, जिसके कारण भारत नेपाल के बीच रोटी बेटी, खेत खलिहान का सम्बन्ध भौगोलिक हिसाब से टिका हुआ है । और दुखद पक्ष यह है कि आजकल नेपाल के युवावर्ग इन्हीं खुली सीमा का फायदा उठाकर भारत के सीमावर्ती शहरों में जाकर नेपाल में प्रतिबन्धित ‘ड्रग’ का सेवन कर अपनी उत्पादनमूलक शक्ति नष्ट कर रहे हैं । इसी तरह भारत के बिहार में हुई शराबबंदी के बाद नेपाल से अवैध तरीके से बिहार मे शराब की तस्करी जारी है । वैसे ही मानव तस्करी में लगे कुछ अपराधिक मानसिकता वाले लोग भी खुली सीमा का फायदा उठाने से नही चूकते हंै । और समय समय पर आतंकवादियों का प्रवेश भी इन्ही सीमाआें से होने की खबर आती रहती है । यह ऐसी प्रकृति के मुद्दे हैं जो भारत नेपाल के अनोखे सम्बन्धाें को बदनाम करने का काम करती है । परंतु अगर प्रशासन ठान ले तो इस पर नियन्त्रण पाना कठिन नहीं है । प्रशासन की चर्चा इसलिए कर रहा हूँ कि जनकपुरधाम के कार्यक्रम में दोनों देशों के पत्रकाराें का जमीनी अनुभव यह था की सरहद पर तैनात अधिकारियाें की कार्य सक्रियता उतनी नहीं है जितनी गम्भीरता के साथ होनी चाहिए । खेद के साथ वे लोग बता रहे थे कि दोनाें देशों के अधिकारी चन्द आर्थिक लाभ के कारण अपने कार्यप्रति के प्रति वफादारी नहीं कर पाते हैं । पर यह सभी पर हम लागू नहीं कर सकते क्योंकि अगर सदियों से यह खुली सीमा आज तक है तो इसमें ईमानदार अधिकारियों का भी महत्त्वपूर्ण योगदान है । अहम सवाल यह भी है कि जब नेपाली गाड़ी भारत के नजदीकी शहर में जाती है तो इन्हें भन्सार (कर) कटाने की आवश्यकता नही पड़ती है परंतु भारत के लोग जब गाड़ी ले कर आते हंै तो उन्हे भन्सार कटाना अनिवार्य है । क्या यह विभेद नही है ? भारतीय पत्रकारों द्वारा उठाया गया सवाल था यह । वास्तव में कहा जाय तो दोनों देशो के लिए व्यवस्था एक जैसी होनी चाहिए आवागमन के नियमों को लेकर ।

दोनों देशों की सरकार को इस मसले को गम्भीरतापूर्वक लेने की आवश्यकता है । और दो देशो के भीतर कम से कम ४० किमी तक सवारी ले कर जाने पर भन्सार देने के प्रावधान को हटाना चाहिए । इससे पिपल–टु–पिपल वाले सम्बन्धों में और प्रगाढ़ता आ सकती है । वास्तव में कहा जाय तो नेपाल भारत के बीच जो सम्बन्ध है इस के बीच दोनाें देशों की जनता कभी नही चाहती कि सियासत के कारण इस रिश्ते पर कोई असर पड़े । दोनो देशों से आए पत्रकारो का भी मानना यही था । नेपाल आर्थिक हिसाब से कमजोर है परंतु नेपाल मे कुछ ऐसी खासियत है जो भारत नेपाल के बीच रहे सम्बन्धों के अभूतपूर्व आधाराें मे से एक है । जैसे कि हमें पता है नेपाल के हजारों छात्र भारत अध्ययन के लिए जाते हैं । तो भारत के भी बच्चे चिकित्सा शिक्षा के लिए नेपाल आते हैं । धार्मिक हिसाब से भी दोनों देशो के सम्बन्ध अनोखे हैं ।
नेपाल के लोग भारत के बाराणसी, माता वैष्णोदेवी जाते हैं वहीं भारत के लोग माता जानकी, पशुपतिनाथ, लुम्बिनी और मानसरोबर जाते है । और यह आदान–प्रदान तभी अविवादित तरीके से निरन्तर चल सकेगी जब दोनों देशो के बीच खुली सीमा अविवादित रहेगी । इससे दो देशों के नागरिकों के जेहन मे यह भावना हमेशा रहेगी कि नेपाल भारत के बीच में खिची गई लकीर महज राजनीतिक हिसाब से खींची गई है और जो नागरिकों के बीच के मित्रवत भावनाओं को न तो अलग कर पाई है न कर पाएगी । ऊपर उठाए गए सीमा से जुड़े मुद्दे काल्पनिक नहीं अपितु दो देशों के पत्रकार जो की जमीनी रिपोर्टिङ करते हैं उनके द्वारा बाहर लाई गई कड़वा सच है । इन कड़वी सच्चाई को कूटनीतिक पहलता के माध्यम से मिठास में बदलने की आवश्यकता है । और यह सम्भव भी है । हमें अपने अपने स्तर से ईमानदार योगदान पहुँचाने की आवश्यकता है । और नेपाल भारत के अद्भुत सम्बन्ध को जीवन्त रखना हमारा धर्म भी है । अन्त में, नेपाल–भारत मित्रता अमर रहे ।

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